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लड़कियां चिल्ला रही थीं- हमें बचा लो, कोई कुछ न कर पाया और चीखें खामोश हो गईं

पड़ोसी ने छत के दरवाजे को तोड़कर अंदर आने की कोशिश की, लेकिन लाेहे का दरवाजा नहीं टूटा।

Bhaskar News | Last Modified - Jan 14, 2018, 06:52 AM IST

जयपुर. अलसुबह जब जिंदगी जाग रही होती है। रात के सपनों को पूरा करने के लिए इंसान भरपूर जिंदादिली के साथ जागता है। यह सुबह ही है जो जीने की नई ताजगी देती है, लेकिन शहर के एक घर में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। शॉर्ट सर्किट से लगी आग के आतंक ने इस घर में चार जवान और एक बुजुर्ग की जिंदगी को जला डाला। एक पड़ोसी के मुताबिक उसने छत के दरवाजे को तोड़ अंदर आने की कोशिश की, लेकिन लाेहे का दरवाजा नहीं टूटा। कुछ देर बाद लड़कियों और दादा की चीखें बंद हो गईं।

दोनों जोर-जोर से आवाज लगा रही थीं- कोई हमें बचा लो

- शनिवार सुबह 4 बजे ये दर्दनाक हादसा विद्याधर नगर सेक्टर 9 में रहने वाले संजीव गर्ग के मकान में हुआ। हादसे में उनके पिता महेन्द्र गर्ग, बेटी अपूर्वा(23), अर्पिता(21), बेटा अनिमेश(17) और साले के बेटा शौर्य(20) की मौत हो गई। शौर्य मकर संक्रांति मनाने के लिए दो दिन पहले ही जयपुर आया था। संजीव गर्ग पत्नी के साथ आगरा गए थे।

- हनुमान प्रसाद और उनके बेटे लोकेश ने बताया "सुबह करीब 4 बजे चीखने-चिल्लाने की आवाजें आईं। बाहर निकले तो पीछे वाले घर से संजीव जी की दोनों बेटियां जोर-जोर से आवाज लगा रही थी- 'कोई हमें बचा लो...आग लग गई।' हम उनके घर के सामने पहुंचे तो आग की जबरदस्त लपटें और धुआं निकल रहा था। केवल आवाजें सुनाई दे रही थी, दिखाई कोई नहीं दे रहा था। मैं (लोकेश) दौड़कर मकान की छत पर गया। वहां से संजीव के मकान की छत पर जाकर लोहे का गेट तोड़ने की कोशिश की, लेकिन नहीं तोड़ पाया। इसके बाद कॉलोनी के लोगों को जगाया। इस बीच आग की लपटें लोकेश के मकान तक आ गई और उसके मकान के पीछे के दरवाजे और खिड़कियां जल गईं। तेज धुएं, लपटों और मकान के चारों तरफ से बंद होने के कारण कोई मदद के लिए आगे नहीं बढ़ पाया।

बे-बस आंखों देखी ; कोई कुछ न कर पाया

पड़ोसी अभिषेक ने बताया "अचानक तेज आवाज में सायरन बजने लगा। मैं करीब चार बजे घर के बाहर आया तो संजीव अंकल के घर से धुआं निकल रहा था। मैंने अनिमेश, अपूर्वा और अर्पिता को फोन किया। किसी ने फोन रिसीव नहीं किया। मैने संजीव अंकल को फोन किया तो उन्होंने कहा- 'मैं आगरा में हूं। बच्चों को बचाओ।' इसके बाद हम घर में घुसे तो गेट लॉक थे। हमने खिड़कियों के शीशे तोड़े। आग इतनी तेज थी कि लपटें बाहर आने लगीं। अंदर से चिल्लाने की आवाजें आ रही थीं।"

अागरा से फोन आया : बच्चे अंदर आग में फंसे हैं...उन्हें बचा लो

अंबाबाड़ी में रहने वाले संजीव के दोस्त कमलेश की बेटी कृतिका ने बताया "सुबह संजीव अंकल का आगरा से मेरे पापा कमलेश के पास फोन आया था। वे बोले कि हमारे घर में आग लग गई है, अाप जल्दी जाओ और बच्चों को बचाओ। इसके बाद पापा के साथ हम सब वहां पहुंचे तो देखा कि आग पूरे घर में लग चुकी थी। हमने अंदर से आवाजें भी सुनी, लेकिन दरवाजे नहीं खुले।"

इतनी भयानक आग कि कोई मकान में घुसने की हिम्मत नहीं कर पाया

संजीव के पड़ोसी विनोद ने बताया "चीखने की आवाजें सुनकर हमने छत पर जाकर देखा तो धुआं निकल रहा था। हम घबरा गए। आग इतनी विकराल थी कि कोई मकान में घुसने की हिम्मत नहीं कर पाया। बाद में एक पुलिसकर्मी छत पर पहुंचा और बेहोश लोगों को निकाला। उन्हें एंबुलेंस से हॉस्पिटल भिजवाया गया।"

मैंने अनिमेश को उतार तो लिया, अफसोस! बचा नहीं पाया

देशराज ने बताया "मैं दीवार पर चढ़ने के बाद रेलिंग को पकड़कर फर्स्ट फ्लोर पर गया। गेट खोला तो धुंआ ही धुंआ था। तभी अनिमेश दिखा। सांसें चल रही थी। मैने रस्सी से उसे किसी तरह उतारा। अस्पताल भेजा...बचा नहीं पाया।"

शार्ट सर्किट से लगी आग से सिलेंडर भी फट गया

आग सुबह करीब साढ़े तीन बजे ग्राउंड फ्लोर पर वायर या हीटर में शार्ट सर्किट से लगी। आग तेजी से भड़की। आग लगने के 20 मिनट बाद घर में पीछे की ओर जोर के धमाके के साथ सिलेंडर भी फट गया।

दोनों लड़कों तक आग पहुंची भी नहीं, दम घुटने से ही मौत

- चश्मदीदों के मुताबिक, करीब पांच से सात मिनट तक दादा और पोतियां मदद के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन आग इतनी भयानक थी कि लोग समय रहते मदद नहीं कर सके। आग खत्म होने के बाद लोगों ने फर्स्ट फ्लोर के कमरे से अनिमेश और शाैर्य को रस्सी से नीचे उतारा। अस्पताल पहुंचाया, जहां उनकी मौत हो गई। हालांकि, चेतक में तैनात 2015 बैच के ट्रेनी काॅन्स्टेबल देशराज बिजारणियां ने अनिमेश और शौर्य को बचाने की कोशिश की।

- पड़ोसियों का कहना है कि वक्त रहते अगर रेस्क्यू किया जाता तो अनिमेश और शौर्य की जान बचाई जा सकती थी। दोनों तक तो आग पहुंची भी नहीं, उनकी तो दम घुटने से ही मौत हो गई।

आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, आखिरी 40 मिनट के 4 सीन, वो सो रहे थे, हमेशा के लिए सो गए...

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