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कहीं बर्तन बिखरे थे कहीं पुराने नोट्स, राख बनकर एक कोने में सिमट गईं 5 जानें

घर जिंदा होने का अधजला एलबम: तस्वीर में घर में आग लगने से पहले का पूरा जीवन है

Danik Bhaskar | Jan 17, 2018, 01:28 AM IST

जयपुर. कहने को उस आग की आखिरी चिंगारी भी बुझ गई...धुआं छंट गया, दीवारों पर जमी कालिख भी धो दी गई...मगर फिर भी कुछ है जो बाकी रह गया है, रह-रहकर सुलग उठता है। विद्याधरनगर के सेक्टर-9 में 5 लोगों की जिंदगी खाक करने वाले हादसे के अब यही निशान बाकी रह गए हैं। हंसती-खेलती जिंदगी अब अधजले एलबमों में अधूरी याद की टीस बनकर ही बाकी है। ये टीस ही कभी सवाल बनकर जुबान पर आती है तो कभी आंसू बनकर पलकों से बह जाती है। क्या ये पांच जानें बचाने के लिए कुछ भी नहीं किया जा सकता था? बुरी तरह जल चुके कमरों से निकले बचे हुए सामान को देखकर हर आंख नम हो जाती है। संजीव गर्ग आज भी पथराई आंखों से खाली कमरों को देखते हैं, जहां सिर्फ 4 दिन पहले उनकी जिंदगी आबाद थी। सिर्फ एक रात में उनका घर सिर्फ एक मकान रह गया।

सिर्फ तस्वीरों में बाकी रह गई जिंदगी
- मकान से निकले सामान कुछ पुराने एलबम हैं जो पूरे नहीं जले। तस्वीरें हैं जो परिवार के खुशनुमा पलों की गवाह हैं। कहीं अनिमेश के जन्मदिन पार्टी की तस्वीरें हैं तो कहीं अनिमेश, अपूर्वा और अर्पिता की अपने दादा महेंद्र गर्ग के साथ खेलते हुए...अब सिर्फ इन तस्वीरों में ही उन खुशनुमा जिंदगियों की याद रह गई है।

कहीं बर्तन बिखरे थे कहीं पुराने नोट्स
- सामान के ढेर में रसोई के कुछ बर्तन हैं तो कहीं पुराने क्लास नोट्स...इस आग में अर्पिता और अपूर्वा के एमबीए और आरएएस बनने का सपना भी जला दिया। दोनों के कुछ परीक्षाओं की तैयारी के लिए बना रखे कुछ एक बाल्टी के ऊपर पड़े थे।


पुलिस की निगरानी में संजीव गर्ग का मकान
- संजीव गर्ग पत्नी के साथ विद्याधर नगर में दूसरे घर में चले गए। उजड़ा घर पुलिस के पहरे में है। यहां होमगार्ड हंसा मिली। बोली- अभी जांच चल रही है। घर पुलिस कस्टडी में है। घर के पीछे दो कमरों में तबाही का मलबा अभी भी भरा हुआ है।