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ये कैसा इंसाफ? 3 दमकलकर्मी निलंबित, पर असल जिम्मेदारों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं

विद्याधर नगर अग्निकांड में 5 मौतों का असल जिम्मेदार कौन?

मदन कलाल | Last Modified - Jan 19, 2018, 04:57 AM IST

  • ये कैसा इंसाफ? 3 दमकलकर्मी निलंबित, पर असल जिम्मेदारों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं
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    शिप्रा शर्मा, आयुक्त, फायर

    जयपुर. विद्याधर नगर में लगी आग में पांच जिंदगियों को लीलने वाले अग्निकांड की हर पड़ताल में असली गुनहगार के तौर पर शहर के बेदम दमकल बेड़े का चेहरा ही सामने आ रहा है। माना जा रहा है कि अगर हमारा फायर फाइटिंग सिस्टम मजबूत होता और लापरवाही नहीं बरती गई होती तो इन जानों को बचाया जा सकता था।

    यूं हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए तीन फायरमैन को निलंबित कर दिया गया। फिर भी असली सवाल यही है कि ये दमकलकर्मी लापरवाही के दोषी तो हो सकते हैं लेकिन शहर के अग्निशमन बेड़े की बेहाल हालत के लिए असल जिम्मेदार आखिर कौन हैं और उनकी जबावदेही कौन तय करेगा? सच तो यह है कि फायर ब्रिगेड बेडे को 24 घंटे दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी जिन लोगों पर है, वे सिर्फ बयान और आगे के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने जैसी बातों का हवाला देकर ही बच रहे हैं।


    मकर संक्रांति से एक दिन पहले शहर को हिला देने वाले इस हादसे पर भास्कर ने विशेषज्ञों से बातचीत कर जाना कि आखिर ऐसे हादसों के मूल के पीछे की बड़ी वजह और जिम्मेदारी किन लोगों की हैं। सामने आया कि फायर ब्रिगेड में संसाधनों की कमी, बजट का भारी अभाव, अनट्रेंड कर्मचारी, हालात से निबटने के लिए प्रॉपर ट्रेनिंग के इंतजाम नहीं होने के लिए सबसे बड़े जिम्मेदार ऊपरी तंत्र ही है।

    नगर निगम मुखिया होने के नाते महापौर अशोक लाहोटी, आयुक्त रवि जैन, उपायुक्त फायर शिप्रा शर्मा और सीएफओ की जिम्मेदारी संभाल रहे जलज घसिया की इसमें अहम भूमिका नजर आई है।


    हैरत की बात तो यह है कि भास्कर ने जब सभी से अपनी जिम्मेदारी को लेकर सवाल किए तो वे अपना पल्ला झाड़ते हुए कन्नी काटने लग गए। वे इसके लिए एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आए। सबसे बड़ी चूक यह है कि सरकारी लेटलतीफी की वजह से मुख्य अग्निशमन अधिकारी का पद एक साल से खाली चल रहा है और यह पद भार कार्यवाहक रूप से एएफओ के जिम्मे है।

    1. अशोक लाहोटी, महापौर

    जिम्मेदारी क्या?
    निगम के मुखिया होने के नाते फायर ब्रिगेड जैसी अति-संवेदनशील शाखा की पूरी जिम्मेदारी है इनकी। फायर ब्रिगेड के पास रेस्क्यू टेंडर सहित अन्य संसाधन नहीं हैं तो इसके लिए आपदा प्रबंधन विभाग, राज्य सरकार, केंद्र सरकार से मदद लेकर हर संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए। हादसों पर हादसों के बावजूद अनट्रेंड कर्मचारियों का लगातार लिया जा रहा है सहारा। जरूरत के मुताबिक नियमित भर्तियां होनी चाहिए।

    चूक कहां
    लाहोटी ठोस इंतजाम में नाकाम रहे। एक साल से स्थायी सीएफओ की नियुक्ति तक नहीं करवा पाए। वीकेआई में लाखों की लागत से खरीदे गए नए चैसिस कबाड़ बन गए, लेकिन फायर ब्रिगेड गाड़ी की असल शक्ल नहीं ले पाए।

    जिम्मेदारी से ऐसे बचे
    लाहोटी ने सफाई में कहा- यह ऐसा हादसा है जिसमें किसे जिम्मेदार ठहराया जाए? सवेरे तीन-चार बजे कोई घटना घट जाए, ऑटोमेटिक ताले लॉक हो गए। ऐसा नहीं कि फायर ब्रिगेड ने कोशिश नहीं की। संसाधन बढ़ाने की कोशिश जारी है।

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    अशोक लाहोटी, महापौर

    जिम्मेदारी क्या?
    निगम के मुखिया होने के नाते फायर ब्रिगेड जैसी अति-संवेदनशील शाखा की पूरी जिम्मेदारी है इनकी। फायर ब्रिगेड के पास रेस्क्यू टेंडर सहित अन्य संसाधन नहीं हैं तो इसके लिए आपदा प्रबंधन विभाग, राज्य सरकार, केंद्र सरकार से मदद लेकर हर संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए। हादसों पर हादसों के बावजूद अनट्रेंड कर्मचारियों का लगातार लिया जा रहा है सहारा। जरूरत के मुताबिक नियमित भर्तियां होनी चाहिए।


    चूक कहां
    लाहोटी ठोस इंतजाम में नाकाम रहे। एक साल से स्थायी सीएफओ की नियुक्ति तक नहीं करवा पाए। वीकेआई में लाखों की लागत से खरीदे गए नए चैसिस कबाड़ बन गए, लेकिन फायर ब्रिगेड गाड़ी की असल शक्ल नहीं ले पाए।


    जिम्मेदारी से ऐसे बचे
    लाहोटी ने सफाई में कहा- यह ऐसा हादसा है जिसमें किसे जिम्मेदार ठहराया जाए? सवेरे तीन-चार बजे कोई घटना घट जाए, ऑटोमेटिक ताले लॉक हो गए। ऐसा नहीं कि फायर ब्रिगेड ने कोशिश नहीं की। संसाधन बढ़ाने की कोशिश जारी है।

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    जलज घसिया, सीएफओ

    जिम्मेदारी क्या?
    दमकल बेड़े की कमियों को उच्चाधिकारियों को बताना और उन्हें दूर कराने के प्रयास करने थे। हादसे की सूचना मिलते ही बेड़े के साथ इन्हें मौके पर पहुंचना था। यदि ऐसा होता तो निश्चित ही फायरमैन ज्यादा मुस्तैदी के साथ जुट पाते। आम तौर पर सीएफओ किसी भी अग्निकांड का फीडबैक फोन, वायरलैस पर ही लिया करते हैं।


    चूक कहां
    हादसे के एक घंटे बाद 5.40 पर मौके पर पहुंचे। सीएफओ के जिम्मेदार पद पर होने के चलते इन्हें अपने बेडे की कमियां दूर करने के लिए लगातार कोशिश करनी चाहिए थीं। फायर फाइटिंग के संसाधनों को पूरी तरह से लैस नहीं कर पाए। साथ ही इसके लिए किसी भी तरह के कोई प्रयास भी नजर नहीं आए।


    जिम्मेदारी से ऐसे बचे
    भास्कर के सवाल के जवाब में जलज ने कहा- मैं अब भी कहता हूं हमारा फायर ब्रिगेड दस्ता समय पर पहुंच गया। संसाधन, बजट जरूर आवश्यकता के मुताबिक नहीं है। यह ऊपर के स्तर पर तय होते है। मैं जो भी कर सकता था किया।

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    रवि जैन, आयुक्त

    जिम्मेदारी क्या?
    आयुक्त होने के नाते निगम की पूरी प्रशासनिक जिम्मेदारी। जैन पुख्ता तौर पर यह तय नहीं कर पाए कि फायर ब्रिगेड बेड़ा किसी भी हादसे से निबटने में पूरी तरह सक्षम है या नहीं। स्थायी सीएफओ, खाली पदों, संसाधनों के लिए बजट उपलब्ध करवाने में लापरवाही साफ तौर पर नजर आ रही है। दमकल बेड़े को हर स्तर की अग्नि दुर्घटना के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी इनकी ही है।


    चूक कहां
    दमकल बेड़े में उपकरणों और संसाधनों की कमी को पूरा करने के लिए कोई प्रयास नहीं किए। जेडीए से सेस का 35 करोड़ नहीं ला सके। मॉनीटरिंग में कमी। हादसे के 6 घंटे बाद मौके पर पहुंचे। यदि समय पर मौके पर पहुंचते तो बेहतर दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते थे।


    जिम्मेदारी से ऐसे बचे
    भास्कर ने हादसे में जिम्मेदारी से जुड़ा सवाल पूछा तो प्रश्न सुनते ही फोन होल्ड पर रख दिया। दूसरे फोन पर किसी और से बात करने लगे। कुछ देर बाद अचानक ही फोन काट दिया। इसके बाद बार-बार फोन करने पर भी उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।

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Web Title: No Action Against Actual Responsible Jaipur Fire Incident
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