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सीमावर्ती 7 सीटें खोने से BJP बेचैन, गहलोत का कद बढ़ने से कांग्रेस में संघर्ष के आसार

गुजरात के नतीजे राजस्थान की राजनीति में मचाएंगे हलचल

Dainik Bhaskar

Dec 19, 2017, 05:21 AM IST
Gujarat s election results will create a stir in Rajasthan politics

जयपुर. गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को भले ही जीत नहीं मिल पाई, लेकिन उसने सत्तारूढ़ भाजपा को टक्कर देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि नतीजे राजस्थान की सियासत में भी हलचल मचाएंगे। राजस्थान से लगती गुजरात की धनेरा, मोडासा, भिलोड़ा, दाहोद, खेडबह्म, दंता व झालोड़ सहित 7 सीटों पर कांग्रेस जीती है, जबकि भाजपा को दो सीटों संतरामपुरा व फतेपुरा में जीत मिली।


सीमावर्ती सीटों पर मिली हार से भाजपा की बेचैनी बढ़ना लाजिमी है। कांग्रेस में भी अंदरूनी कलह बढ़ने की राह बन गई है। दरअसल, जिस तरह की रणनीति पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के गुजरात के प्रभारी महासचिव अशोक गहलोत ने गुजरात चुनाव में बनाई, उसी के कारण प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य में जीत के लिए भाजपा को काफी मशक्कत करनी पड़ी। अब उनका कद बढ़ना तय है, इसी के साथ प्रदेश कांग्रेस में खेमाबंदी और बढ़ सकती है।

कांग्रेस को भाजपा से पार पाने के लिए एक होना होगा
गुजरात चुनाव के बाद पूर्व सीएम अशोक गहलोत के कांग्रेस में ताकतवर होने की स्थिति में प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट को खुद को साबित करने के लिए अजमेर तथा अलवर लोकसभा उपचुनाव व मांडलगढ़ उप चुनाव में जीत दिलाने के लिए ताकत दिखानी होगी। प्रदेश में कांग्रेस चार खेमों में बंटी नजर आ रही है। पहले ध्रुव के तौर पर गहलोत खेमा है। दूसरे पर सचिन पायलट व तीसरे ध्रुव पर सीपी जोशी हैं। चौथे ध्रुव नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी हैं। यदि चारों खेमे एक नहीं होते हैं तो आने वाले चुनाव में भाजपा से पार पाना आसान नहीं होगा।

भाजपा : भूपेंद्र यादव के कद पर असर नहीं, रणनीति पर सवाल
भाजपा महासचिव व गुजरात के प्रभारी भूपेंद्र यादव को आंकड़ों का बाजीगर माना जाता है। भाजपा का गुजरात में 150 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य था, लेकिन सैकड़ा भी नहीं छुआ। जीत के कारण भले ही यादव के कद पर असर नहीं पड़े, लेकिन उनकी रणनीति पर सवाल जरूर उठेंगे।

आदिवासी सीटों पर भाजपा की पैठ, जाति-समाजों को साधने के लिए सीएम वसुंधरा राजे जुटी रहेंगी
सियासी विश्लेषकों की मानें तो गुजरात चुनाव में जातिवाद का जबर्दस्त असर देखने को मिला। हमारे यहां भी जातिवाद का असर चुनावों में देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इसे साधने के लिए प्रदेश के भ्रमण पर है। वे सभी समाजों के नेताओं से सीधे बात कर रही हैं। यह भी साफ है कि आदिवासी क्षेत्र कभी कांग्रेस का गढ़ रहा था। अब भाजपा ने वहां अपनी पैठ बनाने की कोशिश की है। इसमें वह कामयाब भी रही है।

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