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100 मीटर की दूरी पर काम कर रहा था हाइटेक नकल गिरोह का ‘वाॅर रूम’

3 माह पहले किराए पर लिया था इंस्टीट्यूट, रोजाना 10-10 हजार में दो एक्सपर्ट हायर किए थे

Dainik Bhaskar

Mar 13, 2018, 01:31 AM IST
cheating gang busted in jaipur rajasthan

जयपुर. रिमोट एक्सेस से सिस्टम हैक कर कांस्टेबल भर्ती के अभ्यर्थियों का पेपर हल करने वाले गिरोह ने पूछताछ में बताया सेंटर में बैठा अभ्यर्थी माउस हिलाता रहता, ताकि किसी को शक न हो, वहीं दूसरी बिल्डिंग में बैठा एक्सपर्ट किताबें पढ़कर पेपर कर देता था। 3 दिन में गिरोह ने 13 अभ्यर्थियों का पेपर हल किया था। मंगलवार को होने वाले पेपर में 8 अभ्यर्थियों के साथ डील हो चुकी थी। गिरोह का मास्टरमाइंड विकास मलिक एक माह से साजिश में लगा हुआ था। इसके लिए 3 महीने पहले ही उसने इंस्टीट्यूट किराए पर लिया था। विकास ने दो एक्सपर्ट संजय व अभिमन्यु को 10-10 हजार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से हायर किया और सिस्टम को हैक करने का ताना-बाना बुना।


- कांस्टेबल भर्ती परीक्षा एप्टेक कंपनी आयोजित कर रही है। कंपनी ने उन एजेंसियों को संसाधन उपलब्ध कराने को कहा था, जहां सेंटर बनाए गए।

- मास्टरमाइंड विकास ने इसी का फायदा उठाते हुए किराए पर लिए गए इंस्टीट्यूट सरस्वती इंफोटेक में हायर किए गए दोनों एक्सपर्ट संजय व अभिमन्यु को अपना कर्मचारी बताकर सिस्टम में घुसपैठ की अनुमति दे दी।

- सोमवार को वायरिंग कर रहे दोनों एक्सपर्ट को कंपनी के कर्मचारी ने टोका तो बहस हो गई। इस पर कर्मचारी ने अधिकारियों को पूरे मामले की सूचना दी।

- अधिकारियों ने आईजी हैडक्वार्टर संजीव कुमार नार्जारी को बताया। आईजी ने एसओजी आईजी एमएन दिनेश को मामले की जानकारी दी और शक जाहिर किया।

- आईजी दिनेश एमएन, डीआईजी संजय क्षोत्रिय, एएसपी करण शर्मा, पुष्पेन्द्र सिंह के साथ मौके पर पहुंचे और पूछताछ की तो मामला सामने आ गया।

2-4 लाख रु. लिए हर कैंडिडेट से
- आईजी दिनेश एमएन ने बताया कि सात मार्च से शुरू हुई कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के लिए राजस्थान के 10 जिलों में परीक्षा केंद्र बने हैं। सरस्वती इंफोटेक इंस्टीट्यूट भी इनमें से एक था।

- जांच में पता चला है कि इंस्टीट्यूट तीन महीने पहले ही किराए पर शुरू किया गया था। इससे पहले यह कंपनी दिल्ली में संचालित थी।

- विकास मलिक के अलावा इसके दो पार्टनर कपिल और मुख्त्यार भी बताए जा रहे हैं। तीनों ने पहले परीक्षा केंद्र में आने वाले अभ्यर्थियों से संपर्क किया।

- शुरुआती जांच में पता चला है कि कुछ अभ्यर्थियों को नकल और पेपर बताने का आश्वासन देकर 2 से 4 लाख रुपयों में सौदा ​तय किया गया। इस इंस्टीट्यूट में 300 अभ्यर्थियों के बैठने की व्यवस्था है।

-पीएचक्यू ने परीक्षा आयोजित करवाने का ठेका एप्टेक कंपनी को दिया था। इसी कंपनी ने सरस्वती इंस्टीट्यूट को परीक्षा केंद्र के लिए चुना था।

यूं पकड़ में आए
- वायर लगाने वाले कर्मचारी आपस में बात कर रहे थे कि वायर इस तरह से लगाएं, जो किसी को न दिखे।

- इस पर परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी के एक कर्मचारी ने अपने अधिकारियों और आईजी हैडक्वार्टर को इसकी सूचना दी

आईजी ने मामला संदिग्ध मान तुरंत एसओजी को बताया

रातोंरात ही एसओजी आईजी एमएन दिनेश दलबल सहित मौके पर पहुंचे और पूछताछ के बाद रैकेट का भंडोफोड़ हो गया।

होटल से लैपटॉप-राउटर जब्त

- विकास ने इंफोटेक की बिल्डिंग पर वायरलेस एंटिना लगा रखा था।

- परीक्षा केंद्र में लगे कंप्यूटर सर्वर को वायरिंग से कनेक्ट कर इंस्टीट्यूट की छत पर लगे एंटीना से कनेक्ट करते थे।

- होटल की छत पर राउटर व अन्य उपकरण लगवाए। होटल में ही लैपटॉप व अन्य उपकरणों के साथ प्रश्न-पत्र हल करने वाले एक्सपर्ट
को बैठा दिया।

- अभ्यर्थी जैसे ही कम्यूटर स्क्रीन पर अपना लोगिन व पासवर्ड डालकर सिस्टम ऑन करता तो एक कर्मचारी पेन ड्राइव से सिस्टम पर सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर देता। होटल के कमरे में बैठे एएक्सपर्ट रिमोट एक्सेस से कंप्यूटर में घुसपैठ करते और किताबों से उत्तर पढ़कर पेपर हल कर देते।

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