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आईएएस निर्मला मीणा, पीए और मिल मालिक अंडरग्राउंड

गेहूं घोटाले में अग्रिम जमानत अर्जी खारिज

Dainik Bhaskar

Jan 13, 2018, 06:08 AM IST
IAS Nirmala Meena Underground accused of Wheat scandal irregularities

जोधपुर. बीपीएल परिवारों के गेहूं वितरण में अनियमितताओं की आराेपी आईएएस निर्मला मीणा अंडरग्राउंड हो गई है। उनके साथ तत्कालीन पीए अशोक पालीवाल, सप्लाई ठेकेदार सुरेश उपाध्याय व आटा मील मालिक स्वरूपसिंह भी गायब हैं। आईएएस मीणा ने इस मामले में एसीबी कोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी लगाई थी, जिस पर कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुरक्षित रखा था। शुक्रवार को एसीबी कोर्ट के पीठासीन अधिकारी राम सुरेश प्रसाद ने यह अर्जी खारिज कर दी। इसके बाद एसीबी इन चारों की तलाश में जुट गई है।

- आईएएस मीणा का पता लगाने के लिए भास्कर उनके सरकारी आवास पर पहुंचा तो उनके पति पवन मित्तल मिले। जब उनसे आईएएस मीणा के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि निर्मला जोधपुर से बाहर हैं। जब उनके जयपुर अथवा किसी और जगह पर होने व उनसे बात कराने का आग्रह किया तो वे बोले कि वह उनके संपर्क में नहीं है और कहां है, यह भी पता नहीं है। उनका मोबाइल भी स्विच ऑफ है।

#7 लाख लोगों का गेहूं खा गए, यानी अचानक डेढ़ गुणा हो गई शहर की आबादी, 15 दिन में गायब भी

डीएसओ रहते हुए निर्मला मीणा ने महज 15 दिन में 8 करोड़ रुपए के गेहूं का घोटाला कर दिया। इसके तहत 7 लाख लोगों का गेहूं बाजार में बेच दिया, यानी पंद्रह लाख की आबादी वाले शहर की आबादी को डेढ़ गुणा बता दिया और वे सभी पंद्रह दिन में गायब भी हाे गए। देखिए कैसे हड़पा गरीबों का राशन-

#3 लाइन की चिट्‌ठी से 8 करोड़ का खेल
मार्च 2016 में निर्मला मीणा ने जयपुर रसद विभाग को तीन लाइन की चिट्‌ठी लिखी, कि शहर में 33 हजार परिवार बढ़ गए हैं, इसलिए 35 हजार क्विंटल गेहूं अतिरिक्त आवंटित किया जाए। यह चिट्‌ठी रसद विभाग के डिप्टी कमिश्नर मुकेश मीणा ने मंगवाई थी और उन्होंने गेहूं आवंटित कर दिया।

#33 हजार परिवार बढ़ते तब भी 8 हजार क्विंटल ही मंगवाते
यदि निर्मला मीणा की चिट्‌ठी को सही माना जाए तो प्रति परिवार पांच सदस्य व 5 किलो गेहूं के हिसाब से 8 हजार 250 क्विंटल गेहूं ही मंगवाया जाना चाहिए था। फिर 35 हजार क्विंटल क्यों मंगवाया?

#35 हजार क्विंटल यानी 7 लाख लोगों के उपयोग का गेहूं
निर्मला मीणा के मुताबिक 33 हजार परिवार बढ़े, यानी प्रति परिवार पांच सदस्य मानें तो 1 लाख 40 हजार लोग होते हैं। इस अनुपात में तो 35 हजार क्विंटल गेहूं 7 लाख लोगों में बंटता।

…तो शहर में अचानक 7 लाख बीपीएल बढ़ गए?
जोधपुर शहर की आबादी ही पंद्रह लाख है और निर्मला मीणा ने तो 7 लाख बीपीएल लोगों का गेहूं आवंटित करवा कर बेच डाला। क्या मार्च 2016 में इतने बीपीएल बढ़ गए और अप्रैल में वे सभी गायब हो गए?

#कहां से लाए 33 हजार परिवार

सितंबर 2015 में पोस मशीनें शुरू हुईं, उससे पहले 35 हजार क्विंटल गेहूं आता था। राशन कार्ड के सत्यापन व शुद्धीकरण हुए तो 33 हजार राशन कार्ड फर्जी निकले इसलिए यह संख्या कम हो गई और अक्टूबर से फरवरी 16 तक 66 हजार परिवारों को गेहूं दे रहे थे। उन्हीं फर्जी राशन कार्ड को मार्च में बढ़ा हुआ बता कर यह गेहूं मंगवाया था।


#कैसे फंसी, अब क्यों अंडरग्राउंड हुई?
निर्मला मीणा एसीबी के समक्ष मौखिक रूप से दो-तीन बार स्पष्टीकरण दे चुकी थी, मगर एसीबी ने उन डीलर के भी बयान ले लिए जिनके हस्ताक्षर ही फर्जी थे। फिर जो डीलर 10 क्विंटल मंगवाता था उसे जीरो लगा कर 100 कर दिया, एेसे ही 5 को 50 व 8 को 80 क्विंटल कर फर्जी तरीके से गेहूं उठवा कर आटा मील को दे दिया।


मीणा समेत चारों की तलाश है

निर्मला मीणा, अशोक पालीवाल, सुरेश व स्वरूप सिंह ने 8 करोड़ का गेहूं हड़पा है। चारों की तलाश कर रहे हैं।

- अजयपाल लांबा, एसपी, एसीबी जोधपुर

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