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'लगान' के ईश्वर काका हारे जिंदगी की जंग, इसलिए खत्म हो गया था करिअर

पैरालिसिस अटैक के चलते वे लगातार बीमार रहे। वहां से उनका फिल्मी कॅरिअर खत्म हो गया।

Danik Bhaskar | Jan 08, 2018, 04:09 AM IST

जैसलमेर. लगान फिल्म के ईश्वर काका (श्रीवल्लभ व्यास) का निधन जयपुर में रविवार को हो गया। श्रीवल्ल्भ व्यास जैसलमेर के रहने वाले थे और उन्होंने फिल्म इंडस्ट्रीज में अपना अलग ही मुकाम हासिल किया था। उनके निधन से जैसलमेर में शोक की लहर दौड़ गई। उनका पैतृक मकान सोनार दुर्ग में है और उनका बचपन इसी दुर्ग की गलियों में बीता था। लम्बी बीमारी के बाद उन्होंने जयपुर में रविवार को अंतिम सांस ली। रविवार की शाम उनके परिजन जैसलमेर हैदराबाद से जयपुर के लिए रवाना हो गए। सोमवार को जयपुर में ही उनका अंतिम संस्कार होगा।

- दरअसल, अक्टूबर 2008 में गुजरात में भोजपुरी फिल्म की शूटिंग के दौरान उनके साथ हादसा हुआ था। उसके बाद पैरालिसिस अटैक के चलते वे लगातार बीमार रहे। वहां से उनका फिल्मी कॅरिअर खत्म हो गया। वहां से पहले उन्हें हैदराबाद ले जाया गया और बाद में जैसलमेर आए। पिछले कई वर्षों से वे जयपुर में ही थे। उनके पीछे उनकी पत्नी शोभा व्यास, दो बेटियां शिवानी रागिनी है। उनकी माता उनके छोटे भाई के साथ हैदराबाद में रहती है।

लगान के भुवन यानी आमिर खान ने की मदद
बीमारी के वक्त व्यास के परिवार को पैसों की मंदी भी झेलनी पड़ी। इस दौरान लगान फिल्म के भुवन आमिर खान ने उनके परिवार की मदद की। वे हर माह 30 हजार रुपए भेजते थे। साथ ही उनकी बेटियों की स्कूल फीस और उनके मेडिकल का खर्च भी दे रहे थे। आमिर के अलावा मुश्किल घड़ी में अभिनेता इमरान खान और मनोज वाजपेयी ने भी मदद की थी।

लगान फिल्म के ईश्वर काका ने दिलाई थी ख्याति
श्रीवल्लभ व्यास को 1999 में आई सरफरोश फिल्म में मेजर बेग का किरदार मिला। जहां आमिर खान को उनकी एक्टिंग पसंद आई तो उन्होंने अपनी फिल्म लगान में व्यास को ईश्वर काका का किरदार दिया। लगान में उनके काम की तारीफ हुई और वहीं से उन्हें प्रसिद्धि भी मिली। उसके बाद लगातार उन्हें फिल्मों में काम मिलता रहा। उन्होंने 60 से अधिक फिल्मों में काम किया। इसमें बॉलीवुड के अलावा भोजपुरी मलयालम फिल्में भी शामिल है। मुख्य रूप से केतन मेहता की सरदार, शाहरुख खान के साथ माया मेम साहब, वेलकम टू सज्जनपुर, सरफरोश, लगान, बंटी और बबली, चांदनी बार और विरुद्ध आदि फिल्में है।

पहला सीरियल काठ की गाड़ी 1981 में आया
1981में दूरदर्शन पर प्रसारित हुए सीरियल काठ की गाड़ी में श्रीवल्लभ व्यास ने अहम किरदार निभाया था। उसके बाद कई विज्ञापनों धारावाहिकों में उन्हें रोल मिला वे 1973 में जैसलमेर से जयपुर पढ़ाई करने के लिए गए थे। उन्होंने 1976 में एमए हिन्दी में किया और बाद में सीधे ही मुम्बई की तरफ रुख कर लिया। जहां नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में 700 रुपए में नौकरी भी की।

व्यास का जीवन संघर्ष भरा रहा
उनका जन्म 17 सितंबर 1958 को जैसलमेर में हुआ था। राजस्थान यूनिवर्सिटी से हिन्दी में एमए करने के बाद वे 1976 में मुम्बई चले गए थे। पहला सीरियल 1981 में किया। उसके बाद छोटे मोटे किरदार विज्ञापन सीरियल में किए। 1999-2000 में उन्हें प्रसिद्धि मिली। ऐसे में 24 साल संघर्ष के बाद वे फिल्म इंडस्ट्रीज में स्थापित हो पाए।