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साहित्य की चौपाल पर उभरा दलित-आदिवासियों का दर्द

जेएलएफ की तर्ज पर आयोजित किए गए दलित महोत्सव में कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने आरक्षित वर्ग के हक और वर्तमान राजनीति पर नि

Dainik Bhaskar

Dec 17, 2017, 06:14 AM IST
Dalit Festival organized on the lines of JLF

जयपुर. जेएलएफ की तर्ज पर शनिवार को जयपुर में पहली बार दो दिवसीय बहुजन साहित्य महोत्सव का आगाज जनपथ यूथ हॉस्टल में हुआ। भारतीय संविधान के चित्र के सामने दीप प्रज्वलित कर इसकी अनूठे तरीके से शुरुआत हुई। इसमें कई नेता, अफसर, शिक्षाविद्, साहित्यकार सहित कई प्रतिष्ठित लोग शामिल हुए। सबने देशहित और रिजर्व केटेगरी के लोगों के डवलपमेंट पर अपने विचार व्यक्त किए।


इन आठ बिंदुओं पर चर्चा
समकालीन साहित्य में बहुजन चेतना, वर्तमान परिवेश में बहुजन की स्थिति, सफाई कर्मियों के हालात, घुमंतू-विमुक्त जातियों के मानव अधिकार, सामाजिक सरोकार, वंचित वर्ग और आदिवासी जैसे आठ बिंदुओं पर महोत्सव में चर्चा की जा रही है।


महिलाओं के हालात और विकास के मुद्दे उठाए
- पदम श्री कल्पना सरोज ने समाज के विकास और महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर बात कहीं। साथ ही दलित समाज सहित सर्व समाज की महिलाओं के आगे बढ़ने को लेकर मुद्दे उठाए।

इन्होंने भी उठाएं बहुजन साहित्य और दलित विकास के मुद्दे
- प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त के.सी. घूमरिया, लेखक संभाजी भगत, कार्यक्रम संयोजक राजकुमार मल्होत्रा सहित कई लोगों ने साहित्य और दलित विकास के मुद्दे कार्यक्रम में उठाएं।

जाने किसने क्या कहा

रिजर्व केटेगरी के लोगों पर साहित्य रचने से पहले उनकी व्यथा, फिर कथा और फिर गाथा को सामने लाना होगा। तब इसे साहित्य में शामिल करने की बात हो। बाबा भीमराम अंबेडकर ने जो समानता की कल्पना की थी, उसे पूरा करने के लिए सरकार को कई और कदम उठाने होंगे। बाबा साहब द्वारा लिखे संविधान का पूरा पालन होने से ही ये संभव होगा।

- संजय पासवान, पूर्व केंद्रीय मंत्री

- भाषण से ज्यादा साहित्यक बातें समाज में असर छोड़ती है। इसलिए ये बताना चाहता हूं कि उदारीकरण में आर्थिक नीतियां रिजर्व केटेगरी के खिलाफ साबित होगी। सरकारी नौकरियों के दरवाजे बंद होगे और प्राइवेट में जगह नहीं मिलेगी। भविष्य में क्या होगा। इस पर चर्चा और चिंतन की जरूरत है। चुनावों में भी प्रतिभावान व्यक्तियों को बड़ी पार्टियां टिकट नहीं देने वाली। ये पार्टियां सिर्फ चमचों को टिकट देगी ताकि कोई विरोध नहीं करें।

- अरविंद नेताम, पूर्व केंद्रीय मंत्री


जय मीन और जय भीम एक हो जाएं तो 80 प्रतिशत फैसले लेने वाले पदों पर रिजर्व केटेगरी के लोग या इनका दुख-दर्द समझने वाले लोग होंगे। ये ही लोग शेष बचे 20 प्रतिशत लोगों के हक और अधिकारों की रक्षा भी करेंगे।
सुबच्चन राम प्रधान, प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त इलाहाबाद

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