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पुलिस जिसे दूसरे राज्य में बता रही थी, वह उठा और जस्टिस के सामने बोला- मैं तो यहीं हूं

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सामने आए हत्या के मामले में अनूठा वाक्‌या

Dainik Bhaskar

Jan 19, 2018, 04:38 AM IST
hearing on dalit in National human rights commission

जयपुर. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की तीन बैंचों ने गुरुवार को जेएलएन रोड स्थित ओटीएस में 169 दलित मामलों पर खुली सुनवाई की। अधिकांश मामले पुलिस से संबंधित थे। जस्टिस एचएल दत्तू की बैंच में सुनवाई के दौरान अनूठा वाक्‌या हुआ। हत्या के एक मामले में पुलिस ने कहा कि आरोपी व परिवादी में समझौता वार्ता चल रही है। दोनों पक्ष राज्य से बाहर गए हुए हैं। इस पर पीड़ित पक्ष खड़ा हुआ और बोला कोई समझौता वार्ता नहीं चल रही और हम आरोपी के साथ कहीं नहीं गए, यही मौजूद हैं। दरअसल, अलवर जिले के मानावास निवासी सीताराम की संदेहास्पद स्थिति में मौत हो गई। उसे मजदूरी के लिए गुड़गांव ले गए युवक पर ही हत्या का संदेह जताते हुए परिजनों ने केस दर्ज कराया था।


जस्टिस एचएल दत्तू की बैंच में सुनवाई के दौरान एडि. एसपी डॉ. मूल सिंह राणा ने आयोग को बताया कि परिवादी व आरोपी के बीच राजीनामे की बात चल रही है। दोनों साथ-साथ राज्य से बाहर गए हुए हैं। ऐसे में दोनों से संपर्क नहीं हो पा रहा। इस पर पास ही खड़े मृतक के भाई गिरिराज उठे और बोले-वह आरोपी के साथ कहीं नहीं गया। राजीनामे की कोई बात नहीं चल रही है। इस पर आयोग ने राणा से पूछा कि कमीशन के सामने भी झूठ बोल रहे हो। आप कह रहे हैं कि दोनों पक्षों से संपर्क नहीं हो पा रहा। खुद को कितना बड़ा अफसर समझते हो। इसके बाद दत्तू ने उन्हें कार्रवाई कर रिपोर्ट आयोग में पेश करने का निर्देश दिया।

दुष्कर्म मामले में डीजीपी तलब
जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष की बैंच में बाड़मेर जिले के बूठ राठौरान गांव में एक दलित परिवार की महिला से 22 जुलाई को सामूहिक दुष्कर्म का मामला रखा गया। पीड़ित परिवार की ओर से कहा गया कि पहले इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की गई। एफआईआर हुई भी तो जांच में अपराध प्रमाणित होने पर भी आरोपियों पर कार्रवाई नहीं हुई। एसपी से तीन बार कार्रवाई और सुरक्षा के लिए अनुरोध किया गया।

इस बीच आरोपियों के रिश्तेदारों ने पीड़िता के घर आकर राजीनामा नहीं करने पर पूरे परिवार को मार डालने की धमकी दी गई। परेशान पीड़िता ने आत्महत्या कर ली। शव के साथ धरना दिए जाने पर केवल दो आरोपियों को पकड़ा गया। इस पर आयोग ने नाराजगी जताते हुए डीजीपी को तलब किया। आयोग ने केवल दो आरोपियों की गिरफ्तारी को गंभीर लापरवाही माना और डीजीपी को जिम्मेदारों पर कार्रवाई की रिपोर्ट देने को कहा।


जस्टिस मुरुगेसन की बैंच में पति द्वारा अपने दोस्तों से दुष्कर्म कराने के मामले की सुनवाई हुई। आयोग ने इस मसले से जुड़े कई सवाल पूछे लेकिन पुलिस अफसर जवाब नहीं दे पाए तो आयोग ने नाराजगी जताते हुए कहा-आपको कुछ भी नहीं पता तो आप यहां क्यों आए हैं? साथ ही भरतपुर एसपी और एडिशनल एसपी पर उचित कार्रवाई की सिफारिश कर कार्रवाई से आयोग को अवगत कराने को कहा है।

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