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यहां है गायों की खाल की इंटरनेशनल मंडी, 15 से 20 हजार रुपए में होता है सौदा

अवैध कत्लखानों में इनकी खाल उतार कर उत्तरप्रदेश के कोसी में बेची जाती है।

Danik Bhaskar

Dec 08, 2017, 01:00 AM IST

अलवर. उत्तरप्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद वहां अवैध कत्लखानों पर भले ही रोक लगा दी गई हो, लेकिन राजस्थान के गोतस्कर गायों की खाल को उत्तरप्रदेश के कोसी शहर में बेचते हैं। पिछले एक दशक में कोसी शहर गायों की खाल की अंतरराष्ट्रीय मंडी बनकर उभरा है। दैनिक भास्कर ने इस पूरे मामले की पड़ताल की तो कई चौंकाने वाले बाते सामने आई। पड़ताल के दौरान पता चला कि गोतस्कर को एक गाय की खाल से 15 से 20 हजार का मुनाफा होता है। यही कारण है कि हरियाणा व राजस्थान के सीमावर्ती इलाके के कई गांव इस अपराध में लिप्त हो गए हैं।

- इस अपराध पर पुलिस को लगाम लगाने में पसीने आ रहे हैं। अब गोतस्कर मांस से ज्यादा गायों की खाल निकाल कर बेचने के धंधे में जुड़ गए हैं।

- गोतस्करों के निशाने पर राजस्थान के अलवर, दौसा, जयपुर, सीकर व झुंझुनूं जिले हैं। हरियाणा बॉर्डर से लगते इन जिलों से गोतस्कर रात के अंधेरे में सड़कों पर आवारा घूम रही गायों को उठाकर ले जाते हैं। इसमें कुछ गायों की मौत भी जाती है।

- हरियाणा बॉर्डर पर बने अवैध कत्लखानों में इन गायों की खाल उतारी जाती है। इस खाल को कोसी शहर में चमड़े का व्यापार करने वाले कसाइयों को बेचा जाता है। कसाई इस खाल को आगे बड़े व्यापारियों को बेचते हैं। गायों की खाल से बने सामान को विदेशों में भेजा जाता है।

नरम खाल होने से डिमांड ज्यादा

- गाय की खाल अन्य पशुओं से ज्यादा नरम होती है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में गाय के मांस से बने सामान की अधिक डिमांड है।

- उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों में गोमांस पर रोक है। ऐसे में मेवात के तस्कर इसका फायदा उठा रहे हैं। गोतस्करी में ये लोग पिकअप से लेकर बड़े ट्रकों का भी इस्तेमाल करते हैं।

गो तस्करी रोकने में नाकाम हैं पुलिस की विशेष चौकियां

- जिले में गो-तस्करी की बढ़ती वारदातों के बाद पुलिस ने 6 विशेष चौकियां स्थापित की परंतु इन चौकियों का तस्करों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

- पिछले दिनों हुई उमर की हत्या के मामले में भी इन चौकियों के कामकाज पर सवाल खड़े हो गए है। हालांकि पुलिस रिकार्ड के अनुसार पिछले तीन साल में इस साल अभी तक गो तस्करी की घटनाएं कम हुई है।

- वर्ष 2017 के अक्टूबर माह तक गो-तस्करी के 77 प्रकरण दर्ज हुए है। जबकि 82 गौतस्करों की गिरफ्तारी हुई है।

- पुलिस ने इनमें से 46 मामलों में चालान पेश कर दिए है तथा 20 प्रकरण पेडिंग में चल रहे है। जबकि पुलिस ने बीते वर्ष 2016 में 94 मामले दर्ज किए थे और 116 गोतस्कर गिरफ्तार किए थे।

- पुलिस के अनुसार जिले में पिछले तीन वर्ष में गो-तस्करी के 311 प्रकरण दर्ज किए गए थे और 424 गोतस्कर गिरफ्तार किए गए है। जबकि गौतस्करों के कब्जे से 2 हजार 115 गोवंश बरामद किए गए है।

आवारा गोवंश को 3 दिन सउठाकर ले जा रहे थे गोतस्कर
- जुबली बास चौराहा के पास 27 नवंबर की रात को गोतस्कर पिकअप में 4-5 गोवंश को लाद कर ले गए। कॉलोनी के एक व्यक्ति ने इसका विरोध किया तो उसे हथियार का भय दिखाकर फरार हो गए।

- 4 दिसंबर को फिर गोतस्कर जुबली बास चौराहे से गोवंश को लाद कर ले गए। इस दौरान आशीष शर्मा नाम के व्यक्ति ने गोतस्करों की कार से पीछा किया तो उन्होंने टाटा 407 गाड़ी से आशीष की कार को टक्कर मारी ओर पथराव किया था।

- करीब 15 दिन पहले जनता कॉलोनी से गोतस्कर पिकअप में गायों को लाद कर लेकर फरार हो गए थे। कॉलोनी की एक महिला को गोली मारने की धमकी दी थी।


पुलिस टीम का होगा सम्मान : विधायक
- विधायक बनवारीलाल सिंघल ने गोतस्करों से मुकाबला करने पुलिस टीम का सम्मान करने की घोषणा की है।

- उन्होंने जनता से भी आह्वान किया है वे अपने गोवंश को सड़कों पर खुला नहीं छोड़ें।

- सिंघल ने कहा कि एसपी राहुल प्रकाश और उनकी टीम के अधिकारियों व कर्मचारियों का सम्मान किया जाएगा।

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