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रॉयल ट्रेनों में अधिकारियों को कराई 1 करोड़ से ज्यादा की फ्री यात्रा

संसदीय कमेटी ने कहा, रॉयल ट्रेनों में आधी ही भर रही हैं सीटें तो कॉम्प्लीमेंट्री ट्रैवल के नाम पर जनता के पैसे की बर्बाद

Danik Bhaskar | Jan 09, 2018, 03:57 AM IST

जयपुर. पावणों को रॉयल अहसास दिलाने के लिए शुरू की गईं रॉयल ट्रेनों का अफसर अपने कॉम्प्लीमेंट्री ट्रैवल में ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। पिछले 6 साल में रेलवे के 282 अधिकारियों ने राजस्थान टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के तहत आने वाली पैलेस ऑन व्हील और रॉयल राजस्थान ऑन व्हील में 1 करोड़ 43 हजार 823 रुपए की कॉम्प्लीमेंट्री ट्रैवल सिस्टम के जरिए यात्रा कर लीं। यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है संसदीय कमेटी की ‘टूरिज्म प्रमोशन एंड पिल्ग्रमिज सर्किट’ रिपोर्ट में जो 4 जनवरी को लोकसभा और राज्यसभा में पेश की गई।


कमेटी ने इन ट्रेनों में दी जाने वाली कॉम्प्लीमेंट्री ट्रैवल सुविधा को खत्म करने की सिफारिश भी की है और कहा है, ‘कमेटी यह समझने में फेल रही कि जब ये लग्जरी ट्रेनेें अपने खर्चे भी नहीं निकाल पा रही, ऐसे में कॉम्प्लीमेंट्री ट्रैवल की इन ट्रेनों में क्या जरूरत है? कमेटी ने कहा, सार्वजनिक इकाई के रूप में किसी को यह अधिकार नहीं है कि वे टैक्स पेयर्स के पैसे को कुछ लोगों को इन लग्जरी ट्रेनों में कॉम्प्लीमेंट्री यात्रा के नाम पर एडवांस में दे दें।

लाभ-हानि का कोई हिसाब नहीं, हर साल घट रही रॉयल ट्रेनों की कमाई
कमेटी ने कहा, रेलवे इन ट्रेनों पर खर्च होने वाली राशि का ब्योरा नहीं रखता। ऐसे में हमें यह समझ नहीं आ रहा है कि रेलवे इन ट्रेनों से होने वाले लाभ-हानि का हिसाब कैसे रखता है? पैलेस ऑन व्हील्स और रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स का रेवेन्यू हर साल कम हो रहा है। 2012-13 में पैलेस ऑन व्हील्स ने 35.33 करोड़ कमाए, 2013-14 में 38.33, 2014-15 में 35.71, 2015-16 में 33.47 और 2016-17 में सिर्फ 27.11 करोड़ रुपए ही कमाए। यानी 5 साल में 170.45 करोड़ लेकिन इसमें 95.44 करोड़ रुपए रेलवे का शेयर था। इसी तरह रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स ने 2012-13 में 17.77 करोड़ कमाए 2013-14 में 14.07, 2014-15 में 16.19, 2015-16 में 10.56 और 2016-17 में सिर्फ 5.96 करोड़ रुपए ही कमाए। कुल कमाई 64.55 करोड़ रही, इसमें से हॉलिज चार्ज 42.47 करोड़ यानी 65.79% था।

5 साल में दोनों ट्रेनों की 55% सीटें खाली रहीं
राॅयल ट्रेनों में पिछले 6 साल में 282 अधिकारियों ने 1 करोड़ रुपए से अधिक की कॉम्प्लीमेंट्री ट्रेवल के जरिए यात्रा की। जबकि पैलेस ऑन व्हील्स में ही 2012-13 से 2016-17 के बीच 54.19% सीट भरी गई और 45.06% सीटें खाली यानी बिना सवारी के ही रही। वहीं, रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स का हाल इससे भी ज्यादा बुरा रहा। इस दौरान ट्रेन में 57.76% सीटें खाली रही जबकि 42.91% सीटों पर ही यात्री मिल सके।

5 साल में दोनों ट्रेनों की 55% सीटें खाली रहीं
राॅयल ट्रेनों में पिछले 6 साल में 282 अधिकारियों ने 1 करोड़ रुपए से अधिक की कॉम्प्लीमेंट्री ट्रेवल के जरिए यात्रा की। जबकि पैलेस ऑन व्हील्स में ही 2012-13 से 2016-17 के बीच 54.19% सीट भरी गई और 45.06% सीटें खाली यानी बिना सवारी के ही रही। वहीं, रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स का हाल इससे भी ज्यादा बुरा रहा। इस दौरान ट्रेन में 57.76% सीटें खाली रही जबकि 42.91% सीटों पर ही यात्री मिल सके।