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ऐसी हैं कुछ हिस्टोरिकल शादियां, किसी ने शादी में लौटाए 31 लाख तो किसी ने लौटाई कार

युवाओं की नई पहल-कैसे बेटी के पिता के माथे से पोंछी जाए चिंता की लकीरें

Bhaskar News | Last Modified - Mar 05, 2018, 05:53 AM IST

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    आकाशसिंह पुत्र गणपतसिंह राजपुरोहित, मुंडारा- पूजा कुंवर पुत्री राजूसिंह रायगुर, भासूंदा

    पाली(जयपुर).लाखों के दहेज, शान-शौकत के दिखावे, नित नई परंपराओं के कारण बढ़ रहे शादी के बजट को कैसे सीमित किया जाए आज कल सबके मन में यही चिंता रहती है। लेकिन पाली के युवाओं की जिद से शादियों की तस्वीर बदल दी है। इसमें कई समाजों का सामूहिक निर्णय है उन्होंने भी माना कि न दहेज लेंगे और न ही देंगे।

    मध्यम वर्गीय परिवार का भी शादी का बजट 20 से 50 लाख पहुंचने लगा था।

    - इस प्रतिस्पर्द्धा में दौड़ लगाते-लगाते कई परिवार हांफ चुके थे।

    - इसीलिए, समाज के संतों और बुजुर्गों ने बीड़ा उठाया।

    - युवाओं को तो मानो इसी घड़ी का इंतजार था। देखते ही देखते उन्होंने शादी समारोहों की तस्वीर बदल दी ।

    राजपुरोहित समाज ने आसोतरा अधिवेशन में लिए दहेज, नशा व मृत्युभोज जैसी कुरीतियों से मुक्ति का सामूहिक निर्णय-

    मारवाड़ संभाग में राजपुरोहित समाज ने सबसे बड़ी पहल की है। संतों की पहल पर आसोतरा धाम में बुलाए अधिवेशन में सामूहिक निर्णय किया कि समाज में दहेज लेना व देना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। शादी सहित किसी भी समारोह में नशे की मनुहार नहीं होगी। यहां तक कि बीड़ी-सिगरेट व तंबाकू का सेवन भी प्रतिबंधित रहेगा। साथ ही मृत्युभोज सहित अन्य कुरीतियों के खिलाफ सब मिलकर खड़े होंगे।

    राजपूत समाज ने भी विभिन्न स्तरों पर यह प्रयास शुरू किया

    क्षेत्रवार सामाजिक संगठनों एवं जिला स्तर युवाओं ने दहेज व नशे के खिलाफ मुहिम छेड़ने की मांग उठाई। मारवाड़ महिला संस्थान के अध्यक्ष नारायणसिंह अाकड़ावास के अनुसार कुछ गांवों में तथा व्यक्तिगत स्तर पर सबने इसकी पहल की। बिना दबाव के स्वैच्छिक पहल बड़े स्तर पर हुई यह अहम बात है। हाल ही जिले में हुई शादियों में बड़ी संख्या में राजपूत युवकों ने न केवल बिना दहेज शादी की बल्कि समारोह को नशे की मनुहार से भी मुक्त रखा। समाज के अन्य लोगों ने भी इस पहल का स्वागत किया।

    मिलणी- समधियों में प्यार व सम्मान बना रहे, इसलिए लेंगे सिर्फ एक रुपया, टीके में अधिकतम ‌1100 रुपए

    काजू, बादाम, अखरोट व केसर की मनुहार सभा- समाज बंद कर रहे हैं सदियों से चल रही मनुहार व सभा की परंपरा को। बारात की मनुहार अमल, अफीम, डोडा व शराब से नहीं करेंगे। बड़ी शादियों में पांच से दस लाख तक खर्च करते आए थे। अब समाजों ने इसे सेहत व मान-सम्मान से जोड़ा है। ताकि कोई नशे में परिवार व समाज का नाम खराब नहीं करें। सरोकार है कि आने वाली पीढ़ी कुरीतियों की बेड़ियों से बंधनमुक्त व कर्जमुक्त रहे।

    अब तक ये समाज ले चुके बदलाव के बड़े फैसले
    राजपुरोहित समाज, राजपूत समाज, अग्रवाल समाज, जैन समाज, मेवाड़ा कलाल समाज, रावत समाज, माली समाज, घांची समाज, रंगरेज समाज।

    जैन समाज ने पहले ही उठा लिया था कदम, शादियों में 11 मिठाइयों से ज्यादा नहीं
    जैन समाज पहले ही शादियों को दहेज व दिखावे से मुक्त करने का फैसला कर चुका है। समाज में हुए निर्णयों के तहत शादी में अधिकतम 11 मिठाई बनाने और दिखावे को बंद करने की परंपरा स्थापित हो चुकी है।

    कंसेप्ट - श्रवण शर्मा

    कंटेंट - जयदीप पुरोहित

    संपादन- मनीष शर्मा

    डिजाइन - प्रेमप्रकाश वैष्णव, अमजद अली

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    पुष्पेंद्रसिंह पुत्र सुमेरसिंह कुंपावत प्रधान (मारवाड़ जंक्शन) रितु कंवर पुत्री राजेंद्रसिंह शेखावत (विजयनगर)
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    मानवेंद्र सिंह पुत्र दुर्गा सिंह उदावत (गिरी मारवाड़), दिव्या कंवर पुत्री दीपेंद्र सिंह, लहकाना खुर्द (जयपुर)
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    महावीर सिंह पुत्र प्रेमसिंह उदावत (देवगढ़ पाली) अनुपमा कंवर पुत्री नरपत सिंह (गांव ऐलानी)
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    अमृतसिंह पुत्र मनरूपसिंह राजपुरोहित (निवासी नेतरा) रीता कंवर पुत्री नरपतसिंह निवासी (भाचूंदा)
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    काजोल पुत्री किशन माली (निवासी मारवाड़ जंक्शन), अश्विन पुत्र चंपालाल माली (निवासी- शिवगंज)
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    प्रकाश सैन पुत्र बाबूलाल (निवासी खारची), सुमन पुत्री बाबूलाल (निवासी सोजत)
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Web Title: Marriages Without Dowry In Rajasthan
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