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4 साल में वायु प्रदूषण से 344 मौत, इंफेक्शन के 38 लाख मरीज

फिर भी सीपीसीबी ने 2 साल से नहीं भेजा एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग प्रोग्राम का पैसा

Danik Bhaskar | Dec 17, 2017, 05:49 AM IST

जयपुर. वायु प्रदूषण अब महामारी का रूप लेता जा रहा है लेकिन केन्द्र से लेकर राज्य सरकार का इस पर कोई ध्यान नहीं है। पिछले 4 साल में प्रदेश में वायु प्रदूषण की वजह से 344 मौतें हुई हैं और 37 लाख 97 हजार 814 लोगा तेज सांस इंफेक्शन से पीड़ित हैं, लेकिन सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने दो साल से प्रदूषण मंडल को एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग प्रोग्राम के तहत एक भी पैसा रिलीज नहीं किया है। पैसा नहीं मिलने से होने वाले नुकसान की छोटी सी बानगी है कि बोर्ड की 3 पीएम 2.5 सैम्पलर मशीनें पिछले 5 महीने से खराब पड़ी हैं। इनमें जोधपुर की एक और जयपुर की दो मशीनें शामिल हैं। वहीं, राज्य सरकार की लचर हालत का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि प्रदेश के पास पॉल्यूशन को लेकर कोई एक्शन प्लान तक नहीं है।

देश के आंकड़े और भी डरावने, फंड के नाम पर रिलीज हुए केवल 70 करोड़ रुपए

- वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों में देशभर का आंकड़ा और भी डराने वाला है। 2013 से 2016 के बीच देश में 12,180 लोगों की मौत हुई और 4 करोड़ 3 लाख 3 हजार 141 लोग तेज सांस के संक्रमण से जूझ रहे हैं।

- वहीं, केन्द्र सरकार ने सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को बहुत ही कम फंड दिया। सरकार ने 2014-15 में 60.10 करोड़, 2015-16 में 66.5 करोड़, 2016-17 में 88.19 करोड़ और नवंबर 2017-18 तक सिर्फ 70.3 करोड़ रुपए ही रिलीज किए हैं।


- सीपीसीबी के पास कम बजट आने की वजह से राज्यों के प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड्स को भी कम पैसा मिला है। सीपीसीबी ने इस साल अब तक सिर्फ 5 राज्यों को ही पैसा रिलीज किया है।

- इसके अलावा नीरी और आईआईटी कानपुर को सबसे ज्यादा पैसा दिया गया है। इस साल पिछले तीन साल के मुकाबले सबसे कम पैसा अब तक रिलीज किया गया है।

- नीरी, आईआईटी कानपुर को मिलाकर सीपीसीबी ने सिर्फ 5.31 करोड़ रुपए ही राज्यों को दिए हैं। इसमें राजस्थान को पिछले 2 साल से एक रुपया भी नहीं दिया गया है। 2015-16 में सीपीसीबी ने 42.18 लाख रुपए प्रदेश को दिए थे।