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जयपुर मेट्रो की सुस्त चाल: 4 साल में भी मेट्रो ने तय नहीं किया 2.5 Km का सफर

मेट्रो प्राइवेट कंपनी, हैदराबाद और मुंबई पीपीपी मोड पर और कोलकाता मेट्रो का संचालन केंद्र सरकार कर रही है।

Danik Bhaskar | Jan 15, 2018, 02:07 AM IST

जयपुर. ढाई साल में देश के चार शहरों में मेट्रो 10 किमी से बढ़कर 28 किमी तक पहुंची गई, लेकिन जयपुर मेट्रो 4 साल बाद भी ढाई किमी का सफर शुरू नहीं कर पाई। सैकंड फेज की डीपीआर का तो दूर-दूर तक पता नहीं है। इसमें 2 बार बदलाव हो चुके हैं। 6 करोड़ की लागत से तीसरी बार विदेशी कंपनी से डीपीआर तैयार कराई जा रही है। इसमें 4 साल बीत गए। दूरी नहीं बढ़ने से यात्री नहीं बढ़ रहे और घाटा निरंतर बढ़ता जा रहा है। मेट्रो को 31 माह में केवल 85 करोड़ की आय हुई है, जबकि खर्चा 151 करोड़ हुआ है।


मानसरोवर से चांदपोल के बीच 9.5 किमी में मेट्रो का संचालन होने पर दूसरे फेज-1बी चांदपोल से बड़ी चौपड़ के बीच ढाई किमी के बीच मेट्रो का संचालन होना था। इसका शिलान्यास अक्टूबर 2013 में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया था। चार साल में मेट्रो प्रशासन ने लोगों को अभी तक सिर्फ सुरंग दिखाई है। छोटी चौपड़ पर मेट्रो स्टेशन की खुदाई पूरी हुई है। बड़ी चौपड़ पर तो यह काम भी पूरा नहीं हुआ, जबकि सितंबर में यहां मेट्रो शुरू करने का दावा कर रहे हैं।

2.5 वर्ष में बदली स्थिति
14 किमी दिल्ली में मेट्रो विस्तार
05 किमी बैंगलोर में मेट्रो विस्तार
18 किमी चेन्नई में मेट्रो विस्तार
06 किमी कोच्ची में मेट्रो विस्तार
और जयपुर में वही है 9.5 किमी

...यह हो सकती है वजह
जयपुर मेट्रो ऐसी है, जिस पर पूर्ण स्वामित्व राज्य सरकार है। इसलिए निर्माण की धीमी गति होना माना जा रहा है। दबाव नहीं होने से राज्य सरकार मनमर्जी से काम करती है। वहीं गुड़गांव मेट्रो प्राइवेट कंपनी, हैदराबाद और मुंबई पीपीपी मोड पर और कोलकाता मेट्रो का संचालन केंद्र सरकार कर रही है।

जयपुर से आगे निकले ...
जयपुर शहर में जब मेट्रो का संचालन किया गया था तो यह देश का छठा शहर था। इसके बाद चेन्नई, कोच्ची, हैदराबाद और लखनऊ में मेट्रो ट्रेन की सेवा शुरू की गई। शुरू होने के बाद भी ये सभी शहर जयपुर मेट्रो को पीछे छोड़ते हुए कई किमी आगे बढ़ गए, जबकि जयपुर मेट्रो 9.5 किमी पर अटकी हुई है।

टनल में मेट्रो के काम में 5 साल लगते हैं-डायरेक्टर
मेट्रो बनने में कोई देरी नहीं हुई है। टनल में मेट्रो बनाने में कम से कम 5 साल लगते हैं। यह स्थिति अन्य प्रदेश में है। फेज-1बी के निर्माण को 4 साल पूरे हो गए हैं। एक साल बाद इस पर मेट्रो चलाने की कवायद है।
- अश्वनी सक्सेना, डायरेक्टर प्रोजेक्ट