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16 डिग्री पारा के बीच खुले टैंट में ओपीडी, डॉक्टरों का यह विरोध; मरीजों की सजा

सरकार VS डॉक्टर: एक महीने से दोनों में गतिरोध 10 दिनों से अस्पतालों में नहीं डॉक्टर टैंटों में लगा रहे ओपीडी

संदीप शर्मा | Last Modified - Dec 14, 2017, 05:32 AM IST

  • 16 डिग्री पारा के बीच खुले टैंट में ओपीडी, डॉक्टरों का यह विरोध; मरीजों की सजा
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    जयपुर. इन दिनों प्रदेश के हजारों मरीज सेवारत डॉक्टर्स के अहम और सरकार की नजरअंदाजी के बीच परेशान होने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हैं कि डॉक्टर्स विरोध के रूप में टैंट लगाकर मरीजों को देखने का दावा कर रहे हैं लेकिन 16 से 18 डिग्री के तापमान में छोटे बच्चों को लेकर आने वाली माएं, बुजुर्ग और गंभीर मरीज भी इन “टैंट” रूपी सेवाओं से परेशान हो रहे हैं। यहां तक कि जिला अस्पतालों में मरीजों के ऑपरेशन टालने पड़ रहे हैं या उन्हें आगे की तारीखें दी जा रही हैं। ऐसे में पिछले कई दिनों से इलाज के लिए परेशान हो रहे मरीजों को अंतिम हल कब निकलेगा, इसका इंतजार है। इस बीच भास्कर ने प्रदेश भर के अस्पतालों से वे तस्वीरें निकाली, जो मरीजों का दर्द बताने के लिए काफी हैं। लेकिन सरकार और डॉक्टर्स दोनों ही इसे देखकर भी अनदेखा कर रहे हैं। ऐसे में सवाल यह कि आखिर इस मर्ज का इलाज कब होगा।


    पिछले एक महीने से सेवारत डॉक्टर्स और सरकार के बीच चल रही “तनातनी” का दौर जारी है। लेकिन खामियाजा मरीजों और उनके परिजनों को उठाना पड़ रहा है। प्रदेश के जिला अस्पतालों, सामुदायिक केन्द्र और प्राथमिक केन्द्रों में अधिकांशत: सेवारत डॉक्टर्स कार्यरत हैं।


    अजमेर, जैसलमेर, धौलपुर, भरतपुर, झुंझुनू, उदयपुर, राजसमंद, झालावाड़, भीलवाड़ा, कोटा, दौसा सहित अनेक जिलों में टैंट में मरीजों को देखने का दावा किया जा रहा है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में तापमान लगातार गिरता जा रहा है। यहां आने वाले मरीजों को ठिठुरते हुए इलाज के लिए इंतजार करते देखा जा सकता है। यहां तक कि टैंट के नाम पर सिर्फ एक तरफ ही टैंट लगाया गया है। यानी अधिकांश जगह पर खुले में ही ओपीडी चल रही है।

    मंत्री का डॉक्टरों पर आरोप- वे व्यक्तिगत हित साध रहे हैं

    Q. आखिर सरकार मांग क्यों नहीं मान रही ?
    A.
    उनकी जो भी मांगें थी मान ली गई, अब वे सरकार पर दबाव बनाने और व्यक्तिगत हित साधने के लिए ऐसा कर रहे हैं।

    Q. प्रदेश के हजारों मरीज प्रभावित हो रहे हैं, उनके ऑपरेशन टल रहे हैं, आखिर यह विरोध कब और कैसे थमेगा?
    A.
    मरीजों का इलाज प्रभावित नहीं होने दे रहे हैं। वे बिना वजह ही विरोध जता रहे हैं, टैंट लगा कर इलाज कर रहे हैं। सरकार क्या कर सकती है। उनकी नाजायज मांगों को कैसे मान लें। यह तो उन्हें सोचना चाहिए कि जिन मरीजों को बचाने की शपथ ली, उनकी जान लेने पर तुले हैं।


    Q. डॉक्टरों का कहना है कि मुख्यमंत्री हस्तक्षेप करें तो विरोध वापिस ले सकते हैं, आप पर भरोसा नहीं है क्या?
    A.
    वे क्या सोचते हैं, क्या कहते हैं, उन्हें खुद ही नहीं पता होता। हमने हमारी तरफ से उनकी सभी मांगों को मान लिया है लेकिन हर बार वे नई मांगों को लेकर विरोध जताने लग जाते हैं।

    Q. आरोप है कि ट्रांसफर दमनात्मक नीति के तहत किए गए हैं, यही विरोध की प्रमुख वजह है। क्या ऐसा किया जाना जरूरी था?
    A.
    ऐसा बिलकुल नहीं है। ट्रांसफर पहले भी किए जाते रहे हैं। इसे कोई भी व्यक्तिगत नहीं ले। ऐसे तो सभी कर्मचारी विरोध जताने लग जाएंगे।

    #सरकार को वाकई चिंता है तो मांगें क्यों नहीं मान लेती : अजय चौधरी

    Q. डॉक्टर मरीजों को टैंट में बैठकर देख रहे हैं, जब इलाज करना ही है तो अस्पताल के भीतर भी मरीज देख सकते हैं?
    A.
    टैंट लगाकर इलाज विरोध प्रदर्शित करने का एक तरीका है। हम चाहते हैं कि मरीजों को इलाज मिलता रहे और हमारा विरोध भी सरकार तक पहुंच जाए। हालांकि मानसिक रूप से परेशान है और इसका असर भी मरीजों पर पड़ रहा है।


    Q. कभी हड़ताल तो कभी “टैंट सर्विसेज”, आपकी वजह से इतने दिनों से मरीज परेशान हो रहे हैं, हल कब निकालोगे?
    A.
    हम समझते हैं कि मरीज परेशान हो रहे हैं। ऑपरेशन तक प्रभावित हो रहे हैं। लेकिन सरकार नहीं समझ रही। मांगें मान लें तो आज से ही विरोध खत्म कर दें।

    Q. सरकार कहती है, मांगें मान ली, फिर विरोध क्यों?
    A.
    सरकार ने 27 नवम्बर को ट्रांसफर आर्डर जारी क्यों किए। यह दमनात्मक कार्रवाई की थी और इसे किसी भी तरह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    Q. तो आप पीछे नहीं हटेंगे, चाहे मरीज परेशान क्यों नहीं होते रहें?
    A.
    मुख्यमंत्री हस्तक्षेप करती हैं तो ही पीछे हटेंगे, अन्यथा नहीं।

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