--Advertisement--

सरकार ने 3 साल पहले केस वापस ले लिया, बेखबर पुलिस तोगड़िया को अरेस्ट करने गुजरात पहुंच गई

3 अप्रैल 2002 को तोगड़िया गंगापुर पहुंचे थे और कर्फ्यू व निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर सभा की थी।

Danik Bhaskar | Jan 17, 2018, 01:52 AM IST
मीडिया के सामने रो पड़े तोगडि़य मीडिया के सामने रो पड़े तोगडि़य

गंगापुर सिटी/जयपुर. विश्व हिंदू परिषद् के नेता प्रवीण तोगड़िया को जिस मामले में गिरफ्तार करने के लिए राजस्थान पुलिस सोमवार को अहमदाबाद पहुंची थी, उसे राज्य सरकार तीन साल पहले ही वापस ले चुकी। लेकिन पुलिस के लेवल पर इसे विड्रो ही नहीं कराया गया। अब 2015 में जारी हुए केस विड्रो के उस पत्र की तलाश की जा रही है कि वह कहां अटका हुआ है। 20 जनवरी को अगली पेशी से पहले यह पत्र कोर्ट में पहुंच सकता है। अगर आदेश मिल जाते हैं तो ठीक, वरना सरकार से रिवाइज आदेश जारी कराए जा सकते हैं।

- दरअसल, 3 अप्रैल 2002 को तोगड़िया गंगापुर पहुंचे थे और कर्फ्यू व निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर सभा की थी। इस मामले में पुलिस ने तोगड़िया सहित 17 लोगों पर केस दर्ज किया था।

- गृह विभाग के अधिकारियों के अनुसार इन 17 आरोपियों में शामिल रमेश मीणा ने खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताते हुए केस वापस लेने सिफारिश राज्य सरकार से की थी।

- गंगापुर सिटी थाने में आईपीसी की धारा 188 में दर्ज प्रकरण में पुलिस ने एफआर लगा दी थी, लेकिन गंगापुर सिटी के तत्कालीन एसडीएम और प्रोबेशनरी आईएएस अधिकारी विकास भाले ने कोर्ट में परिवाद पेश कर दिया। कोर्ट ने इस पर प्रसंज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू कर दी। प्रदेश में भाजपा की सरकार आते ही वर्ष 2014 में केस वापस लेने की सिफारिश गृह विभाग को मिली।

- सरकार ने 13 अक्टूबर, 2014 को यह प्रकरण कोर्ट से विड्रो करने का निर्णय किया था। गृह विभाग ने 9 जून, 2015 को इसके लिए एसपी को पत्र जारी कर दिया, लेकिन केस विड्रो नहीं कराया गया।

तीन की मौत हो चुकी

- गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस मसले में अब कार्रवाई की जा रही है और पता लगाया जा रहा है कि आखिर यह पत्र अटक कहां।

- बता दें कि इस मामले में तोगड़िया के अलावा सभी आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, जबकि तीन की मौत हो चुकी है।

- फिलहाल यह मामला मुंसिफ मजिस्ट्रेट संख्या दो की अदालत में चल रहा है। इस मामले में आगामी पेशी 20 जनवरी को है।

- तोगड़िया को अदालत में हाजिर करने के लिए पहली बार 11 दिसंबर 2017, इसके बाद 16 दिसंबर तथा तीसरी बार पांच जनवरी 2018 को वारंट जारी हुए।


एसपी बोले-मेरे कार्यकाल से पहले की है, केस विड्रो की चिट्‌ठी
- सवाई माधोपुर पुलिस अधीक्षक मामन सिंह ने बताया कि गंगापुर सिटी थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 204/02 में पुलिस ने वर्ष फरवरी, 2003 में ही एफआर लगा दी थी।

- तत्कालीन एसडीएम के इस्तगासे पर कोर्ट ने इसमें प्रसंज्ञान लिया था। केस विड्रो करने की सिफारिश और इसकी चिट्ठी मेरे कार्यकाल से पहले ही है। इसलिए इसमें गृह विभाग से भी मार्गदर्शन लेंगे।

आदेश जल्द अदालत में पेश करेंगे

जानकारी मिली है कि सरकार ने 2015 में इस केस को वापस लेने के आदेश जारी किए थे लेकिन किन्हीं कारणों से ये आदेश अदालत तक नहीं पहुंच सके, जल्द ही आदेश अदालत में पेश किए जाएंगे।
- योगेंद्र फौजदार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, गंगापुर सिटी

रो पड़े तोगडि़या, बोले- राजस्थान पुलिस मेरा एनकाउंटर कर सकती थी

- रहस्यमय तरीके से लापता हुए विहिप नेता तोगड़िया (62) ने मंगलवार को प्रेस काॅन्फ्रेंस में भावुक होकर कहा, ‘मुझे पुराने केस निकालकर फंसाया जा रहा है। सोमवार को मकर संक्रांति के दिन राजस्थान पुलिस का काफिला आया था। मेरा एनकाउंटर हो सकता था। मैं डर नहीं रहा हूं, लेकिन डराने की कोशिश की जा रही है।’

- उधर, राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा- पुलिस रूटीन प्रक्रिया के तहत गुजरात गई थी। सरकार का इससे कोई वास्ता नहीं है।

- बता दें कि तोगड़िया सोमवार को अहमदाबाद में रहस्यमय तरीके से लापता हो गए थे। करीब 11 घंटे बाद अनजान शख्स ने उन्हें सड़क पर बेहोशी की हालत में पड़े देखकर हॉस्पिटल पहुंचाया था।


- मंगलवार को तोगड़िया ने कहा, “कुछ समय से मेरी आवाज दबाने का हर संभव प्रयास होता रहा। मैं हिंदू एकता के लिए प्रयास करता रहा। कई सालों से जो हिंदुओं की आवाज थी, राम मंदिर बनाओ, गौ हत्या बंद करो, कश्मीरी हिंदुओं को बचाओ, इन बातों को मैं उठाता रहा। मैंने 10 हजार डॉक्टरों को तैयार किया। इनसे मरीजों का इलाज मुफ्त करने को कहा। आईबी ने उन्हें डराने का प्रयास किया। मैंने केंद्र सरकार को पत्र लिखा। यह आवाज दबाने के लिए देशभर में मेरे खिलाफ कानून भंग के केस दर्ज किए, इनकी जानकारी मेरे पास नहीं है।’

बताया.. इस तरह लापता हुए थे
सोमवार को अचानक लापता होने के बारे में तोगड़िया ने कहा, “मैं परसों मुंबई में भैयाजी जोशी और साध्वी ऋतंभरा के साथ एक कार्यक्रम में था। मैंने पुलिस से कहा- सुबह आओ। सोमवार को एक व्यक्ति मेरे रूम में आया। उसने कहा- तुरंत निकलिए, आपको एनकाउंटर करने के लिए लोग निकले हैं। मैंने बाहर देखा- दो पुलिसवाले थे। मन में आया कि कोई बहस करने आया है। मेरे फोन पर कॉल आया। उस पर कहा गया कि सोला पुलिस स्टेशन से राजस्थान पुलिस का काफिला गुजरात पुलिस के सहयोग से निकला है। मुझे लगा कि कुछ दुर्घटना हुई तो हमारा तो जो होगा तो होगा ही, पूरे देश पर बुरी परिस्थिति खड़ी हो जाएगी। मैं इन्हीं कपड़ों में बाहर निकला। वहां मैंने कहा कि कार्यालय जा रहा हूं। ऑटो रिक्शा रोका। नजदीक जो कार्यकर्ता थे, उन्हें बैठाकर निकला। राजस्थान के सीएम और पुलिस कमिश्नर से संपर्क किया। उन्होंने कहा- हमारी पुलिस नहीं निकली। मैंने फोन स्विच ऑफ कर दिया। एक व्यक्ति के घर गया। वहां से दूसरे फोन से राजस्थान पुलिस की जानकारी हासिल की। वहां मेरे खिलाफ एक भी केस नहीं था। पता चला कि वे अरेस्ट वारंट लेकर आए हैं। अगर मैं राजस्थान पुलिस के सामने आता तो मेरे खिलाफ लंबे समय से षड्यंत्र हो रहा था। मैंने तय किया कि जयपुर में कोर्ट जाऊंगा। मैं अकेला ऑटो रिक्शा में कुछ दूर गया। चक्कर और पसीना आने लगा। मैंने कहा- हॉस्पिटल पहुंचाओ। रात को 10-11 बजे पता चला कि मैं हॉस्पिटल में था। पल्स 140 थी।’

जब डॉक्टर परमिशन देंगे, सरेंडर कर दूंगा
उन्होंने कहा- ‘जब डॉक्टर अनुमति देंगे, कोर्ट के सामने समर्पण करूंगा। मैं कोर्ट से कभी भागा नहीं। मेरी गुजरात या राजस्थान पुलिस से कोई शिकायत नहीं है। मैं बस यह जानना चाहता हूं कि आप मेरे कमरे की तलाशी लेने क्यों जा रहे थे। मेरे रूम में कानून विरुद्ध कोई संपत्ति नहीं है। मैं क्राइम ब्रांच से प्रार्थना करूंगा कि वो राजनीतिक दबाव में ना आएं। किसी के विरुद्ध शिकायत नहीं है। मेरा जीवन रहे न रहे, राम मंदिर, गौ-रक्षा और किसानों के लिए काम करता रहूंगा। मैं संपत्ति और समद्धि छोड़कर निकला हूं। मेरी आवाज दबाने का प्रयास न हो।’

हार्दिक पटेल और मोढवाडिया मिलने अस्पताल पहुंचे
- तोगड़िया की प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल उनसे मिलने पहुंच गए। हार्दिक अभी वहां से निकले ही थे कि कांग्रेस नेता अर्जुन मोढवाडिया भी उनका हाल जानने के लिए पहुंच गए। दोनों नेताओं ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वैचारिक मतभेदों से हटकर सुरक्षा के मुद्दे पर उनकी सहानुभूति तोगड़िया के साथ हैं।

विहिप ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
- अयोध्या के संत-धर्माचार्यों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। महंत कन्हैयादास ने कहा कि केन्द्र सरकार इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए और बताए कि कौन वे लोग हैं जो ऐसा करना चाहते हैं।