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तमाशा कर रहे हैं चारों जज, क्रिमिनल कंटेंप्ट की कार्रवाई होनी चाहिए: पूर्व जस्टिस

राजस्थान हाईकोर्ट के जज ने 1997 में केस किसी अन्य बेंच को ट्रांसफर करने पर तत्कालीन सीजे को दिया था नोटिस

Danik Bhaskar | Jan 17, 2018, 03:24 AM IST
20 साल पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने तय कर दिया था कि सीजे मास्टर ऑफ रोस्टर है 20 साल पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने तय कर दिया था कि सीजे मास्टर ऑफ रोस्टर है

जयपुर. सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा चार सीनियर जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पूरे देश में भले ही बवाल उठ खड़ा हुआ हो, मगर न्यायपालिका का इतिहास बताता है कि इस विवाद की जड़ से जुड़ा मामला राजस्थान में 20 साल पहले ही सुर्खियों में आया और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से ही शांत हुआ था।

- जस्टिस जे. चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन बी. लोकूर व कुरियन जोसफ ने मीडिया के सामने सुप्रीम कोर्ट के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा था कि मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा अपनी मनमर्जी से जजों का रोस्टर तय कर रहे हैं।

- 1997 में राजस्थान हाईकोर्ट में कुछ ऐसा ही विवाद खड़ा हुआ था, जब हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने एक जज से सुनवाई प्रक्रिया के बीच ही केस लेकर दूसरे जज की बेंच को दे दिया था।

- इस पर जज ने मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ ही आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी कर दिया था।

- मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा तो सर्वोच्च न्यायालय की तीन जजों की बेंच ने फैसला दिया था कि मुख्य न्यायाधीश ही मास्टर ऑफ रोस्टर है। उन्हें रोस्टर फिक्स करने और बेंच बनाने का पूरा अधिकार है।

1997 के केस में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पूरी जानकारी दे रहे हैं पूर्व जस्टिस

- जस्टिस शिवकुमार ने बताया- सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था...इस फैसले का पालन करना सभी जजों का कर्तव्य है।

- हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस शिव कुमार शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट चार जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस को राजनीति से प्रेरित तमाशा बताया।

- जस्टिस शर्मा ने इसे आपराधिक अवमानना माना है। वे कहते हैं- चारों जजों पर आपराधिक अवमानना की कार्रवाई होनी चाहिए।

1997 में यूं हुआ था बेंच ट्रांसफर का विवाद...
- राजस्थान हाईकोर्ट के जज बीजे सेठना 1997 में जोधपुर मुख्यपीठ में किसी आपराधिक केस में आंशिक रूप से सुनवाई कर चुके थे।

- इस दौरान सीजे मुकुल गोपाल मुखर्जी ने यह केस को किसी अन्य बेंच में सुनवाई के लिए ट्रांसफर कर दिया। सीजे की इस कार्रवाई को जज सेठना ने आपराधिक अवमानना मानते हुए सितंबर 1997 में उन्हें नोटिस जारी किया।

- जज सेठना ने हाईकोर्ट प्रशासन को निर्देश दिया कि वे सीजे के खिलाफ राज्य सरकार बनाम सीजे मुकुल गोपाल मुखर्जी के नाम से एक अलग आपराधिक मामला दर्ज करें।

- जज सेठना की इस कार्रवाई को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सिंगल जज की इस कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था।

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