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आग में कुछ भी ‘शेष’नहीं बचा, खुद पर आंच आई तब ‘सेस’ याद आया

विद्याधर नगर में आगजनी से 5 मौतों ने 5 साल से अटके सेस पर आंख मींचे निगम, यूडीएच और जेडीए की नींद तोड़ी

Dainik Bhaskar

Jan 18, 2018, 03:58 AM IST
मेयर के बयानों की आग भड़की मेयर के बयानों की आग भड़की

जयपुर. एक के बाद एक हादसे और आगजनी की दर्दनाक घटनाओं में कुछ ‘शेष’ नहीं बचा तो नगर निगम को पांच साल से फंसा ‘सेस’ याद आ गया। राजधानी और नगर निगम के पास कई गाड़ियां थीं, लेकिन वो देरी से पहुंची। जब पहुंची तो एक्सपर्ट फायर फाइटर नहीं थे। उनके पास जूते-मास्क-हेलमेट तक नहीं थे। दमकल के पाइप का नोजल तक नहीं चला। रोज गार्डन में लगी आग बुझाने के लिए एयरपोर्ट से ‘फायर पेंथर’ बुलानी पड़ी थी। निगम यहां नाकाम ही रहा। सबकुछ जलने के बाद मलबा समेट कर चला गया।


बिल्डिंगों को परमिशन देने के दौरान जो फायर सेस जेडीए वसूलता आ रहा है, उसे अब नगर निगम ने मांगा है। मेयर अशोक लाहोटी ने आग की घटनाओं को समय पर काबू नहीं कर पाने के लिए जेडीए को भी दोषी बताया है, जो निगम को फायर सेस का पैसा नहीं दे रहा। हालांकि हादसों से पहले मेयर को भी यह सेस याद नहीं आया। बुधवार को उन्होंने जेडीए को पत्र लिखने की बात कही।

स्वायत्त शासन विभाग के प्रमुख सचिव मनजीत सिंह ने भी मुख्य सचिव को लिखकर निगम को सेस का पैसा दिलाने की सिफारिश की है। भास्कर ने जब इस मुद्दे पर सभी से बारी-बारी बात की तो जेडीसी ने सेस के पेटे जमा 35 करोड़ में से 10 करोड़ रुपए निगम को जारी भी कर दिए।

आखिर जेडीए क्यों वसूल रहा है पैसे और क्यों नहीं दे रहा
2003 में सरकार ने सेस वसूलने के लिए कमेटी बनाई। इसमें जेडीए के साथ निगम के अधिकारी भी शामिल हैं। वो यह तय करेंगे कि फायर सेस के पैसे का क्या उपयोग हो। हालांकि कमेटी ने कभी कोई बैठक कर यह उपयोग तय नहीं किया। अब 2017 से निगम ने यह पैसा जेडीए से मांगा है। जेडीए का तर्क- सरकार नया आदेश जारी करे तो पैसा दे देंगे।

निगम-जेडीए की लड़ाई में हम फायर सेस देकर भी जल रहे हैं
फायर सेस का पैसा जेडीए को देने के बावजूद मकान मालिकों को फायर की एनओसी नगर निगम से लेनी होती है। निगम की इस एनओसी के बाद में जेडीए मकान की अनुमति देता है। नगर निगम कह रहा है कि पैसे की कमी के चलते वो फायर सिस्टम को अपग्रेड नहीं कर पा रहा। इसी लड़ाई में लोगों से वसूला जा रहा सेस मुसीबत में उन्हीं की मदद नहीं कर पा रहा।

सेस लेने के 3 तरीके...देने का कोई नहीं

1. 15 से अधिक 40 मीटर तक: (100 रु. प्रति वर्गमीटर)
2. 40 से 60 मीटर तक: (40 मीटर तक एफएआर क्षेत्रफल पर 100 प्रति व.मी. की दर, 60 मीटर तक ऊंचाई पर एफएआर क्षेत्रफल पर 150 रुपए प्रति वर्गमीटर)
3.. 60 से अधिक: 60 मीटर से अधिक ऊंचाई पर प्राप्त एफएआर क्षेत्रफल पर 200 रुपए प्रति वमी. )

जेडीए फायर सेस का पैसा लेकर हमें नहीं दे रहा, जिसके चलते हम सुविधाओं को अपग्रेड नहीं कर पा रहे। हमने जेडीए को कई बार कहा है, अब लिख भी रहे हैं।

- अशोक लाहोटी, मेयर

प्रमुख सचिव ने सीएस को िलखा तो मामला सुलगा प्रमुख सचिव ने सीएस को िलखा तो मामला सुलगा

 जेडीए फायर सेस का पैसा लेकर हमें नहीं दे रहा, जिसके चलते हम सुविधाओं को अपग्रेड नहीं कर पा रहे। हमने जेडीए को कई बार कहा है, अब लिख भी रहे हैं।   -अशोक लाहोटी, मेयर 

भास्कर ने िहसाब पूछा तो जेडीए सेे ~10 करोड़ जारी भास्कर ने िहसाब पूछा तो जेडीए सेे ~10 करोड़ जारी

 2003 में सरकार के ऑर्डर से सेस वसूल रहे हैं। अब वह आदेश खारिज होता है तो हम बाकी पैसा दे देंगे। बहरहाल हमने बुधवार को ही 10 करोड़ जारी कर िदए हैं। बाकी  सरकार के स्तर पर समाधान के बाद दे देंगे।  
-वैभव गालरिया, जेडीसी

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