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दिसंबर में सबसे ज्यादा तारे टूटते हैं, डेढ़ हजार फोटो खींचे; दो टूटते तारे कैमरे में कैद

असल में ये तारे नहीं होते, बल्कि छोटे छोटे आकाशीय पिंड और धूल के बड़े कण होते हैं।

Bhaskar News | Last Modified - Dec 28, 2017, 07:24 AM IST

  • दिसंबर में सबसे ज्यादा तारे टूटते हैं,  डेढ़ हजार फोटो खींचे; दो टूटते तारे कैमरे में कैद
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    पहली बार सिर्फ भास्कर में प्रयोग: दिसंबर में सबसे ज्यादा तारे (उल्कापिंड) टूटते हैं।

    भरतपुर. पहली बार सिर्फ भास्कर में ने रात में 9 घंटे तक डेढ़ हजार फोटो खींचे और दो टूटते तारों (उल्कापिंड) को कैमरे में कैद किया। खगोलविदों के अनुसार दिसंबर के अंतिम पखवाड़े में सबसे ज्यादा तारे टूटते हैं। असल में ये तारे नहीं होते, बल्कि छोटे छोटे आकाशीय पिंड और धूल के बड़े कण होते हैं। यह पिंड पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर जाते हैं। पिंड पृथ्वी के वातावरण में इतनी तेज गति से नीचे की और बढ़ते हैं कि वायुमंडल के कणों से घर्षण के कारण जल जाते हैं। इनके जलने से आकाश में रोशनी की एक रेखा सी उत्पन्न होती है, इसी रोशनी को हम आम भाषा में टूटता तारा कहते हैं।

    - दरअसल, दिसंबर में टूटते तारे ज्यादा इसलिए देखे जाते हैं, क्योंकि इस महीने ये पृथ्वी के बहुत करीब आ जाते हैं और टकराते हैं। लेकिन तारे टूटने का फोटो कैमरे में कैद करना बड़ा ही चुनौतीपूर्ण था। इसमें सबसे पहले कोहरे के कारण मौसम की अड़चन थी।

    - हमने मौसम वैज्ञानिकों से बात की तो उन्होंने बताया कि अभी राजस्थान में रात में सबसे साफ मौसम अलवर के सरिस्का में है। फोटो जर्नालिस्ट ने सरिस्का में एक निजी होटल की छत से शाम 7 बजे से सुबह 4 बजे तक करीब डेढ़ हजार फोटो खींचे। इस दौरान सिर्फ दो फोटो में टूटते तारे के कैद हो पाए, क्योंकि तारे टूटने की गति बहुत तेज होती है, कहां से टूट जाए यह पता नहीं होता।

    - एक घंटे में यहां 57 तारे टूटकर गिरते दिखे तो इसी दिन नैनीताल के पास कोशानी में एक घंटे में 70 तारे गिरते देखे गए।

    - यहां तारों को शूट कर रहे कोशानी इंस्टीट्यूट के छात्र अभिनव सिंघाई ने बताया कि सबसे ज्यादा टूटते तारे 12 से 17 दिसंबर के बीच ही गिरते हैं।

    - जिमिनिड तारे सबसे अधिक सरिस्का के आसपास गिरने की बात वैज्ञानिकों ने पुष्ट की। सात दिसंबर से 17 दिसंबर तक इनकी गिरने की बात सामने आई।

    वर्ष 1908 में गिरा था सबसे बड़ा उल्कापिंड
    - सबसे बड़ा उल्कापिंड वर्ष 1908 में साइबेरिया में तारापूरा स्थान पर गिरा था। इसमें कई हजार वर्ग मीटर एरिया तबाह हुआ था। भारी आर्थिक हानि तक हुई थी। इसे कॉसमॉस फायर नाम दिया गया था।

    तापमान पर निर्भर है तारों का रंग

    - तारे का रंग उसके तापमान निर्भर करता है। सबसे ठंडे तारे का रंग लाल होता है और सबसे गर्म तारे का रंग नीला होता है।

    - तारों का जीवन उसके आकार पर निर्भर करता है जितना बड़ा तारा होगा उसका जीवन उतना ही कम होगा। एक समय में हमें केवल लगभग 3000 तारे ही दिखाई देते हैं।

    - वैज्ञानिकों के मुताबिक ध्रुव तारा सूर्य से 2500 गुना ज्यादा चमकीला है। सुपरनोवा तारा जिसे हम टूटते हुए सितारे के नाम से जानते हैं इसका विस्फ़ोट इतना शक्तिशाली होता है इसमें से एक सेकंड में इतनी उर्जा खपत हो जाती है जितनी के सूर्य सौ वर्षों में करता है।

    ये भी रोचक

    - 25 गुना चमकीला है ध्रुव तारा
    - 3 हजार तारे एक समय में दिखते हैं
    - 12 से 17 दिसंबर के बीच गिरते हैं सर्वाधिक तारे

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