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14 साल में विधायक सवा लाख तक पहुंचे, पार्षदों का भत्ता ~2300 ही बढ़ा

निगम के 2004, 2009 और 2014 में बने बोर्डों में देखा जाए तो पार्षदों के भत्तों में कोई खास बढोतरी नहीं हुई है।

Dainik Bhaskar

Jan 07, 2018, 07:06 AM IST
In 14 years MLAs reached up to 1.2 million

जयपुर. शहर की सरकार के जनप्रतिनिधियों की हालत खस्ता है। उनको वेतन के नाम पर कुछ नहीं मिलता। जो कुछ मिलता है वह केवल भत्ते होते हैं। यह भत्ता भी इतना कम की न्यूनतम मजदूरी पाने वालों से भी बहुत कम होता है। यही कारण है कि वे पार्षद बनने के बाद सुख-सुविधाएं जुटाने के लिए निगम में समिति अध्यक्ष बनना चाहते हैं। निगम के 2004, 2009 और 2014 में बने बोर्डों में देखा जाए तो पार्षदों के भत्तों में कोई खास बढोतरी नहीं हुई है।

पिछले 18 सालों में उनके भत्तों में 2 बार बढोतरी हुई है। इससे उनके भत्ते 1450 रुपए से बढकर अब 3750 रुपए तक पहुंच गए। यानी केवल 2300 रुपए बढे हैं। अगर फीसदी में देखा जाए तो यह 158 फीसदी की बढोतरी है। वर्तमान में पार्षदों को टेलीफोन के 1500 रुपए, वाहन के 1500 और स्टेशनरी भत्ते के रूप में 750 रुपए मिल रहे हैं।


इन्हीं 18 सालों में अगर विधायकों के वेतन और भत्तों की बढोतरी देखी जाए तो आंकड़े चौकाने वाले हैं। इन सालों में विधायकों के वेतन-भत्ते 6 बार बढे और इसमें 733 फीसदी की बढोतरी हुई है। विधायकों के वेतन भत्ते 2004 में केवल 15000 रुपए थे जो अब बढकर 125000 रुपए तक पहुंच गए हैं।


विधायकों के जब चाहे वेतन भत्तों को बढने से पार्षदों के मन में पीड़ा है। पूरे क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहकर लोगों की समस्याओं को दूर करने का दावा करने वाले पार्षद कहते हैं कि सरकार भत्तों के नाम पर केवल 3750 रुपए देती है। इतनी सी रकम में क्या होता है। वेतन तो मिलता ही नहीं है। विधायक जब चाहे अपना वेतन बढा लेते हैं। लेकिन शहर की सरकार के इन जनप्रतिनिधियों को सम्मानजनक वेतन-भत्ते देने के लिए सरकार के पास बजट नहीं है। आखिर हम लोगों के साथ यह भेदभाव कब दूर होगा।

समिति अध्यक्ष बन लेना चाहते हैं सुविधाएं

जयपुर नगर निगम में इस बार 21 की बजाय 24 समितियां होंगी। जो तीन समितियां बढ रही हैं, उनमें लाइट की दो अतिरिक्त समितियां बनाई जाएगी। साथ ही महिला उत्थान की एक नई समिति का गठन होगा। पार्षद को भत्ते बहुत कम मिलते हैं। इसलिए भाजपा के पार्षद इन समितियों के अध्यक्ष बनना चाहते हैं। ताकि निगम में कमरा, गाड़ी सहित अन्य कई प्रकार की सुविधाओं का लाभ उठाया जा सके। इसलिए विधायक अभी अपने चहेतों के लिए लॉबिंग में लगे रहते हैं। इस खींचतान का ही नतीजा है कि एक साल बाद भी निगम समितियां गठित नहीं हो पाई है।

भ्रष्टाचार को लेकर गरमाया था मुद्दा

पिछले दिनों पार्षदों और अधिकारियों के बीच भ्रष्टाचार को लेकर आरोप-प्रत्यारोप हुए। पार्षदों ने बोर्ड बैठक में जब अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। तो अधिकारी भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने निगम में धरना देकर आरोप लगा दिया कि पार्षदों के घर हर महीने लिफाफा पहुंचाया जाता है। बाद में इस मुद्दे को लेकर पार्टी दफ्तर में शहर भाजपा और पार्षदों की बैठक भी हुई थी। हालांकि, भ्रष्टाचार के इन आरोपों में कितनी सच्चाई है यह तो जांच का विषय है, लेकिन पार्षदों को मिलने वाले भत्ते इतने कम है कि अधिकारियों को आरोप लगाने का मौका मिल जाता है।

यह सभी पार्षदों की पीड़ा है कि उनको सम्मानजनक भत्ते नहीं मिलते। हम सुबह से देर रात तक जनता की सेवा में लगे रहते हैं। इस कारण सम्मानजनक वेतन-भत्ते तो मिलने ही चाहिए। समय समय पर इस बात को बैठकों में उठाते रहे हैं। आगे भी बोर्ड की मीटिंग में पार्षदों को वेतन दिलाने और भत्ता बढाने की मुद्दा उठाएंगे। -अशोक गर्ग, पार्षद, भाजपा
जयपुर के किसी भी इलाके की जानकारी और वहां की समस्या के बारे में एक पार्षद अच्छी तरह से जानता है। किसी इलाके में क्या मूलभूत सुविधाओं की जरुरत है। इसके लिए लोग सबसे पहले पार्षद को पकड़ते हैं। पार्षद भी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास करता रहता है। इसलिए हम चाहते हैं कि 15 से 25 हजार तक वेतन-भत्ते मिलने चाहिए।-प्रकाशचंद गुप्ता, पार्षद भाजपा

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