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फ्रॉड कंपनियों पर लगाम कसने वाले कानून में खामियां, राष्ट्रपति ने अध्यादेश लौटाया

अफसर-नेताओं को बचाने वाले कानून को लेकर पहले बैकफुट पर आई थी सरकार

मनोज शर्मा | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:51 AM IST

  • फ्रॉड कंपनियों पर लगाम कसने वाले कानून में खामियां, राष्ट्रपति ने अध्यादेश लौटाया
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    फ्रॉड कंपनियों पर लगाम कसने वाले कानून में खामियां, राष्ट्रपति ने अध्यादेश लौटाया, अब संशोधन के साथ तैयारी।

    जयपुर. लोगों से लुभावने वादे कर पैसा बटोरकर नहीं लौटाने या भागने वाली फ्रॉड कंपनियों के खिलाफ कानून लाने वाली राज्य सरकार को राष्ट्रपति ने बड़ा झटका दे दिया। राज्य सरकार अध्यादेश के जरिए यह कानून लागू करने वाली थी, लेकिन सवा साल पहले राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया यह अध्यादेश लौटा दिया गया है। कानून में कई खामियां बताने के साथ सरकार को बताया गया है कि इसे मॉडल एक्ट के अनुरूप बनाया जाए। गौरतलब है कि अफसर-नेताओं को बचाने वाला कानून भी अमलीजामा पहनते ही विवादों में आ गया था और वह सरकार को वापस लेना पड़ा था। यह कानून अब केंद्र ने लौटा दिया है।


    राज्य सरकार सवा साल पहले राजस्थान प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट ऑफ डिपोजिटर्स इन फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट्स अध्यादेश-2016 लेकर आई थी। कैबीनेट की मंजूरी के बाद यह अध्यादेश केंद्र सरकार के जरिए राष्ट्रपति को मंजूरी के लिए भेजा गया था। कानून में फ्रॉड कंपनियों एवं चिटफंड कंपनियों को दायरे में लाया गया था। ताकि, ऐसी कंपनियों की संपत्ति जब्त कर पैसा निवेशकों को बराबर बांटा जा सके। निवेशकों को सुरक्षा देने को लेकर यह महत्वपूर्ण कानून खामियों के चलते लागू नहीं हो सका है। इस कानून में भी खामियां सामने आने के बाद प्रारूप बनाने वाले अफसरों पर भी अब सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इसमें कोई नई बात नहीं है।


    गौरतलब है कि अब तक फ्रॉड करने वाली कंपनियों के खिलाफ आईपीसी के तहत कार्रवाई होती थी, लेकिन उनकी संपत्ति जब्त कर निवेशकों का पैसा लौटाने का प्रावधान नहीं था। अगर कोई चिटफंड या वित्तीय संस्था फ्रॉड करती है तो कलेक्टर के पास निवेशक शिकायत कर सकेंगे, कंपनी का पक्ष सुनकर संपत्ति जब्त की जा सकेगी। हर जिले में अलग से जज को फ्रॉड के मामले सुनने के लिए अधिकृत किया गया था। जिला जज एक साल में फ्रॉड के मामले की सुनवाई कर फैसला दें, ऐसे भी प्रावधान हैं। आरोपियों को 7 साल तक की सजा और 2 लाख रु. तक जुर्माने के प्रावधान किए गए हैं।

    गृह विभाग ने कहा- अध्यादेश फिर लाएंगे

    गृह विभाग का कहना है कि अध्यादेश में सुधार कर संशोधित अध्यादेश ही लाएंगे। क्योंकि, कानून बनाने के लिए विधानसभा में बिल पारित करवाना होगा। इसमें काफी देरी होने की संभावना है। इसलिए, केंद्र के सुझावों को ध्यान में रखते हुए संशोधित अध्यादेश लाने की तैयारी की जा रही है। इसे केबीनेट की मंजूरी के बाद फिर से राष्ट्रपति को भेजा जाएगा।

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Web Title: President Returned Rajasthan Govt S Ordinance
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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