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अंगूठे के निशान की क्लोनिंग कर दिलवाई पुलिस भर्ती परीक्षा, पांच और गिरफ्तार

3 वर्ष पहले
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जयपुर(राजस्थान).  कॉन्स्टेबल भर्ती की ऑनलाइन परीक्षा। नकल के लगातार नए-नए पैंतरे सामने आ रहे हैं। गुरुवार को पकड़े गए गिराेह ने तो सबको चौंका दिया। इस गिरोह ने असली अभ्यर्थी के थंब प्रिंट की क्लोनिंग कर ली और उसकी जगह फर्जी अभ्यर्थी को पेपर हल करने भेज दिया। एसओजी ने ग्रामसेवक और मास्टरमाइंड सहित 3 बदमाशों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों का खुलासा इससे भी चौंकाने वाला रहा। वे बोले- इसी तरह थंब प्रिंट की क्लोनिंग कर 7 सेंटरों पर 25 कैंडिडेट्स की जगह एक्सपर्ट को बैठाकर पेपर हल कराया जा रहा है।

 

वो 3 तरीके जिनसे सबसे महत्वाकांक्षी पहचान योजना को धता बताया

1. फिश ऑयल से थंबप्रिंट क्लोन करते

आरोपियों ने यू ट्यूब से थंब इंप्रेशन का क्लाेन बनाना सीखा। सबसे पहले गर्म वैक्स को किसी सतह पर डालते। यहां अभ्यर्थी के अंगूठे पर फिश ऑयल लगाकर उसका वैक्स पर थंब इंप्रेशन लेते। जब इंप्रेशन आ जाता तो वैक्स की परत पर फेविकोल की हल्की परत बिछाते, इंप्रेशन फिक्स हो जाता।

 

2. टेस्टिंग के लिए आधार वैरिफाई करवाया

 परीक्षा से पहले थम्बप्रिंट का क्लोन बनाने के बाद टेस्टिंग के लिए आरोपियों ने आधार कार्ड वैरिफाई करवाया। इसके लिए उन्होंने अभ्यर्थी के थम्बप्रिंट को दूसरे व्यक्ति के थम्ब पर लगाकर आधार कार्ड का पंजीयन कराया। जब वहां ये सही साबित हो गया तो इसका इस्तेमाल परीक्षा में किया।

 

3. अभ्यर्थी की जगह एक्सपर्ट को भेजते, बायोमीट्रिक मशीन भी नहीं पकड़ पाती

थंब इंप्रेशन के क्लोन को असली अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने जाने वाले एक्सपर्ट के थम्ब पर लगा देते। काम इतना सफाई से करते कि बायोमीट्रिक मशीन नहीं पकड़ पाती और असली अभ्यर्थी की जगह एक्सपर्ट आराम से पेपर देकर परीक्षा सेंटर से बाहर आ जाता।

 

बड़ा सवाल : सिम से लेकर आधार तक सब थंब प्रिंट पर, वे कितने सुरक्षित

सिम लेने से लेकर बैंक में खाता खोलने और सरकारी योजनाओं का फायदा उठाने तक थंब इंप्रेशन से ही पहचान की जाती है। स्वयं आधार कार्ड का आधार भी अंगुलियों के निशान ही होते हैं। दफ्तरों में बायोमीट्रिक से ही उपस्थिति दर्ज की जा रही है। राशन वितरण भी अंगूठे के निशान से हो रहा है। ऐसे में परीक्षा को धोखा देने का यह मामला हमारी पहचान की सुरक्षा से सीधे जुड़ गया है। सवाल है कि थंबप्रिंट की क्लोनिंग से तो कई तरह के, कई स्तरों पर धोखे दिए जा सकते हैं। पहचान की सबसे महत्वाकांक्षी योजना- आधार...जिसे हम अभी तक सबसे सुरक्षित मान रहे थे, उसे भी नकल गिरोहों ने धता बता दिया। 

 

पुलिस की परीक्षा... अभी तो 36 दिन और बाकी हैं

पुलिस कांस्टेबल के 5390 पदों के लिए पहली बार ऑनलाइन परीक्षा हो रही है। परीक्षा 7 मार्च से शुरू हुई है, 45 दिन तक चलेगी। जयपुर में 12 मार्च और 14 मार्च को कम्प्यूटर हैक कर दूसरी जगह से पेपर हल करने का खुलासा हुआ, 12 गिरफ्तारियां हुईं।

 

अलवर में भी असली कैंडिडेट्स की जगह एक्सपर्ट द्वारा परीक्षा दिलाने की कोशिश

 

- एसओजी का दावा है कि इनमें से 6 आरोपी व अभ्यर्थी को चिह्नित कर लिया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में डीग (भरतपुर) निवासी मास्टरमाइंड नरेश सिनसिनवार, भरतपुर के ही रूपवास का रहने वाला नरेश प्रजापत व अभ्यर्थी पलवल (हरियाणा) निवासी देवेन्द्र है। एसओजी ने तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया। जहां से पूछताछ के लिए छह दिन के रिमांड पर भेज दिया।

- इस मामले में एक दर्जन से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारियां होगी। गिरोह ने अलवर में भी असली कैंडिडेट्स की जगह एक्सपर्ट द्वारा परीक्षा दिलाने का प्रयास किया था। लेकिन एसओजी की टीम पहुंचने की भनक लगने पर एक्सपर्ट परीक्षा नहीं दे पाए।  

 

पिछले 3  दिन से गिरोह की तलाश कर रही थी एसओजी 

पुलिस मुख्यालय हैडक्वार्टर आईजी संजीब कुमार नार्झरी ने थम्बप्रिंट का क्लोन बनाकर कैंडिडेट्स की जगह एक्सपर्ट द्वारा परीक्षा देने वाले गिरोह के सक्रिय होने की सूचना एसओजी को दी थी। पिछले तीन दिन से एसओजी की टीम गिरोह की तलाश कर रही थी। तकनीकी आधार पर डाॅल्फिन में एक अभ्यर्थी की जगह एक्सपर्ट आने की सूचना मिली थी। सूचना पर एसओजी की टीम स्कूल परिसर में पहुंची। जहां पर अभ्यर्थी देवेन्द्र व नरेश सिनसिनवार स्कूल परिसर के बाहर खड़े थे। जबकि नरेश प्रजापत परीक्षा देकर सेंटर से बाहर आया तो एसओजी ने तीनों को हिरासत में ले लिया। तीनों ने पूछताछ में थम्बप्रिंट का क्लोन बनाकर देवेन्द्र की जगह नरेश द्वारा परीक्षा देने की बात कबूली।

 

जयपुर के दो सेंटर से दो तथा अजमेर में 8 आरोपी गिरफ्तार

एसओजी ने हाईटेक तरीके से नकल कराने के मामले में जयपुर के सरस्वती इन्फोटेक परीक्षा केंद्र के संचालक मुख्तियार व डाॅल्फिन स्कूल केंद्र से अभ्यर्थी पंकज को गिरफ्तार किया है। अजमेर में भी पुलिस ने 8 लोग गिरफ्तार किए हैं। ये कायड़ स्थित अजमेर इन्फोटेक केंद्र के कैंडिडेट्स का बाहर बैठकर पेपर हल करा रहे थे। कैंडिडेट्स से इन्होंने 4-4 लाख रु. लिए। 

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