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इन क्षत्राणियों ने रखा मेवाड़ का मान, बर्दाश्त नहीं इनका अपमान

पद्मिनी ही नहीं इन क्षत्राणियों ने भी मेवाड़ का मान रखा है इसलिए इनका अपमान बर्दाश्त नहीं होगा...

Danik Bhaskar | Jan 25, 2018, 07:05 AM IST
हाड़ी रानी (अदर कंवर) हाड़ी रानी (अदर कंवर)
उदयुपर. राजस्थान में करणी सेना, बीजेपी लीडर्स और हिंदूवादी संगठनों ने इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। राजपूत करणी सेना का मानना है कि ​इस फिल्म में महारानी पद्मिनी और खिलजी के बीच सीन फिल्माए जाने से उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची है। गौरतलब है कि मेवाड़ की आन पद्मिनी को लेकर राजपूत समुदाय काफी आस्था रखता है। पद्मिनी ही नहीं इन क्षत्राणियों ने भी मेवाड़ का मान रखा है इसलिए इनका अपमान बर्दाश्त नहीं होगा...
रानी पद्मिनी रानी पद्मिनी

बलिदान : सन 1303 में अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ आक्रमण किया। 8 माह तक चित्तौड़ को घेर रखा। खिलजी और रावल रतनसिंह के बीच भीषण युद्ध हुआ, जिसमें रतनसिंह वीरगति को प्राप्त हुए। ऐसे में दुर्ग में रानी पद्मिनी ने मेवाड़ की करीब 16,000 स्त्रियों के साथ जौहर किया।

 

जन्म : 1285
जन्म स्थल : जैसलमेर, पूगल प्रदेश
मृत्यु : 1303
पति : रावल रतनसिंह
पिता : पूणपाल
उम्र : 18 साल

पन्नाधाय पन्नाधाय

बलिदान :  राणा उदयपुर की धाय मां थीं, जो राणा उदयसिंह को पाल रही थीं। उसी समय राणा सांगा के दासी पुत्र बनवीर ने सत्ता हथियाने के लिए महाराणा विक्रमादित्य और उदयसिंह को मारने के प्रयास किए, जिसमें विक्रमादित्य मारा गया। लेकिन, मां पन्ना ने अपने बेटे चंदन का बलिदान देकर उदयसिंह को बचा लिया था।

कर्णावती (कर्मावती) कर्णावती (कर्मावती)

बलिदान :  बहादुर शाह ने मार्च 1535 में चित्तौड़ पर आक्रमण कर दिया था। कर्णावती बड़े बेटे विक्रमादित्य की संरक्षिका बन  मेवाड़ की कमान संभाल रही थीं, क्योंकि राणा सांगा 1527 के खानवा युद्ध के बाद वीरगति को प्राप्त हो गए थे। 8 मार्च 1535 के युद्ध की प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए अपने दोनों बेटों को बूंदी भेज दिया था। कर्णावती ने ही ं पन्नाधाय को उदयसिंह की रक्षा के नियुक्त किया था। किवदंती यह भी है कि उन्होंने हुमायूं को राखी भेजकर मदद मांगी, लेकिन हुमायूं जब तक चित्तौड़ पहुंचा तब तक कर्णावती जौहर कर चुकी थीं।

 

जन्म : बूंदी 
मृत्यु : 8 मार्च 1535, चित्तौड़ जौहर
पति : राणा सांगा 
पिता : बूंदी नरेश राव नरवद  

जयवंता बाई (जीवंत कंवर) जयवंता बाई (जीवंत कंवर)

बलिदान : महाराणा उदयसिंह की 20 रानियों से संतानें तो 45 थीं, लेकिन मां जयवंता बाई के त्याग के कारण ही प्रताप आगे जाकर प्रतापी महाराणा बने। इतिहास में प्रश्न उठता है कि प्रताप ही वीर शिरोमणि क्यों रहे?ω उन्होंने ही जीत से ज्यादा सिद्धांतों और मूल्यों को क्यों मानाω? इन सभी सवालों का एक ही जवाब है- मां जयवंता बाई की शिक्षा। घुड़सवार जयवंता बाई ने प्रताप को बेहतरीन अश्वारोही शूरवीर बनाया। मां के संस्कार ही प्रताप को दुनिया के समस्त शासकों से अलग करते हैं।

 

जन्म : जालौर 
पति : महाराणा उदयसिंह
बेटा : महाराणा प्रताप
पिता : जालौर के राजा अखेराजसिंह सोनगरा।