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इनसाइड स्टोरी: नेताओं के साथ डॉक्टर नेता करते रहे वार्ताएं, हेल्थ मिनिस्टर से दूरी दिखी

कालीचरण कुछ देर वार्ता छोड़ दूसरे चैंबर में बैठे.... और समझौता फाइनल

Bhaskar News | Last Modified - Dec 28, 2017, 03:05 AM IST

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    जयपुर. झालाना स्थित परिवार कल्याण संस्थान में बुधवार को डॉक्टर्स हड़ताल तुड़वाने के लिए 8 घंटे की वार्ता के दौरान रोचक किस्से देखने को मिले। सरकार के चार मंत्री और डॉक्टर्स सुबह 11:30 बजे से रात होने तक अपनी-अपनी बातों पर अड़े रहे। कई बार टकराव और जिद-बहस से माहौल गरमाया। नवंबर में किए 12 डॉक्टर्स के तबादलों को निरस्त पर अड़ा-अड़ी हुई तो चिकित्सा विभाग के अफसर सीएम की नाराजगी का हवाला देकर किसी भी सूरत में तबादले निरस्त नहीं करने पर अड़ गए। दो मंत्रियों में तो इस विवाद को लेकर तीखी नोक-झोंक भी हुई। एक मंत्री ने तो यहां तक कह दिया कि प्रदेश में रोज लोग मर रहे हैं, आखिर सरकार 5-10 डॉक्टरों के तबादले वापस लेने को नाक का सवाल क्यों बना रही है?


    - इसके बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री कालीचरण सराफ अचानक रात पौने सात बजे मीटिंग छोड़ बाहर आ गए और किसी दूसरे चैंबर में जाकर बैठ गए।

    - पीछे करीब पौन घंटे में दूसरे मंत्रियों ने समझौते का ड्राफ्ट फाइनल कर दिया। उसके बाद फिर सराफ वार्ता में शामिल हुए।

    - इस दौरान बाकी दो मंत्री युनूस खान और अजय सिंह किलक बार बार बाहर निकल कर फोन पर किसी से सलाह लेते दिखे। आखिर में हड़ताल समाप्ति और समझौते की घोषणा हुई, मगर यह चिकित्सा मंत्री से नहीं करवाई गई। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी को साढ़े सात बजे अचानक बुलाया गया।

    - परनामी ने कैबिनेट मंत्रियों की जगह खुद माइक पकड़ा और हड़ताल समाप्ति का समझौता पत्र पढ़ दिया। इससे उन्होंने पूरी वार्ता को नया मोड़ दे दिया।

    - दोनों पक्षों में गुप्त तरीके से तालमेल बिठाने में डॉ. जगदीश मोदी और डॉ.दुर्गाशंकर सैनी दिनभर अंदर-बाहर होते रहे।

    डॉक्टर अजय चौधरी को दिए 3 विकल्प

    - डॉक्टरों को तबादला आदेश निरस्त करने की मांग पर लंबी बहस चली। कालीचरण सराफ और अफसर बोलते रहे कि ट्रांसफर भी सरकार नहीं कर सकती तो सरकार के पास पावर क्या रह जाएंगे।

    - अजय किलक और युनूस खान द्वारा मनाने और बार बार आग्रह पर वार्ता इस बात पर अटका दी गई कि निरस्त तो नहीं होंगे।
    - अजय चौधरी चूरू और जयपुर के अलावा किसी भी तीन स्थानों के विकल्प दे दें। सरकार उन्हीं में से एक जगह तबादला आदेश जारी कर देंगी।

    - विवाद को बढ़ाने की बजाय अजय चौधरी के कहे अनुसार सीकर सीएमएचओ बनाने की सहमति पर बात बन गई।

    महिला नेता का ट्रांसफर रद्द नहीं, 11 का क्या होगा
    - पिछले माह एक महिला डॉक्टर के स्वास्थ्य निदेशालय में आरएएस अफसर से विवाद के बाद डॉक्टरों में आक्रोश फैला था। उस डॉक्टर को महिला चिकित्सालय पहुंचाने वाली डॉक्टर का सरकार ने अजय चौधरी के साथ तबादला कर दिया था। उस महिला डॉक्टर को वार्ता में तो बुलाया गया, लेकिन मनचाही जगह तबादला करने की बात केवल अजय चौधरी के लिए ही मानी गई।

    - महिला के लिए आवाज नहीं उठी। उनका तबादला अजय से भी दूर 500 किलोमीटर पर किया गया है। इसी तरह बाकी 11 के तबादलों को लेकर भी स्पष्ट कोई आदेश नहीं हुए। इन्हें पूर्व की पोस्टिंग और जयपुर को छोड़ अन्यत्र एक स्थान का विकल्प देने पर बात बनी। फैसला बाकी है।

    मंत्री-अफसर लंच लेते रहे, डॉक्टर बोले- हमें मौतों का जिम्मेदार बनाया, कैसे खाएं खाना
    - दिन में करीब तीन बजे वार्ता के दौरान खाने के पैकेट मंगवाए गए। अफसर और मंत्री तो वार्ता स्थल पर ही लंच करने लगे, लेकिन डॉक्टर्स ने पैकेट खाने से इंकार कर दिया। हालांकि सरकार के कुछ विश्वास पात्र चिकित्सकों ने पैकेट खाए, लेकिन अजय चौधरी की टीम के चिकित्सकों ने खाना भी नहीं खाया और बोले... एक तरफ हमारे ऊपर लोगों की मौतों के इल्जाम लग रहे हैं और दूसरी तरफ 10 हजार डॉक्टर न्याय के लिए इंतजार में बैठे हैं। इसलिए वे मिठाई या खाना तभी खाएंगे, जब उनकी मांगों पर फैसला होगा।

    शाम होते-होते ब्यूरोक्रेसी को झुकना पड़ा
    - पिछले दो माह से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ब्यूरोक्रेसी और डॉक्टरों के बीच टकराव चरम पर था। वार्ता में आईएएस और आरएएस आदि अधिकारी चाहते थे कि डॉक्टरों को झुकाया जाए। डाॅक्टरों के तबादले निरस्त के संबंध में फैसला नहीं हुआ।

    - मंत्री को कहना पड़ा- अध्यक्ष डॉ. अजय चौधरी का कर दिया, बाकी 11 का भी करेंगे। डॉक्टरों को 2014 से 2018 के बीच डीएसीपी के लाभ नहीं देने ब्यूरोक्रेट अड़े थे।

    - वित्त विभाग की पहले ही रिपोर्ट आ चुकी है कि यह लाभ नहीं दे सकते। मंत्रियों के दबाव में झुकना पड़ा और अप्रैल 2014 से अप्रैल 2018 के बीच पदोन्नत होने वाले सभी डॉक्टरों को भी डीएसीपी एरियर का लाभ देने के लिए सबकमेटी बनाई। सभी मांगों पर अफसरोंने नरम रुख अपनाया।

    सीकर से जुटे कई युवा, फैसला आते ही नेता कंधों पर
    - डॉक्टर्स हड़ताल के बाद 12वीं बार सरकार के साथ वार्ता के दौरान डॉक्टरों के पक्ष में सीकर से करीब 100 युवा डॉक्टर और अन्य युवा पूरे दिन परिवार कल्याण संस्थान में डटे रहे। वे तो जैसे अपनी विजय का उत्सव मनाने को उतावले ही थे। कोई माला हाथ में लिए था को कोई जैसे अजय चौधरी का बॉडीगार्ड है या उनका रिश्तेदार।

    - इसका खुलासा तब हुआ जब डॉक्टरों की मांगें मान ली गई और हड़ताल समाप्ति की घोषणा हुई। रात करीब सवा आठ बजे सीकर-चूरू के युवाओं ने अजय चौधरी को कंधों पर उठा लिया और एक घंटे तक नारे लगते रहे। उनका जैसे एमएलए-एमपी बनने पर विजयी जुलूस निकाला जाता है, कंधे पर उठाकर और मालाओं से वैसा जुलूस निकाला गया।

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