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संसदीय सचिव अयोग्य हों तो प्रदेश में भले ही फर्क न पड़े, लेकिन गिर जाएंगी 8 राज्यों की सरकार

भास्कर ने पड़ताल की तो सामने आए राेचक तथ्य

आनंद चौधरी | Last Modified - Jan 25, 2018, 05:26 AM IST

  • संसदीय सचिव अयोग्य हों तो प्रदेश में भले ही फर्क न पड़े, लेकिन गिर जाएंगी 8 राज्यों की सरकार
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    जयपुर. लाभ के पद मामले में आप के 20 विधायकों को अयोग्य करार किए जाने का चाहे दिल्ली सरकार पर कोई असर न हुआ हो लेकिन यदि देशभर के संसदीय सचिवों को इस दायरे में रखकर अयोग्य ठहराया जाता है तो 8 राज्यों में भाजपा, कांग्रेस व अन्य दलों की सरकारें गिर जाएंगी। राजस्थान में भी 10 संसदीय सचिव हैं और इस पद को लेकर अलग कानून भी है। फिर भी इन्हें अयोग्य ठहराए जाने का बंपर बहुमत वाली वसुंधराराजे सरकार पर कोई असर नहीं होगा। हालांकि, 14 नवंबर 2017 को राजस्थान हाईकोर्ट ने संसदीय सचिवों की नियुक्ति के मामले में राज्य सरकार से जवाब-तलब किया था।

    - राजस्थान में संसदीय सचिवों की नियुक्ति का मामला नया नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री मोहन लाल सुखाडिय़ा ने सबसे पहले अपने कार्यकाल में संसदीय सचिव नियुक्त किए थे।

    - उस समय मंत्रीमंडल की कोई निश्चित सीमा निर्धारित नहीं थी। इसके बाद मुख्यमंत्री वसुंधराराजे ने पहले कार्यकाल में भवानी सिंह राजावत और ओम बिड़ला को संसदीय सचिव बनाया।

    - राजे ने मौजूदा कार्यकाल में लादूराम विश्नोई, सुरेश रावत, डॉ. विश्वनाथ मेघवाल, जितेन्द्र गोठवाल, भैराराम चौधरी, नरेन्द्र नागर, भीमा भाई, ओमप्रकाश हुड़ला, कैलाश वर्मा व शत्रुघ्न गौतम को संसदीय सचिव बनाया है।

    कोर्ट से बार-बार फटकार फिर भी होती रही है नियुक्ति
    26 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार के 2004 के कानून को रद्द करते हुए संसदीय सचिव पद पर नियुक्ति को असंवैधानिक करार दिया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी संसदीय सचिवों के कामकाज पर रोक लगा रखी है। बावजूद इसके सरकार उन्हें 83 हजार रुपए वेतन और मंत्रियों के समक्ष सुविधाएं दे रही है। यहां विधानसभा में संसदीय सचिव प्रश्नों के उत्तर भी देते हैं। 18 जुलाई 2017 को पंजाब-हरियाणा में संसदीय सचिवों की नियुक्ति को अवैध करार दिया गया। कर्नाटक में जहां इनकी नियुक्ति को कोर्ट में चुनौती दी गई है, वहीं तेलंगाना में हाईकोर्ट ने इस पर स्टे लगा रखा है।

    गहलोत ने बनाए थे 13 संसदीय सचिव
    अशोक गहलोत ने दूसरे कार्यकाल में बसपा से जोड़-तोड़ और निर्दलीयों के साथ मिलकर 13 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया।

    पूर्व पीएम भी रह चुके हैं संसदीय सचिव
    देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह आजादी से पहले से संसदीय सचिव रह चुके हैं। वे 1946 में वे यूपी के संसदीय सचिव रहे थे।

    राजस्थान में संसदीय सचिव लाभ के पद की श्रेणी में ही आते हैं। सरकार उन्हें राज्यमंत्रियों के समान सुविधाएं देती है। दिल्ली में तो उन्हें यह दर्जा भी नहीं दिया गया था।
    -सुमित्रा सिंह, पूर्व विधानसभाध्यक्ष


    असम में संसदीय सचिवों की नियुक्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश दिया था कि संसदीय सचिवों की नियुक्ति विधानसभा के क्षेत्राधिकार से बाहर है। संसदीय सचिवों की नियुक्ति का जो कानून दिल्ली में गलत है वह राजस्थान में सही कैसे हो सकता है।
    -जैसा भाजपा विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने विधानसभा में कहा

    ये 8 सरकारें आएंगी संकट में

    - देश में संसदीय सचिवों की सदस्यता रद्द होने पर पुडुचेरी, कर्नाटक, मेघालय, व अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस, छत्तीसगढ़, हरियाणा और मणिपुर में भाजपा तथा नागालैंड में नागा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) व सिक्किम में सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) की सरकार अल्पमत में आ जाए।

    - इस समय नागालैंड में सबसे ज्यादा 26 संसदीय सचिव कार्यरत हैं। 60 सीटों वाली नागालैंड विधानसभा में एनपीएफ ने 26 संसदीय सचिव बना रखे हैं।

    - इनकी सदस्यता खत्म होने पर वहां एनपीएफ अल्पमत में आ जाए। इसी तरह 32 सीटों वाली सिक्किम विधानसभा में एसडीएफ के पास 22 सीटें हैं तथा वहां 11 संसदीय सचिव कार्यरत हैं।

    - इनकी सदस्यता जाने पर एसडीएफ के पास सिर्फ 11 विधायक शेष रह जाएंगे।

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Web Title: Parliamentary Secretary Ineligible Row
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