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तोगड़िया के खिलाफ केस वापस लेने का नया आदेश कोर्ट में पेश, पुराना तीन साल से थाने में ही दबा था

Bhaskar News | Last Modified - Jan 18, 2018, 07:09 AM IST

कर्फ्यू के उल्लंघन का मामला : तोगड़िया की गिरफ्तारी के प्रयास के बाद केस विड्रा करने का हुआ खुलासा
  • तोगड़िया के खिलाफ केस वापस लेने का नया आदेश कोर्ट में पेश, पुराना तीन साल से थाने में ही दबा था
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    15 जनवरी को गंगापुर पुलिस अहमदाबाद गई थी तोगड़िया को गिरफ्तार करने। तोगड़िया गायब हुए, फिर अस्पताल में मिले, उनकी तबीयत खराब थी। - फाइल

    गंगापुर सिटी/जयपुर. कर्फ्यू और निषेधाज्ञा के उल्लंघन के मामले में विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. प्रवीण भाई तोगड़िया सहित 17 आरोपियों के खिलाफ चल रहे केस को वापस लेने का सरकार का आदेश बुधवार को न्यायालय में पेश कर दिया गया। सहायक अभियोजन अधिकारी कुलदीप बरोलिया ने ये आदेश न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या 2 की अदालत में पेश किए।

    - दरअसल यह आदेश गंगापुर थाने में ही पड़ा था जो किसी कारण कोर्ट में पेश नहीं किया गया। सरकार के गृह विभाग की ओर से जारी आदेश बुधवार को कलेक्टर के दफ्तर में हस्ताक्षर के इंतजार में रखे रहे, देर शाम कलेक्टर जब कार्यालय पहुंचे तो उन्होंने तत्काल हस्ताक्षर किए और इस आदेश को गंगापुर के लिए रवाना किया गया। यह आदेश अब गुरुवार को अदालत में पेश होगा।

    - भास्कर ने इस मामले का खुलासा किया कि जिस मामले में गंगापुर पुलिस विहिप नेता तोगड़िया को गिरफ्तार करने अहमदाबाद गई थी, उस मामले को सरकार विड्रा करने का आदेश जारी कर चुकी है।

    -इसके बाद अधिकारियों ने बुधवार को पुराने दस्तावेज खंगाले, अधिकारियों ने अपने मातहतों के साथ बैठकें की और सरकार के 2015 के आदेश खोजने की कवायद शुरू हुई। आखिरकार 2015 को जारी आदेश की प्रति मिल गई।

    - गंगापुर सिटी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेंद्र फौजदार ने बताया कि यह बात सही है कि सरकार का आदेश गंगापुर थाने पर प्राप्त हो गया था लेकिन किन कारणों से यह आदेश करीब तीन साल तक पड़ा रहा और किस स्तर पर इसमें लापरवाही रही इसकी जांच एसपी के निर्देश पर मैं खुद कर रहा हूं, जल्द ही जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

    मामले में अब तक क्या हुआ
    पुलिस की अंतिम रिपोर्ट, फिर परिवाद और केस विड्रा की पूरी कहानी

    अब कलेक्टर की ओर से आज पेश होगा केस विड्रा का आदेश
    - सीआरपीसी की धारा 195 (2) के अनुसार किसी भी परिवाद को वापस लेने का अधिकार उसी अधिकारी को है जिसने यह परिवाद पेश किया है, उस अधिकारी का उच्चाधिकारी भी परिवाद को वापस ले सकता है। चूंकि इस मामले में परिवाद तत्कालीन एसडीएम विकास भाले ने न्यायालय में पेश किया था, इसलिए धारा के अनुसार एसडीएम के उच्चाधिकारी कलेक्टर के जरिए सरकार का आदेश न्यायालय में पेश किया जाएगा।

    - सरकार के गृह विभाग की ओर से जारी आदेश बुधवार को कलेक्टर के दफ्तर में हस्ताक्षर के इंतजार में रखे रहे, देर शाम कलेक्टर जब कार्यालय पहुंचे तो उन्होंने तत्काल हस्ताक्षर किए और इन आदेशों को गंगापुर के लिए रवाना किया गया। चूंकि तब तक अदालत का समय पूरा हो चुका था, लिहाजा अब गुरुवार को ही कलेक्टर की ओर से सरकारी आदेश अदालत में पेश होंगे।

    फायरिंग में तीन की मौत के बाद तोगड़िया ने की थी आमसभा
    - मामला 25 मार्च 2002 की घटना से जुड़ा हुआ है। इस दिन मोहर्रम का जुलूस निकलना प्रस्तावित था। जुलूस के रास्ते में कुछ हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता यज्ञ हवन और रामधुनि कर रहे थे।

    - इस दौरान पुलिस ने बलपूर्वक कार्यकर्ताओं को सड़क से हटाया तो दोनों के बीच झड़प हो गई। इसमें तीन की मौत हो गई थी। हालात काबू करने के लिए पुलिस को कर्फ्यू लगाना पड़ा।

    - कर्फ्यू के दौरान 3 अप्रैल 2002 को गंगापुर पहुंचे। डा. तोगडिय़ा के गंगापुर पहुंचने पर लोग घरों से बाहर निकल आए, इसके बाद तोगडिय़ा ने रोडवेज बस स्टैंड के पास एक मैरिज होम में सभा को संबोधित किया।

    गिरफ्तारी के प्रयास, सरकार पर भी आरोप
    - 15 जनवरी को गंगापुर पुलिस अहमदाबाद गई थी तोगड़िया को गिरफ्तार करने। तोगड़िया गायब हुए, फिर अस्पताल में मिले, उनकी तबीयत खराब थी।
    - 16 जनवरी को तोगड़िया ने आरोप लगाया कि राजस्थान सरकार उनका एनकाउंटर करना चाहती है।

    अंतिम रिपोर्ट क्यों

    - जिसके आदेश से कर्फ्यू लगा, उसने दर्ज नहीं कराया केस तोगड़िया सहित 17 जनों के खिलाफ यह मामला तत्कालीन पुलिस अधिकारियों ने दर्ज किया था लेकिन कानून के अनुसार निषेधाज्ञा उल्लंघन का मामला वही अधिकारी दर्ज करा सकता है जिसके द्वारा निषेधाज्ञा लगाने का आदेश जारी किया है। ऐसे में पुलिस को इस मामले में तथ्य की भूल मानते हुए एफआर लगानी पड़ी।

    परिवाद क्यों : गलती सुधारने के लिए दुबारा कोर्ट तक पहुंचा केस
    - बाद में गंगापुर में उस समय एसडीएम रहे विकास भाले की तरफ से न्यायालय में परिवाद पेश किया गया जिस पर प्रसंज्ञान लेते हुए न्यायालय ने केस दर्ज किया।

    थाने में ही क्यों अटके रहे आदेश, दोबारा भेजा पत्र
    - राज्य सरकार के गृह विभाग (ग्रुप 10) के पत्रांक प.13 (220)/गृह-10/2014 का यह आदेश गृह विभाग ने 9 जून 2015 को जारी किया था। यह आदेश कलेक्टर के जरिए जिला पुलिस अधीक्षक को भिजवाया गया था।

    - पुलिस अधीक्षक ने इस आदेश को न्यायालय में पेश करने की टिप्पणी के साथ कोतवाली थाने पर भिजवाया था, लेकिन तीन साल से ये आदेश गंगापुर थाने पर ही पड़े रहे। किसी ने इन आदेशों पर ध्यान नहीं दिया।

    - सरकार के केस वापस लेने के फैसले के बावजूद गंगापुर पुलिस इस मामले में तोगड़िया को गिरफ्तार करने अहमदाबाद पहुंच गई थी।

  • तोगड़िया के खिलाफ केस वापस लेने का नया आदेश कोर्ट में पेश, पुराना तीन साल से थाने में ही दबा था
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    16 जनवरी को तोगड़िया ने आरोप लगाया कि राजस्थान सरकार उनका एनकाउंटर करना चाहती है। - फाइल
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