--Advertisement--

छतों पर लोग और आकाश में छाईं पतंगें, शाम को दिवाली सा नजारा

रंग-बिरंगे गुब्बारों के साथ विश लैम्स ने भी भरी उड़ान, तीर्थों में स्नान और दान-पुण्य का चलता रहा दौर

Danik Bhaskar | Jan 15, 2018, 03:06 AM IST

जयपुर. नौ ग्रहों के राजा सूर्यदेव के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश का पर्व मकर संक्रांति सर्वार्थसिद्धि योग व प्रदोष तिथि, वृष लग्न और नवांश कुंभ के विशेष संयोग में शहरवासियों ने धूमधाम और उत्साह से मनाया गया। 17 साल बाद रविवार को संक्रांति पड़ने से इसका विशेष महत्व रहा।


दिनभर स्नान, दान-पुण्य और पतंगबाजी का दौर चलता रहा। छतों पर लोग और आकाश में पतंगें छाई रहीं। डीजे पर बजते फिल्मी और राजस्थानी गानों की धुनों के बीच पतंगें ठुमकती रहीं और पेच लड़ते रहे। वो काटा, वो मारा की आवाजें छतों से गूंजती रहीं। पतंगबाजी के दौरान ही पकौडिय़ों और चाय का दौर भी चलता रहा। पतंगबाजी की विशेष रौनक चारदीवारी में देखने को मिली।

मानसरोवर, मालवीयनगर में भी शौकीन पतंगबाज छतों पर डटे रहे। शहर की अन्य कॉलोनियों में भी बच्चों और महिलाओं ने भी खूब पतंगें उड़ाई। हवा ने भी लोगों का साथ दिया। हवा के रुख के साथ ही पतंगें आकाश छूती रहीं। वहीं, कटी पतंगों को लूटने का बच्चे ही नहीं बड़े और महिलाएं भी मजा लेती रहीं। शाम को सूरज ढलते-ढलते तो तो आकाश पतंगों से अट गया। जैसे ही संध्या हुई तो आसमान में दिवाली सा नजारा हो गया। लोगों ने बड़ी संख्या में विश लैम्प जलाकर छोड़े। उनकी रोशनी से आसमान रंगीन हो गया, साथ में लोग पटाखे भी छोड़ते रहे।


सर्वार्थसिद्धि योग और वृष लग्न की संक्रांति पर जमकर किया गया दान-पुण्य
हालांकि दिनभर लोगों ने दान-पुण्य किया लेकिन महापुण्य काल व पुण्यकाल का विशेष महत्व रहा। जैसे ही दोपहर 1:47 बजे सूर्यदेव दक्षिणायन से उत्तरायण हुए दान-पुण्य का दौर शुरू हो गया। यह शाम तक चलता रहा। लोगों ने गायों को हरा चारा खिलाया। गरीबों को गर्म कपड़े, कंबल, मौजे आदि दान किए। संक्रांति को तिल का विशेष योग होने से तिल के लड्डू, गजक, रेवड़ी, तिलपट्टी आदि दान किए और खाए भी। सर्वार्थसिद्धि योग व प्रदोष तिथि, वृष लग्न और नवांश कुंभ के ये ज्योतिषीय संयोग दान-पुण्य काफी फलदायी रहे।

शास्त्रों के अनुसार प्रदोष, सर्वार्थसिद्धि योग व वृष लग्न में किए गए दान का फल सौ गुना मिलता है। सर्वार्थसिद्धि योग दोपहर 1:14 बजे से शुरू होकर सोमवार को सूर्योदय से एक मिनट पूर्व सुबह 7:20 बजे तक रहेगा। दूसरी ओर महिलाओं ने विशेष रूप से सुहाग का सामान व 14 तरह की वस्तुएं, कपड़े आदि मिनस कर महिलाओं को ये वस्तुओं भेंट स्वरूप दीं। बायना कल्पकर घर की बुजुर्ग महिलाओं का आशीर्वाद लिया। बच्चों व युवाओं को पतंगें और डोर दिलाई और संक्रांति की खर्ची भी दी।