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डॉक्टरों की रिटायरमेंट उम्र 65 करने की फाइल दो बार लौटी, अब फिर से भेजेंगे

केन्द्र डेढ़ साल पहले ही बढ़ा चुका डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति की आयु

संदीप शर्मा | Last Modified - Jan 18, 2018, 04:14 AM IST

  • डॉक्टरों की रिटायरमेंट उम्र 65 करने की फाइल दो बार लौटी, अब फिर से भेजेंगे
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    जयपुर. केन्द्र सरकार भले ही डेढ़ साल पहले डॉक्टर्स की सेवानिवृत्ति की आयु 62 से 65 कर चुकी है लेकिन प्रदेश इसकी फाइल चिकित्सा विभाग और वित्त विभाग के बीच चक्कर काट रही है। डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का प्रस्ताव चिकित्सा विभाग ने छह महीने में दो बार वित्त विभाग को भेजा था लेकिन दोनों ही बार वित्त विभाग ने फाइल लौटा दी। अब तीसरी बार वित्त विभाग फिर इस सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने की फाइल वित्त विभाग को भेजने की तैयारी कर रहा है। गौरतलब है कि पहले भी सरकार इस कमी को दूर करने के लिए डॉक्टर्स की सेवानिवृत्ति आयु सीमा बढ़ाकर 60 से 62 वर्ष कर चुकी है।


    मामले के अनुसार प्रदेश में सात नए मेडिकल कॉलेज खोल दिए गए लेकिन इनमें फेकल्टी पूरी नहीं हो पा रही है। ऐसे में एमसीआई की ओर से किए गए निरीक्षण में उन्हें मान्यता भी नहीं मिल पा रही है। इस कमी को दूर करने के लिए सरकार सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाकर 65 वर्ष करने की तैयारी कर रही है।

    केन्द्र सरकार ने मई 2016 में ही डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए केन्द्रीय सेवाओं के डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु 65 साल कर दी थी। साथ ही राज्यों को भी ऐसा करने को कहा था। इस तर्ज पर प्रदेश में करीब छह महीने पहले भी सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने की फाइल चली लेकिन वित्त विभाग ने इसे लौटा दिया।

    करीब तीन महीने पहले एक बार फिर यह फाइल चली लेकिन फिर से वित्त विभाग का ऑब्जेक्शन आ गया। अब तीसरी बार चिकित्सा विभाग मामले को लेकर तैयारी में जुटा है और उनकी ओर से वित्त विभाग को फाइल भेजने की तैयारी कर ली गई है। हालांकि सेवानिवृत्ति आयु बढ़ने से होने वाले फायदे और नुकसान को लेकर डॉक्टरों में दो पक्ष हैं।

    सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने पर डॉक्टरों में दो राय

    प्रदेश में डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाकर 65 वर्ष करने के मसले पर डॉक्टरों के बीच ही दो राय हैं। एक वर्ग का मानना है कि इससे वर्तमान में काम कर रहे डाॅक्टरों के लिए आगे बढ़ने में समस्या होगी। वहीं दूसरे वर्ग का मानना है कि मेडिकल सुविधाएं जुटाने में यह कदम बड़ा मददगार बनेगा।

    उम्र बढ़ने से ये नुकसान
    - यदि सरकार आयु सीमा बढ़ाती है तो पदोन्नति का क्रम रुक जाएगा। जो एसोसिएट प्रोफेसर हैं या सहायक प्रोफेसर हैं, वे उच्च पदों पर नहीं जा पाएंगे।
    - राजस्थान में ही हर साल 1800 से अधिक सरकारी व निजी एमबीबीएस स्टूडेंट और 1200 पीजी स्टूडेंट पासआउट होते हैं। ऐसे में उन्हें भी नौकरी की जरूरत होती है। यदि आयु सीमा 65 साल होती है तो भर्ती निकालना मुश्किल होगा। और यदि भर्ती निकलती हैं तो उन्हें भविष्य में ग्रोथ नहीं हो पाएगी। एेसे में संभव है कि वे सरकारी की जगह निजी क्षेत्र का चयन करें।
    - हर साल नई रिसर्च और नए इलाज आ रहे हैं। स्टूडेंट उनके बारे में पढ़ाई करते हैं और नई बीमारियों के साथ नए इलाज के लिए अपडेट होते हैं। ऐसे में उस प्रतिभा से भी मरीज वंचित रहेंगे।
    - 65 वर्ष करने से तीन साल का फायदा सरकार को हो सकता है लेकिन यदि इसकी जगह नई भर्ती होती हैं तो एक डॉक्टर कम से कम 30 साल उस अस्पताल में काम कर सकेगा।

    ये होगा फायदा
    - आयु सीमा बढ़ाने से सरकार के पास अनुभवी डॉक्टर्स ज्यादा उपलब्ध होंगे। क्लीनिकली उनके पास काफी अधिक अनुभव होगा, ऐसे में मरीजों को देखने के साथ कॉलेज और अस्पतालों को बेहतर रूप से संचालित कर सकेंगे।
    - फिलहाल जो कमी है, उसकी तुरंत पूर्ति हो सकेगी। इससे नए मेडिकल कॉलेजों को स्टूडेंट मिल सकेंगे और वे संचालित हो सकेंगे।
    - सरकार पर भी कम आर्थिक भार पड़ेगा।

    छह साल में केवल एक ही भर्ती

    - प्रदेश में एसोसिएट प्रोफेसर की कमी को दूर करने के लिए सरकार छह साल में केवल एक भर्ती निकाल सकी है। उसकी वजह भी यही है कि सेवानिवृत्ति आयु सीमा 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई थी।

    डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा बढ़ाने के लिए फाइल आई थी और हमनें वित्त विभाग को भेजी थी, लेकिन वापस आ गई। हमनें फाइल तैयार कर ली है और जल्दी ही इसे वित्त विभाग को भेजा जाएगा। यह एक प्रोसेस है और इससे पूरा कर रहे हैं।
    -आनंद कुमार, चिकित्सा शिक्षा सचिव
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