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जयपुर में पकड़ी थीं 53 लाख की नकली मेडिसिन, इनमें रक्षा विभाग की दवाएं भी थी

संदीप शर्मा | Last Modified - Feb 12, 2018, 05:52 AM IST

सिप्ला कंपनी ने इसकी लिखित जानकारी ड्रग विभाग को दी है। इसकी प्रतिलिपि भास्कर के पास है।
जयपुर में पकड़ी थीं 53 लाख की नकली मेडिसिन, इनमें रक्षा विभाग की दवाएं भी थी

जयपुर. सरकारी अस्पतालों से दवाएं बाजार में जाने के कई मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि डिफेंस (रक्षा विभाग) को जाने वाली दवाएं बाजार में बिकने आ गईं। ये दवाएं नकली दवाएं सप्लाई करने वाले सरगना हरीश चंचलानी के मालवीय नगर स्थित घर से बरामद की गई थीं। खास बात यह है कि डिफेंस की दवाओं पर नॉट फॉर सेल लिखा होता है, लेकिन सप्लायर ने यह मार्क हटाकर उनकी जगह प्राइज टेग लगा दिया।


बड़ा सवाल यह कि जो दवाएं डिफेंस को भेजी गई थी, वह बाजार में बिकने कैसे आ गई? अब जयपुर पुलिस उसे रिमांड पर लेकर डिफेंस की दवाएं कहां से खरीदी और कहां माल भेजा जाने वाला था, इसका पता लगा सकती है। ड्रग डिपार्टमेंट भी उसके खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है।

- दरअसल, 10 नवंबर, 2017 को पुलिस ने जब हरीश चंचलानी के घर छापा मारा तो 53 लाख की दवाएं बरामद हुईं। इन दवाइयों में सिप्ला कंपनी का यूरीमेक्स भी मिला।

- ड्रग विभाग के अधिकारी जब्त दवा के बैच नंबर sa6a63968 की जानकारी जुटाने के लिए सिक्किम गए तो अधिकारियों ने बताया कि इस बैच की दवा डिफेंस को भेजी जा चुकी है। सिप्ला कंपनी ने इसकी लिखित जानकारी ड्रग विभाग को दी है। इसकी प्रतिलिपि भास्कर के पास है।


ये सवाल बाकी
- हरीश माल कहां से मंगा रहा था।
- सप्लाई किन-किन दुकानदारों को की जाने वाली थी।
- कब से कहां-कहां सप्लाई हो रही थी।

इनका कहना है
हरीश चंचलानी के घर से दवाएं पकड़ी थी। इनमें से एक बैच डिफेंस को गया था। वह उस बैच का माल कहां से और कैसे ले आया, इसका पता नहीं लग पाया है। अजमेर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है। उम्मीद है कि जयपुर पुलिस भी कार्रवाई कर उससे सच उगलवा सकेगी।
- डॉ. अजय फाटक, ड्रग कंट्रोलर


सुप्रीम कोर्ट ने कहा- तुरंत सरेंडर करे हरीश
- नकली दवाओं के सरगना हरीश चंचलानी पर कई मामले दर्ज हैं। ड्रग डिपार्टमेंट ने अजमेर के क्लॉक टावर में इंजेक्शन फोर्टविन की अवैध खरीद-फरोख्त पकड़ी थी। इस खरीद और बेचान के बिल नहीं थे और इसमें हरीश चंचलानी गिरफ्तार किया गया। लेकिन जमानत पर छूट गया था।

- इसके बाद ड्रग विभाग ने हाईकोर्ट में रिट लगाई। उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई। इसके बाद हरीश ने अग्रिम जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में रिट लगाई लेकिन पांच सुनवाई के बाद हरीश ने रिट विड्राल कर ली।

- सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आर के अग्रवाल और अभय मनोहर सप्रे ने पांच फरवरी 2018 को आदेश दिया कि हरीश तुरंत प्रभाव से सरेंडर करे। इसके बाद छह फरवरी को उसे अजमेर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पिछले साल 10 नवंबर को घर पर छापे के बाद से ही हरीश जयपुर पुलिस की गिरफ्त से दूर था।

- जयपुर पुलिस का कहना था कि वे उसे ढूंढ़ रहे हैं। इस बीच, हरीश सुप्रीम कोर्ट तक में अग्रिम जमानत याचिका दायर कर आया। गनीमत रही कि याचिका खारिज हो गई, अन्यथा वह पकड़ में ही नहीं आ पाता।

हरीश पर 3 जिलों में 4 केस
- अशोक नगर, जयपुर में (जिफी 200 एमजी) नकली दवा का केस।
- नकली दवाएं बेचने का अजमेर में केस चल रहा है।
- बीकानेर में नींद की नकली दवाएं बेचने का केस।
- अजमेर में पेंटोसिड डीएसआर पकड़ा। फर्जी बिल दे दिए, केस दर्ज। हरीश का लाइसेंस। उसके परिवार में किसी को भी लाइसेंस नहीं देने के निर्देश भी जारी हुए।

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Web Title: jypur mein pkड़i thin 53 laakh ki nkli medisin, inmein rksaa vibhaaga ki dvaaen bhi thi
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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