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खाना अच्छा नहीं बनने की लड़ाई तलाक तक पहुंची, फिर जज ने दिया ये फैसला

फैसले के दिन मंगलवार को जज व वकील ने दो मिनट के लिए दंपती को बुलाकर समझाया।

Danik Bhaskar | Jan 24, 2018, 06:56 AM IST

भरतपुर. पत्नी खाना अच्छा नहीं बनाती और मामूली से विवाद को लेकर दंपति के बीच विवाद हो गया। खाने की लड़ाई इतनी बड़ी हो गई कि झगड़ा तलाक तक आ पहुंचा। फैसले के दिन मंगलवार को जज व वकील ने दो मिनट के लिए दंपती को बुलाकर समझाया। उन्होंने कहा कि आप दोनों की जिंदगी से चार बच्चों का भविष्य जुड़ा है। उन चारों के भविष्य का फैसला आपके हाथ में है। इतने में ही दोनों की आंखों से आंसू बहने लगे और बात समझौते पर आ पहुंची। इतने में ही जज ने दो माला मंगवाईं और दंपती को एक-दूसरे को पहनाने के लिए दी। इसके बाद दोनों जब कोर्ट रूम से बाहर निकले तो तीन साल तक कोर्ट की तारीखों का दर्द आंखों से बहकर निकल रहा था।

- महिला अलवर के दिल्ली दरवाजा निवासी है और वैर के गांव नगला कप्तान में उसकी ससुराल है।

- वैर के गांव नगला कप्तान निवासी खेम सिंह व दिल्ली दरवाजा अलवर निवासी शारदा देवी की शादी 23 अप्रैल 2000 को हुई थी। जिनकी दो बेटियां 16 वर्ष की यदुमिनी, 15 वर्ष की यामिनी, 11 वर्षीय कृष्णा, सात वर्षीय हिमांशु है। 18 नवंबर 2015 से उनका केस चल रहा था।

ईश्वर ने सुन ली, हमें मम्मी-पापा दोनों मिल गए
- दंपती के बेटे कृष्णा व हिमांशु भी उनके साथ आए थे। उन्होंने कहा कि हम और दोनों दीदी हर बार साथ रहने के लिए कहते थे, लेकिन हमको मालूम था कि एक ना एक दिन ऐसा जरूर होगा। आज वह हो गया। बहुत खुश हैं कि तीन साल बाद एक बार फिर हमारा परिवार एक हो गया।

तीन साल में वो सबकुछ देखा जो भगवान किसी और को ना दिखाए : खेम सिंह
- सुना था कि कोर्ट के चक्कर काटते-काटते जिंदगी गुजर जाती है। तीन साल पहले खाना और पारिवारिक विवाद को लेकर तनाव इतना बढ़ गया कि बात तलाक तक आ पहुंची, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए था पर तीन साल में वो सबकुछ देखा जो ईश्वर किसी को ना दिखाए। जज साहब, वकील राकेश शर्मा, मनीष शर्मा आदि ने समझाया तो सबकुछ दुबारा जुड़ गया।

पति पोस्ट ग्रेजुएट और पत्नी 10वीं पास
पति खेमसिंह पोस्ट ग्रेजुएट है और पत्नी शारदा 10वीं पास है। खेमसिंह भारतीय जीवन बीमा निगम में सीनियर एडवाइजर की पद पर कार्यरत है। जब कोर्ट में याचिका पर सुनवाई चल रही थी तो एक लाख रुपए में समझौता तक तय हो गया था।


दंपती में हुई रजामंदी बच्चों के साथ घर लौटे
फैसले के दिन से पहले समझौते की कोशिश चल रही थी। ऐसे में अंतिम दिन पहले अधिवक्ता ने समझाया। फिर जज ने कोर्ट में फैसले के आखिरी दिन पति-पत्नी को बुलाकर समझाया। पारिवारिक न्यायालय के जज राजवीर सिंह त्यागी ने कहा कि कहा कि आप दोनों की जिंदगी से चार बच्चों का भविष्य जुड़ा है। उन चारों के भविष्य का फैसला आपके हाथ में है। ये चारों बच्चे आपकी माला के मोती हैं, अगर आप दोनों अलग हो गए तो माला के सभी मोती बिखर जाएंगे और इनका जीवन खराब हो जाएगा। दंपती की आंखों से आंसू न आंसू बहने लगे और समझौते हुआ।