--Advertisement--

सील तोड़कर बनाई तीन मंजिलें, जेडीए ने ‘जुगाड़ की इंजीनियरिंग’ से तोड़ीं

जेडीए ने डेढ़ साल पहले बिल्डिंग को सील किया था, इसके बावजूद सेटबैक के बिना बेसमेंट व चार मंजिल बना दी।

Danik Bhaskar | Jan 17, 2018, 03:33 AM IST

जयपुर. जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) की प्रवर्तन विंग व इंजीनियर विंग ने मंगलवार को ‘जुगाड़ की इंजीनियरिंग’ से मानसरोवर में तीन मंजिला अवैध बिल्डिंग को तोड़ दिया। जेडीए ने यह बिल्डिंग पोकलैंड, ब्रेकर मशीन व जेसीबी से ही यह बिल्डिंग तोड़ी है। पहले अंदर के पिलर हटाए और फिर मशीन से धक्का देकर बिल्डिंग को गिरा दिया। जेडीए गोपालपुरा बाइपास व निम्स में भी इस टेक्नीक से बिल्डिंग तोड़ चुका है। जेडीए ने डेढ़ साल पहले बिल्डिंग को सील किया था, इसके बावजूद सेटबैक के बिना बेसमेंट व चार मंजिल बना दी। जेडीए ट्रिब्यूनल कोर्ट ने पिछले सप्ताह अपील खारिज कर दी थी।

जेडीए जोन 8 में मानसरोवर की पत्रकार कॉलोनी सी -34 कॉमर्शियल भूखंड है। यह बिल्डिंग उदय कंस्ट्रक्शन कंपनी की है। जेडीए के बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन करने पर प्रवर्तन विंग ने मई 2016 में जेडीए एक्ट की धारा 32 व 33 का नोटिस कर बिल्डिंग सील कर दी। इसके बावजूद बिल्डिंग का निर्माण होता रहा।

बिल्डिंग में बेसमेंट के साथ ही तीन मंजिला बिल्डिंग बन गई। भवन मालिक जेडीए ट्रिब्यूनल कोर्ट में अपील कर दी। पिछले सप्ताह इसकी अपील खारिज हो गई। जेडीए ने मंगलवार को बिल्डिंग तोड़ दी। कार्रवाई के दौरान जेडीए प्रवर्तन विंग की डिप्टी एसपी सीमा भारती व प्रवर्तन अधिकारी नरेंद्र कुमार मौजूद थे। जेडीए के पुलिस अधीक्षक राहुल जैन ने बताया कि बेसमेंट के अलावा ग्राउंड फ्लोर व तीन मंजिल बना ली। बिल्डिंग में साइट-बैक नहीं था।

गोपालपुरा बाइपास की बिल्डिंग तोड़ने के बाद बने खतरों के खिलाड़ी
जेडीए के इंजीनियरों ने दो महीने पहले गोपालपुरा बाइपास पर बड़ी बिल्डिंगों को लोकंडा सिस्टम के साथ ही ब्रेकर व पोकलैंड मशीन से तोड़ी थी। इसके बाद निम्स की बिल्डिंगों को भी जेडीए के इंजीनियरों ने ही ठेके पर ली गई मशीनों से तोड़ दिया।

पुराने मामलों के अनुभव के आधार पर जेडीए के इंजीनियरों ने मंगलवार को भी पत्रकार कॉलोनी की बिल्डिंग को तोड़ा है। हालांकि बिल्डिंग में पहले दीवार व कुछ पिलर हटाने के बाद गिराने की तकनीक में बहुत ही जोखिम है तथा हादसा होने की आशंका रहती है। हालांकि अब तक हादसा नहीं होने से इंजीनियरों में आत्मविश्वास है।