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जयपुर ने बना दी इतिहास की पहली महिला वंशावली, आज तक नहीं हुआ था ऐसा

महापुरा से महिला सशक्तिकरण की दिशा में अनूठा कार्य।

Dainik Bhaskar

Mar 08, 2018, 01:05 PM IST
Jaipur made the first woman genealogy in history

महिला वंशावली की पूरी फोटो देखने के लिए क्लिक करें...

जयपुर. जयपुर से करीब 14 किमी दूर अजमेर रोड के निकट महापुरा में इतिहास की पहली महिला वंशावली तैयार की गई है। दावा है कि यह ऐसी ऐतिहासिक वंशावली है जिसमें पुत्रियों, पुत्र-वधुओं, पौत्री, प्र-पौत्री, प्र-प्रपौत्री, पौत्र-वधू, प्र-प्रपौत्र वधू की जानकारी के साथ कौन किसकी पुत्री किसको, कहां व किस गौत्र में विवाहित हुई व उनके माता-पिता व सास-ससुर का नाम गोत्र व निवास स्थान कहां है इसका भी उल्लेख है। इस वंशावली को तैयार किया है महापुरा में निवास कर रहे चेतन गोस्वामी ने।


इतिहासकारों व साहित्यकारों की मानें तो यह विश्व के इतिहास में पहला ऐसा अवसर है जो किसी समाज में मातृपक्ष को प्रधान रखकर पीढ़ी-दर-पीढ़ी ऐसी वंशावली तैयार कर प्रकाशित करवाई गई है। ऐसा वर्णन इतिहास में कहीं देखने को नहीं मिलता। चेतन को यह अहसास हुआ कि किसी भी समाज की अधिकतर वंशावलियों में पुरुषों की पीढ़ी दर पीढ़ी का ही जिक्र आता है, महिलाओं का कहीं कोई जिक्र नहीं मिलता। इस अपेक्षा की पूर्ति के लिए चेतन ने महापुरा आत्रेय वंश की उन पुरानी पीढ़ियों की महिलाओं की जानकारी एकत्र कर ''वंश-वल्लरी'' नाम से एक पुस्तक में संकलित की जो कालखंड की जानकारी में आ पाई।


इतिहासकारों का मत....

वंश की महिलाओं को प्रधान रखकर किसी कुल की महिला वंशावली अभिलिखित करने का यह कार्य निश्चित तौर पर देश के इतिहास में पहली बार किया गया है। इसमें भी यह रौचक है कि यह कार्य एक युवा पीढ़ी की ओर से किया गया है। आधुनिक युग में महिला जाग्रति वैश्विक चेतना के फलस्वरूप किया गया यह कार्य वाकई समाज के लिए प्रेरणादायक है।

-शिवदत्त शर्मा चतुर्वेदी साहित्यकार/इतिहासकार, रिटायर्ड प्रोफेसर, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी

निसंदेह इस महिला वंश-वल्लरी को इतिहास की ऐसी पहली वंशावली की श्रेणी में लिया जा सकता है, जो किसी भी समाज की मातृ-पक्ष को प्रधान रखकर तैयार की गई है। यह निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि भारतवर्ष में प्रकाशित वंश-वृक्षों में पुरुषों की पीढ़ियों का तो उल्लेख तो मिलता है लेकिन किस वंशज की कौन पत्नी थी, कितनी पुत्रियां थीं, कहां से पुत्र-पौत्र, प्रपौत्र वधुएं आईं व वंश की पुत्रियों का विवाह किसके साथ व किस कुल में व किस गौत्र में हुआ।
-महामहोपाध्याय देवर्षि कलानाथ शास्त्री (राष्ट्रपति सम्मानित), भाषाविद्, पूर्व अध्यक्ष राजस्थान संस्कृत अकादमी

एक दशक पुरानी महिलाओं की वंशावली का उल्लेख एशिया में कहीं नहीं मिलता। पुरोहितों की वंशावली के बाद ही ऋषि पत्नियों का उल्लेख इतिहास में मिलता है, इसके अतिरिक्त कहीं-कहीं पुत्रियों के नाम का उल्लेख भी मिलता है, लेकिन वंशावली के रूप में नहीं मिलता। मेरी जानकारी में अब तक न तो ऐसी मुद्रित (प्रकाशित) महिला वंशावली के बारे में सुना गया ना ही देखा गया है।
-विभा उपाध्याय, रिटायर्ड प्रोफेसर, डिपार्टमेंट आफ हिस्ट्री एंड इंडियन कल्चर, राजस्थान विवि, जयपुर।

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