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जानिए, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद राजस्थान से क्यों दूर रहेगी ‘पद्मावत’

पद्मावत और पर्दे में दूरी... क्योंकि बीच में सियासत... 60 लाख राजपूत, 27 विधायक, 4 सांसद व पूर्व राजघराने

बाबूलाल शर्मा | Last Modified - Jan 24, 2018, 03:11 AM IST

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    सुप्रीम कोर्ट ने पद्मावत पर बैन की याचिका खारिज की। - फाइल

    जयपुर. फिल्म पद्मावत के मामले में राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को फिर झटका दिया। इसकी रिलीज पर बैन लगाने को लेकर दायर की गई पुनर्विचार याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी। कहा- 18 जनवरी के आदेश में कोई बदलाव नहीं होगा। यानी फिल्म सभी राज्यों में 25 जनवरी को रिलीज हो सकेगी। भले ही कोर्ट ने इसकी रिलीज का आदेश जारी कर दिया, लेकिन राजस्थान में पद्मावत फिल्म का प्रदर्शन होने की संभावना न के बराबर है। भास्कर ने फिल्म पर मचे बवाल के बीच पर्दे के पीछे का सच तलाशा तो कई तथ्य सामने आए। दरअसल, इस फिल्म को लेकर सबसे ज्यादा आक्रोश राजपूत समाज में है। इस समाज का पूरे राजस्थान में दबदबा है। भाजपा और कांग्रेस भी सियासी गणित को देखते हुए राजपूतों के साथ खड़ी हैं। ऐसे में वितरक और सिनेमाघरों के मालिक भी इसे दिखाने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। पढ़िए, पद्मावत और परदे के बीच की दूरी की असल वजह...

    करणी सेना के आगे इसलिए बेबस हैं भाजपा-कांग्रेस

    - राजस्थान में अभी दो लोकसभा सीटों और एक विधानसभा सीट पर उपचुनाव है। कुछ महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने हैं।

    - इतनी बड़ी आबादी से जुड़े इस मुद्दे को न तो भाजपा नजरअंदाज करना चाहती है न ही कांग्रेस। यही कारण है कि सियासी बल रखने वाले इस समाज के आगे दोनों प्रमुख दलों को भी झुकना पड़ा।

    - सरकार को सुप्रीम कोर्ट में फिल्म पर रोक लगाने के लिए याचिका लगानी पड़ी। हालांकि, सरकार को दोनों बार सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिल पाई।

    - समाज के आक्रोश और संभावित तोड़फोड़ से डर कर फिल्म वितरकों और ज्यादातर सिनेमा मालिकों ने फिल्म दिखाने से हाथ खींच लिए।

    60 लाख से ज्यादा है आबादी

    - जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, जालौर, चूरू, नागौर, झुंझुनू, सीकर, बीकानेर, अजमेर में बहुलता। भीलवाड़ा, चित्तौड़, पाली, उदयपुर में भी प्रभाव।

    27 राजपूत विधायकों में 4 मंत्री और एक विधानसभा उपाध्यक्ष भी हैं

    सिद्धि कुमारी, भंवर सिंह भाटी, सुशील कंवर, मनोहर सिंह, मान सिंह, मनोज न्यांगली, बाबू सिंह, छोटूसिंह, शैतान सिंह, मानवेंद्र सिंह, राव राजेंद्र सिंह, नरपतसिंह राजवी, रणधीर सिंह, चंद्रभान सिंह, सुरेंद्र सिंह राठौड़, कल्याण सिंह, दिया कुमारी, हमीर सिंह भायल, भवानी सिंह राजावत, प्रेमसिंह बाजौर, गिरिराज सिंह।
    मंत्री:राजेंद्र राठौड़, राजपाल सिंह, गजेंद्रसिंह व पुष्पेंद्र सिंह।
    विधानसभा उपाध्यक्ष:राव राजेंद्र सिंह।

    03 सांसद लोकसभा में एक राज्यसभा में। दो केंद्रीय मंत्री।
    - लोकसभा में राज्यवर्धन सिंह राठौड़, गजेंद्र सिंह शेखावत, हरिओम सिंह। राज्यसभा में राजस्थान से एक राजपूत सांसद हर्षवर्धन सिंह।

    - 14 प्रमुख पूर्व राजघराने राजस्थान में हैसियत रखते हैं। प्रदेश में सबसे बड़ा पूर्व राजघराना मेवाड़ को माना जाता है। रियासतकाल के दौरान इसके अधीन वर्तमान के आठ जिले आते थे।

    - प्रमुख पूर्व राजपरिवारों में जोधपुर, बीकानेर, कोटा, बूंदी, उदयपुर, जयपुर, सवाईमाधाेपुर, जैसलमेर, झालावाड़, अलवर, करौली, किशनगढ़, नागौर शामिल हैं।

    - इनके अलावा प्रदेश में कई छोटे-बड़े पूर्व राजघराने और ठिकानेदार भी रहे।

    सुप्रीम कोर्ट: कुछ लोग व्यवस्था बिगाड़ें, मंजूर नहीं

    चीफ जस्टिस ने कहा- बैन लगवाने के लिए कुछ लोग सड़क पर उतरें, व्यवस्था बिगड़ने के हालात पैदा करें, मंजूर नहीं है। राज्यों को छूट दी कि हालात के आधार पर फिर अपील कर सकते हैं।

    समाज: कोर्ट ने भावनाओं का सम्मान नहीं किया

    - करणी सेना के प्रमुख लोकेंद्र सिंह कालवी ने कहा कि कोर्ट ने भावनाओं का सम्मान नहीं किया। जनता कर्फ्यू लगाकर फैसला करेगी। 1900 से ज्यादा महिलाएं जौहर को तैयार हैं।

    सरकार : कोई रास्ता नहीं बचा, कोर्ट के आदेश मानेंगे

    - गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब दूसरा रास्ता नहीं है। हमें कानून का पालन करना होगा। सीएस ने गृह विभाग और पुलिस अफसरों के साथ मीटिंग की।

    ...और सिनेमाघर: वितरण और प्रदर्शन से इनकार

    मरुधर साइन एंटरटेनमेंट व यशराज जय पिक्चर्स ने प्रदेश में फिल्म के वितरण से इनकार कर दिया है। सिनेमाहॉल संचालक भी इसे नहीं दिखाने का आश्वासन पहले ही दे चुके हैं।

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    अहमदाबाद के 4 मॉल में तोड़फोड़। - फाइल
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Web Title: Padmavat Will Stay Away From Rajasthan Despite Supreme Court Order
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