जयपुर

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एडीजी पोन्नूचामी सहित सभी 14 पुलिसकर्मी बरी, दारिया एनकाउंटर केस में सेशन कोर्ट का फैसला

एसओजी से 23 अक्टूबर, 2006 को मुठभेड़ में दारासिंह मारा गया था।

Danik Bhaskar

Mar 14, 2018, 02:08 AM IST

जयपुर. राजस्थान की राजनीति और पुलिस में खलबली मचाने वाले बहुचर्चित दारा सिंह उर्फ दारिया फर्जी एनकाउंटर केस में सेशन कोर्ट ने मंगलवार को एडीजी पोन्नूचामी सहित सभी 14 पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया। इस मामले में सीबीआई ने कुल 17 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया था। इनमें से मंत्री राजेंद्र राठौड़ को सेशन कोर्ट और तत्कालीन एडीजी एके जैन को हाईकोर्ट आरोप मुक्त कर चुका है। लेकिन राठौड़ के खिलाफ हाईकोर्ट ने ट्रायल चलाने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ राठौड़ ने स्थगन आदेश ले रखा है। एक अन्य आरोपी विजय चौधरी की हत्या हो चुकी है। सेशन कोर्ट ने इस मामले में 23 फरवरी को फैसला सुरक्षित रखा था।

- मंगलवार दोपहर 3 बजे जैसे ही जज रमेश जोशी ने फैसला सुनाया, वहां मौजूद आरोपी एडीजे ए.पोन्नुचामी, अरशद अली, नरेश शर्मा, सुभाष गोदारा, राजेश चौधरी, सत्यनारायण गोदारा, जुल्फिकार, अरविंद भारद्वाज, सुरेन्द्र सिंह, निसार खान, सरदार सिंह, बद्रीप्रसाद, जगराम और मुंशीलाल ने हाथ जोड़कर ऊपर उठा लिए।

- फैसले के ठीक बाद एडीजी ए.पोन्नुचामी को डीजीपी ओ.पी. गलहोत्रा के कार्यालय से फोन आया। इस मौके पर पुलिस विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी अपने साथियों का हौसला बढ़ने के लिए फैसले से पहले ही कोर्ट आ गए। पूरे प्रकरण में अभियोजन पक्ष ने 194 गवाह, 705 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। वहीं बचाव पक्ष ने 463 दस्तावेजी साक्ष्य पेश करते हुए अपनी तरफ से कोई भी गवाह पेश नहीं किया।

51 दिन जेल में रहे थे राठौड़, अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है अपील
- सीबीआई ने भाजपा नेता राजेन्द्र राठौड़ के कहने पर दारासिंह को फर्जी मुठभेड़ में मरवाने का आरोप लगाया था। सीबीआई ने राजेन्द्र राठौड़ को भी अप्रैल 2012 में गिरफ्तार कर लिया। लेकिन करीब 51 दिन जेल में रहने के बाद सेशन अदालत ने उन्हें आरोप मुक्त कर दिया। एडीजी एके जैन को भी हाईकोर्ट ने फरवरी 2015 में आरोप मुक्त किया। फरारी के दौरान आरोपी विजय चौधरी की हत्या हो गई थी।

- राजेन्द्र राठौड़ को आरोप मुक्त करने के बाद सीबीआई और सुशीला देवी ने हाईकोर्ट में इस फैसले के खिलाफ याचिका लगाई। इस याचिका के बाद हाईकोर्ट ने आरोप मुक्त करने के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही सेशन कोर्ट को उनके खिलाफ ट्रायल चलाने और राजेन्द्र राठौड़ को सरेंडर करने के निर्देश दिए थे।

- सरेंडर करने के बाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राजेन्द्र राठौड़ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने 2012 से ही हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा रखी है। यह अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित चल रही है।

12 साल पुराना मामला, पत्नी ने फर्जी बताई थी मुठभेड़
गौरतलब है कि एसओजी से 23 अक्टूबर, 2006 को मुठभेड़ में दारासिंह मारा गया था। उसकी पत्नी सुशीला देवी ने इसे फर्जी बताते हुए हत्या करार दिया था। सुशीला की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। सीबीआई ने 23 अप्रैल 2010 को मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

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