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शराब दुकान बंदी की वोटिंग के खिलाफ कोर्ट पहुंचा लाइसेंसी

विभाग के एक्ट 1970 के नियम 1950 के तहत देसी शराब दुकानें ही बंद की जा सकती हैं।

Dainik Bhaskar

Jan 06, 2018, 05:09 AM IST
Licensing Against Voting of Liquor shop closure

जयपुर. आबकारी विभाग का शराब दुकान बंदी के लिए वोटिंग का फैसला पहली बार विवादों में आ गया है। विभाग ने हाल ही में राजसमंद की मंडावर ग्राम पंचायत में खुली शराब की दुकान को बंद करवाने पर वोटिंग के लिए 20 जनवरी की तारीख घोषित की थी, लेकिन अब इस दुकान का मालिक नौरतमल इस आदेश के खिलाफ जोधपुर हाईकोर्ट पहुंच गया है।

- उसका कहना है कि आबकारी विभाग के नियमानुसार देसी शराब दुकान ही बंद की जा सकती है, लेकिन उसकी दुकान कंपोजिट होने के कारण बंद ही नहीं हो सकती है।

- उधर, राजस्थान आबकारी विभाग के आयुक्त ओपी यादव का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में हम देसी शराब की दुकान ही देते हैं।

- विभाग की पॉलिसी के अनुसार लाइसेंसियों से कंपोजिट दुकानों की फीस लेकर हम कंपोजिट की सुविधा दे रहे हैं। दुकान बंदी की वोटिंग स्थानीय जिला कलेक्टर ही फैसला लेते हैं, उनको लिखा जा चुका है।

- राजसमंद जिला कलेक्टर पीसी बैरवाल का कहना है कि आबकारी विभाग को अपने एक्ट की जानकारी होगी। हम आबकारी आयुक्त से मिले पत्र अनुसार वोटिंग प्रक्रिया कराएंगे।
- वित्त वर्ष 2017-18 के लिए जारी पॉलिसी के अनुसार राजस्थान के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में अनिवार्य रूप से कंपोजिट शराब दुकानें जारी की गई हैं। विभाग के एक्ट 1970 के नियम 1950 के तहत देसी शराब दुकानें ही बंद की जा सकती हैं।

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