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कर्मचारियों के वेतन से जीपीएफ कटौती को तीन गुना तक बढ़ाया

नौ साल बाद दरें रिवाइज, मार्च से लागू होंगी

Bhaskar News | Last Modified - Feb 08, 2018, 08:04 AM IST

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    जयपुर. वित्तीय संकट से गुजर रही राज्य सरकार ने अपनी सेहत सुधारने के लिए राज्य कर्मचारियों के वेतन से जीपीएफ की कटौती 3 गुना तक बढ़ा दी है। कटौती की नई दरें मार्च 2018 से लागू होंगी। इससे पहले जीपीएफ में कटौती की स्लैब नवंबर 2009 में रिवाइज की गई थी। हालांकि जब भी नया वेतनमान लागू होता है, तब सरकार उसी अनुपात में जीपीएफ रेट भी रिवाइज करती है, लेकिन सातवां वेतनमान लागू होने के बाद सरकार ने जीपीएफ की रेट रिवाइज नहीं की थी।

    बुधवार को जीपीएफ कटौती की संशोधित दरें जारी कर दीं। वर्तमान में सरकार के पास करीब 26 हजार करोड़ का जीपीएफ फंड है। मौजूदा स्लैब से हर साल फंड में करीब 233 करोड़ रुपए महीने आ रहे थे और 220 करोड़ रुपए का भुगतान हो रहा है। ब्याज से करीब 160 करोड़ रु. मिल रहे थे। अब कटौती बढ़ने से ब्याज की रकम बढ़कर करीब 500 करोड़ रुपए महीना हो जाएगी।

    कटौती बढ़ाने की एक बड़ी वजह अंशधारकों का कम होना भी है। न्यू पेंशन स्कीम लागू होने के बाद जीपीएफ में अंशधारक लगातार घट रहे हैं। हर साल करीब 25 हजार लोग रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में जीपीएफ में अंशधारकों की मौजूदा संख्या लगभग पौने चार लाख ही रह गई है।

    असल वजह : वेतनमान के लिए अगले वित्त वर्ष में 16 हजार करोड़ देने होंगे
    राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2017-18 में सातवां वेतनमान लागू किया है। इसका एक साल का वित्तीय भार करीब 10 हजार करोड़ रुपए है। लेकिन मार्च तक सरकार लगभग 4 हजार करोड़ रुपए ही कर्मचारियों को दे पाएगी। ऐसे में 6 हजार करोड़ रुपए एरियर और अगले साल के 10 हजार करोड़ का बोझ इकट्‌ठा सरकार पर आएगा। इसलिए सरकार अपने सभी फाइनेंशियल रिसोर्सेज का फुल यूटिलाइजेशन कर रही है।

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