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सर्वार्थसिद्धि योग और प्रदोष तिथि के विशेष संयोग में मकर संक्रांति

17 साल बाद रविवार को आएगा पर्व, वृष लग्न से संक्रांति अत्यंत मंगलकारी

Danik Bhaskar | Jan 09, 2018, 03:38 AM IST

जयपुर. ग्रहों के राजा सूर्यदेव के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश का पर्व ‘मकर संक्रांति’ 17 साल बाद रविवार को मनाया जाएगा। दोपहर 1:47 बजे सूर्यदेव दक्षिणायन से उत्तरायण होंगे। पूरे दिन सर्वार्थसिद्धि योग व प्रदोष तिथि का संयोग रहेगा। भास्कर के उत्तरायण होने के समय वृष लग्न और कुंभ नवांश रहेगा। ये ज्योतिषीय योग दान-पुण्य आदि के लिए काफी फलदायी रहते हैं। खास बात यह है कि वृष लग्न होने से इस साल मकर संक्रांति अत्यंत शुभ व मंगलकारी रहेगी।

- शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष, सर्वार्थसिद्धि योग व वृष लग्न में किए दान का फल 100 गुना मिलता है। हालांकि दिनभर दान-पुण्य और स्नान आदि किए जा सकेंगे। फिर भी पुण्यकाल और महापुण्य काल का विशेष महत्व रहेगा। सर्वार्थसिद्धि योग दोपहर 1:14 बजे से शुरू होगा, जो दूसरे दिन सोमवार को सूर्योदय से 1 मिनट पूर्व सुबह 7:20 बजे तक रहेगा।

- इससे पूर्व 2001 में रविवार को सूर्यदेव दक्षिणायान से उत्तरायण हुए थे। हालांकि, 2007 में सोमवार को ग्रहों के राजा भास्कर उत्तरायण हुए थे लेकिन शहरवासियों ने रविवार की छुट्टी का लाभ उठाते हुए मकर संक्रांति का पर्व एक दिन बाद ही मना लिया था। अब 1924 में मकर संक्रांति रविवार को आएगी।

तिल का रहेगा विशेष महत्व
सूर्य ग्रह सत्ता, प्रबंध, सरकार का स्वामी माना जाता है। इनकी पूजा करने से ऐश्वर्य व अधिकार मिलते हैं। पं. दिनेश मिश्रा के अनुसार संक्रांति के दिन तिल का विशेष महत्व रहता है। छह कर्म तिल से करने चाहिए। सर्वप्रथम तिल जल में डालकर और तिल तेल का उबटन लगाकर स्नान करना चाहिए। सूर्योदय के समय सूर्यदेव को मीठे जल में तिल डालकर अर्घ्य देना चाहिए। तिल से हवन, भोजन में तिल का प्रयोग और तिल का दान करना चाहिए।

राशियों के अनुसार दान
मेष-
दर्पण, मच्छरदानी व तिल का दान।
वृष- ऊनी वस्त्र, अनाज व तिल।
मिथुन- कंबल, ऊनी वस्त्र, तिल के लड्डू।
कर्क- साबूदाना, शहद, तिल के लड्डू।
सिंह- चने की दाल, घी, गाय को चारा।
कन्या- गर्म वस्त्र, चादर, ऊनी वस्त्र।
तुला- गुड़, तिल तेल और चावल।
वृश्चिक- दूध, दही व तिल सामग्री।
धनु- तिल तेल, हल्दी, गाय को चारा।
मकर- उड़द दाल, सरसों तेल व राई।
मीन- गुड, गेंहूं, साबूदाना व कंबल।