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300 महिलाओं को ऑपरेशन के बाद बेड की जगह जमीन पर ही लिटा दिया

अव्यवस्थाओं का आलम देखिए... दर्द से दिल थरथराने लगे

Danik Bhaskar | Jan 21, 2018, 05:50 AM IST

जयपुर. राजस्थान की लचर स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोलने वाली ये तस्वीरें कोटपूतली के सरकारी बीडीएम अस्पताल की हैं। पिछले तीन दिन में करीब तीन सौ महिलाओं को नसबंदी के साथ-साथ व्यवस्थाओं का दर्द भी झेलना पड़ा है। टारगेट पूरे करने के लिए अस्पताल में चल रहे नसबंदी शिविर में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन को धता बताते हुए महिलाओं को असहनीय दर्द सहने के लिए छोड़ दिया गया।

ऑपरेशन थियेटर से निकलने के बाद उन्हें न तो स्ट्रेचर मिला और ना ही बेड। दर्द से कराहती इन महिलाओं को परिजन हाथ पकड़कर थियेटर से बाहर लाए और फर्श पर लिटा दिया। शिविर के लिए वार्ड से सारे बेड बाहर निकालकर नीचे गद्दे बिछा दिए गए, जिन पर नसबंदी ऑपरेशन के बाद महिलाओं को लाकर लिटा दिया गया।

व्यवस्थाएं इस कदर लचर थी कि ऑपरेशन के बाद एक-एक रजाई में दो महिलाओं को लेटना पड़ा। ऑपरेशन थियेटर में भी कई महिलाएं एक साथ नसबंदी के लिए ले जाई गईं। इस दौरान ये महिलाएं दर्द से कराहती रहीं। ह्युमन राइट्‌स लॉ नेटवर्क की टीम भी शनिवार को बीडीएम अस्पताल पहुंची। टीम के सदस्यों ने अस्पताल प्रशासन को अव्यवस्थाओं के बारे में बताया।

नसबंदी शिविर में महिलाओं को फर्श पर लिटाना और बिना स्ट्रेचर के ऑपरेशन थियेटर से बाहर लाना गलत है। शिविर में यदि लापरवाही हुई है तो कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. नरोत्तम शर्मा, सीएमएचओ प्रथम


हमारी टीम जब बीडीएम अस्पताल पहुंची तो वहां बड़ी संख्या में महिलाएं फर्श पर लेटी हुई दर्द से कराह रही थी। परिजन हाथ पकड़कर उन्हें ऑपरेशन थियेटर से बाहर ला रहे थे।
- डॉ. ताराचंद, प्रतिनिधि ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क

शिविर में इस तरह हुआ गाइडलाइन का उल्लंघन
1. नसबंदी के बाद बेड की जगह महिलाओं को फर्श पर बिस्तर पर लिटा दिया गया।
2. नसबंदी के बाद एक ही रजाई में दो-दो महिलाओं को लिटाया गया।
3. नसबंदी के बाद स्ट्रेचर की जगह महिलाओं को पैदल चलकर वार्ड तक आना पड़ा।
4. नसबंदी के बाद एक गाड़ी में पांच-पांच महिलाओं को भेज दिया गया घर।
5. महिलाआंे को नसबंदी के फायदों और नुकसान के बारे में जानकारी नहीं दी गई।