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प्राइवेट कॉलेजों की फीस तय करेगा हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट, विरोध शुरू

निजी कॉलेज-यूनिवर्सिटी पर फिर सरकारी लगाम की कोशिश

Bhaskar News | Last Modified - Dec 10, 2017, 05:59 AM IST

प्राइवेट कॉलेजों की फीस तय करेगा हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट, विरोध शुरू

जयपुर. प्राइवेट एजुकेशन पर सरकारी लगाम की एक और कवायद उच्च शिक्षा विभाग शुरू कर रहा है। यह कोशिश निजी कॉलेजों के लिए फीस निर्धारण करने के लिए एक सरकारी सिस्टम बनाने की है। हालांकि अभी यह कागजों में नहीं आया है कि यह सरकारी व्यवस्था कैसी होगी, लेकिन विरोध के सुर पहले ही सामने आ गए हैं। निजी कॉलेजों के संगठनों ने इस पर आपत्ति करते हुए इसे प्राइवेट एजुकेशन में जबरन सरकारी दखल की एक और कोशिश बताया है। उनका कहना है कि निजी कॉलेजों की फीस को लेकर कोई विवाद ही नहीं है। ऐसे में फीस के नाम पर सरकारी दखल की कोशिश उच्च शिक्षा विभाग की मंशा पर सवाल खड़े करती है।


वैसे सरकार पहले भी निजी शिक्षण संस्थाओं पर अंकुश के तीन बार प्रयास कर चुकी है और हर बार उसे नाकामी ही हाथ लगी है। सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों पर अंकुश के लिए बनने वाला नियामक आयोग आज तक नहीं बन पाया है। निजी विश्वविद्यालयों के बोर्ड ऑफ मैंनेजमेंट में जनप्रतिनिधियों को शामिल करने की कवायद पर भी विभाग बैकफुट पर है। इन दोनों ही मामलों में उच्च विभाग की मंशा पर सवाल उठे थे। उच्च शिक्षा से जुड़े बड़े निजी संस्थानों का कहना था कि सरकार एक तरफ तो हर तबके तक उच्च शिक्षा पहुंचाने के लिए प्रोत्साहन की बात करती है, दूसरी तरफ विभाग ऐसे कदम उठाकर अनावश्यक दखल का प्रयास करता है।


इसी तरह शिक्षा विभाग फीस एक्ट बनाने के बाद भी प्रदेश के 35 हजार निजी स्कूलों की फीस पर लगाम कसने में अब तक फेल साबित हुआ है। जबकि अभिभावक सबसे ज्यादा जरूरत स्कूलों की फीस पर नियंत्रण की मानते हैं। इसे लेकर हर साल आंदोलन तक होते हैं। प्रदेश में अभी 1508 निजी कॉलेज संचालित है। इनमें करीब डेढ लाख विद्यार्थी अध्ययनरत है।

फीस कमेटी बनेगी
- उच्च शिक्षा विभाग जल्दी ही कॉलेज प्रिंसिपल व विश्वविद्यालय कुलपतियों से निजी कॉलेजों पर फीस नियंत्रण पर सुझाव लेगा। इसके बाद एक कमेटी बनेगी।

फीस पोर्टल पर होगी
- कमेटी विषयवार फीस तय करेगी। हर निजी कॉलेज की तय फीस उच्च शिक्षा िवभाग के पोर्टल पर रहेगी। कोई कॉलेज इससे अधिक फीस नहीं ले पाएगा।

हर शिक्षक का आधार
- शिक्षकों को आधार से जोड़ा जाएगा ताकि पढाने के नाम पर फर्जीवाडा न हो सके। इससे बिना शिक्षकों के कॉलेजों की जानकारी सामने आएगी।

निजी स्कूलों ने इस आदेश की कोई परवाह नहीं की। इसके बाद गहलोत सरकार ने तमिलनाडु पैटर्न पर 2013 में राजस्थान विद्यालय अधिनियम को लागू किया

इस एक्ट के तहत फीस निर्धारण कमेटी बनाई गई। कमेटी ने निजी स्कूलों से ब्यौरा मांगना शुरू ही किया था कि दिसंबर 2013 में सरकार बदल गई। 2016 में भाजपा सरकार महाराष्ट्र पैटर्न पर नया फीस कानून राजस्थान फीस का विनियमन एक्ट 2016 ले आई। इसमें स्कूल स्तर पर फीस निर्धारण कमेटियों के गठन का प्रावधान किया गया। यह कानून 1 जुलाई 2016 से लागू हो गया। लेकिन अब तक इसके आधार पर अभिभावकों को राहत नहीं मिल सकी है। क्योंकि स्कूलों ने फीस कमेटियां ही समय पर नहीं बनाई।

जनप्रतिनिधियों को बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट में शामिल करना
विधानसभा में कई विधायकों ने मांग रखी थी कि निजी विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट में जनप्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। निजी विश्वविद्यालय संचालक भी इसका विरोध करते हैं। क्योंकि उनका तर्क रहता है कि ऐसा होने से इन विश्वविद्यालयों का राजनीतिकरण होगा और शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी। इससे यह प्रयास भी आगे नहीं बढ़ पा रहा है।


पिछले साल घोषणा, पर अब तक नहीं बन पाया नियामक आयोग
फरवरी 2016 में तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री कालीचरण सराफ ने दावा किया था कि मध्यप्रदेश और हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर नियामक आयोग के गठन के बिल का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। इसे विधानसभा में रखा जाना था। दिसंबर 2016 में सराफ का विभाग बदल गया। अब उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी भी इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं कर पाई है।

#भास्कर एक्सपर्ट : उच्च शिक्षा में सरकारी दखलंदाजी ठीक नहीं

दखलंदाजी न करे, सरकार केवल इतना ध्यान रखे, विद्यार्थियों का शोषण न हो
उच्च शिक्षा में बार-बार सरकारी दखलंदाजी ठीक नहीं। सरकार को केवल इतना ध्यान रखना चाहिए कि विद्यार्थियों को शोषण नहीं हो। निजी कॉलेजों की फीस नियंत्रण का काम भी सरकार की बजाय विश्वविद्यालय करें।
- सुभाष गर्ग, पूर्व महामंत्री, राज. विवि एवं महाविद्यालय शिक्षक संघ

अभी कॉलेज नहीं, स्कूली फीस पर नियंत्रण की जरूरत है, इसी में विफल हो रहे हैं
सबसे बड़ी जरूरत कॉलेज नहीं, स्कूली फीस पर लगाम की है। इसमें ही सरकार अभी कामयाब नहीं हो पाई है। जो भी सरकार आती है, निजी संस्थानों पर लगाम के प्रयास तो बहुत करती है। लेकिन इच्छा शक्ति के अभाव में कुछ नहीं हो पाता।
- शिव कुमार शर्मा, पूर्व अध्यक्ष, राज्यस्तरीय फीस निर्धारण कमेटी

जल्द फीस कमेटी बनाएंगे, फिर सुझावों पर फैसला लेंगे

निजी कॉलेजों की फीस सरकार द्वारा तय करने की कवायद शुरू कर दी गई है। जल्दी ही एक कमेटी बनाई जाएगी। इसके सुझावों के आधार पर आगे निर्णय होगा। तय फीस और शिक्षकों की डिटेल विभाग के पोर्टल पर रहेगी। इससे फर्जीवाडे पर लगाम लगेगी और अभिभावकों को राहत मिल सकेगी।
- किरण माहेश्वरी, उच्च शिक्षा मंत्री

सरकार अगर फीस से जुड़ा फॉर्मूला लाई तो विरोध करेंगे

कॉलेज संचालक उपलब्ध संसाधनों के आधार पर फीस लेते हैं। सरकार अगर फीस तय करेगी, तो इससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी। इससे निजी और सरकारी कॉलेजों में कोई अंतर नहीं रह पाएगा। अगर सरकार ऐसा कोई फाॅर्मूला लाती है तो हम उसका विरोध करेंगे।
-एलसी भारतीय, अध्यक्ष, राजस्थान महाविद्यालय परिषद

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Web Title: praaivet collegeon ki fis tay karegaaa haayr ejukeshn dipaartmeint, virodh shuru
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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