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10 हजार डॉक्टरों में मंत्री के बयान के खिलाफ चली आक्रोश की ‘चींटियां’

शुक्रवार को सामूहिक अवकाश पर रहे डॉक्टर, सरकार ने दिए वेतन काटने के निर्देश

Bhaskar News | Last Modified - Dec 09, 2017, 06:06 AM IST

10 हजार डॉक्टरों में मंत्री के बयान के खिलाफ चली आक्रोश की ‘चींटियां’

जयपुर.सेवारत डॉक्टरों ने शुक्रवार को एक दिन का सामूहिक अवकाश रखा। अस्पतालों के बाहर कतारें रही, लेकिन सरकार हिली तक नहीं। 10 हजार डॉक्टर्स पूरे दिन वाट्सएप पर मंत्री के बयान के खिलाफ एक-दूसरे को चींटियां बताते हुए वाट्सएप ग्रुप्स का नामकरण ही चींटी के नाम से कर रहे थे। किसी ने जालौरी खतरनाक चींटी लिखा तो किसी ने जयपुरी और बाड़मेरी चींटी ग्रुप बनाया। किसी ने अगस्त क्रांति चींटी ग्रुप नाम रखा तो किसी जिले के डॉक्टरों के ग्रुप ने अरसिदा चींटी ग्रुप, बड़े मकोड़े जिंटा ग्रुप और ऑल राजस्थान मोटे-मकोड़े ग्रुप बनाया। डॉक्टरों के अध्यक्ष अजय चौधरी चूरू में पहले तैनात थे, वहां के जिला संघ के ग्रुप का नाम तो काली मर्दन चींटी ग्रुप ही रख लिया गया।


दूसरी तरफ सरकार ने शाम तक रिकॉर्ड मंगवाए कि कितने डॉक्टर्स अनुपस्थित रहे। अनुपस्थिति डॉक्टर्स का वेतन काटने के आदेश दिए गए हैं। यही नहीं सूूची के आधार पर नोटिस भी भेजे गए। बता दें कि मेडिकल की चार साल की उपलब्धि बताते समय मंत्री कालीचरण सराफ ने डॉक्टरों के सरकार के सामने बहुत कमजोर बताया था। इससे डॉक्टरों में आक्रोश है। जयपुर के जयपुरिया में एक डॉक्टर को छोड़कर करीब 59 डॉक्टरों के उपस्थित रहने के दावे किए गए। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि डॉक्टर्स की ग्रामीण भत्ता बढ़ाने की मांग मान ली गई है। इसके अलावा 80 फीसदी मांगों पर क्रियान्विति हो गई है।

रेजीडेंट डाॅक्टर्स ने मांगा चिकित्सा मंत्री से इस्तीफा

आपत्तिजनक बयान और मांगे नहीं मानने के विरोध में रेजीडेंट डॉक्टर्स एकजुट हो गए हैं। उन्होंने शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज के सामने चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ के खिलाफ प्रदर्शन किया और मंत्री का इस्तीफा मांगा। उन्होंने डॉक्टर्स के लिए चींटी शब्द का उपयोग करके अपमानित किया है। इसके लिए मंत्री को इस्तीफा दे और सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी चाहिए। प्रदर्शन जयपुर एसोसिएशन ऑफ रेजीडेंट के अध्यक्ष रवि जाखड़ और महासचिव रमेश देवासी के नेतृत्व में दोपहर को किया गया।

लापरवाह डॉक्टर्स पर कार्यवाही क्यों नहीं होती : आयोग

मरीजों के प्रति लापरवाह एवं व्यावसायिक कदाचार वाले डॉक्टर्स के खिलाफ राजस्थान मेडिकल काउंसिल की ओर से कार्यवाही नहीं करने को पर राज्य मानवाधिकार आयोग ने एक तरह से सवाल उठाए हैं। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश टाटिया ने कहा है कि जनहित में मेडिकल रूल्स में पुनरावलोकन किया जाना उचित है। कानून द्वारा एक ही विषय पर कई सारे आयोग बनाए गए हैं। यह सभी आयोग कानूनी रूप से अनुशासनात्मक निकाय के स्थापित होने के बावजूद भी चिकित्सक के खिलाफ स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लेते हैं। मानवाधिकार आयोग प्रसंज्ञान लेता रहा है।

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Web Title: 10 hazaar doktron mein Mantri ke byaan ke khilaaf chali aakrosh ki chintiyaan
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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