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जंगल में है बाबाओं का कब्जा, बोर्ड लगाया जिस पर लिखा है-अंदर घुसे तो बुरा होगा ऐसा

तीन सौ बीघा जंगल में बाबाओं का कब्जा, कोर और बफर में बसे हैं बाबा, गांव हटाए जा रहे, लेकिन बाबाओं से लगता है डर

Danik Bhaskar | Mar 07, 2018, 07:57 AM IST
सरिस्का बाघ अभयारण्य के कोर एरिया में रईका ढाणी के समीप जंगल में कब्जा कर यहां रहने वाले बाबा ने गेट पर बोर्ड लगा दिया है, जिस पर घुसने वाले के साथ बुरे व्यवहार की चेतावनी लिखी है। सरिस्का बाघ अभयारण्य के कोर एरिया में रईका ढाणी के समीप जंगल में कब्जा कर यहां रहने वाले बाबा ने गेट पर बोर्ड लगा दिया है, जिस पर घुसने वाले के साथ बुरे व्यवहार की चेतावनी लिखी है।

अलवर. सरकार सरिस्का के जंगलों से गांवों को बेदखल कर रही है। अब तक 4 गांवों के लोगों को सरिस्का के कोर एरिया से बाहर निकाला जा चुका है, लेकिन उसी जंगल में 200 से ज्यादा बाबा व उनके चेले अवैध रूप से जमे हैं। उन्होंने जंगल में मंदिर-मजार के नाम पर पक्के निर्माण कर लिए हैं, लेकिन न तो वहां भक्त आते हैं और ना ही पूजा होती है। और भी कई चौंकाने वाले सच सामने आए जब भास्कर ने जंगल के भीतर जाकर पड़ताल की। पता चला कि आस्था स्थल के नाम पर अकेले सरिस्का में करीब 300 बीघा से ज्यादा जमीन बाबाओं के कब्जे में है। कोई इस पर चरस-गांजे की खेती कर रहा है तो किसी ने विदेशी नस्ल के कुत्ते पालने-बेचने का धंधा चल रहा है।

श्रद्धालुओं से ज्यादा नशेड़ी और सट्टे के नंबर लेने वाले पड़े रहते हैं। सरिस्का कोर एरिया के राइका गांव में तो बलबीर दास नाम के बाबा ने वन विभाग, पुलिस और यहां तक कि स्थानीय ग्रामीणों की एंट्री बंद कर दी है। वन भूमि पर चारदीवारी कर उस पर ताला लगा दिया और चेतावनी का बोर्ड लगा दिया कि यहां घुसने की कोशिश की तो आपके साथ बुरा व्यवहार होगा। हैरानी की बात ये है कि वन अधिकारी आस्था के नाम पर हो रहे कब्जों की हकीकत से वाकिफ होकर भी कार्रवाई नहीं कर रहे। सरिस्का के कोर व बफर एरिया में एक साल के भीतर अवैध धर्म स्थलों की बाढ आ गई है। यहां अवैध पक्के निर्माण, बोरिंग, बिजली के कनेक्शन कर लिए गए हैं। बफर एरिया में करीब 12 बीघा जमीन पर काबिज एक बाबा का तो यह तक कहना था कि किस बात का डर है, बाबाओं की सरकार है। ये तो रक्षा कर रही है। हमारे लिए बहुत कुछ किया है।

बाबा की परमिशन के बिना जंगलात वाले भी नहीं आ सकते.. आप कोई भी हो चले जाओ

सरिस्का के कोर एरिया के राइका में तो बलबीर दास मीणा नाम के बाबा ने नक्सली तर्ज पर करीब तीन किलोमीटर पहाड़ी दर्रे पर कब्जा कर रखा है। दो पहाड़ों के बीच पक्की दीवार और गेट बना उस पर ताला लगाकर रखता है। इसके भीतर आश्रम-मंदिर है जहां वह अपनी मुंहबोली तलाकशुदा बेटी और उसके पुत्र के साथ अकेला रहता है। बाबा ने यहां बोर्ड लगा चेतावनी लिख रखी है कि - बिना उसकी इजाजत कोई भी अंदर आया तो बुरा बर्ताव होगा। जिसकी जिम्मेदारी खुद की होगी। आज्ञा से बाबा बलबीर दास। ग्रामीणों ने बताया कि कोई भी भीतर जाने की कोशिश करे तो बाबा गाली-गलौच, पथराव व फायरिंग तक कर देता है। एक व्यक्ति को वह गोली मार चुका, लेकिन तब ग्रामीणों ने समझाइश से मामला निपटा दिया। श्रद्धालुओं, वनकर्मियों व ग्रामीणों को भी अंदर नहीं आने देता। महिला को लेकर कोई भी आरोप लगा देता है। ग्रामीण कहते हैं, बाबा है इसलिए हम भी उधर नहीं जाते। भीतर बाबा क्या करता है, किसी को नहीं पता।

बाबा बोला मेरे पास 12 बीघा जमीन, 12 अरब की तो होगी

सरिस्का बफर जोन में वन विभाग अलवर बायोडायवरिस्टी पार्क से सटी जमीन पर धौला बाबा नाम के व्यक्ति ने आश्रम बना रखा है। भास्कर बाबा के आश्रम के भीतर पहुंचा और उससे बात की तो उसका कहना था कि मेरे पास 12 बीघा जमीन है, कोई 12 अरब की होगी..करोड़ की होगी। अब मैं उस पर कुछ करना चाहता हूं...कोई कॉलेज खोल लूं? होटल, रेस्टोरेंट बनाया जाए या ऐसा करता हूं एक दानपेटी रखवा देता हूं। पहले तो लोग नहीं आते थे.. अब पार्क बना है। लोग आने लगेंगे तो हजार-दो हजार रोज मिल जाएंगे।

छह साल से रह रहे हैं, पक्का मंदिर व समाधि तीन-चार महीने पहले ही बना

सरिस्का बफर जोन के जम्मू साणा झरने के पास पुराने धूणे के स्थान पर पहाड़ के काफी हिस्से में पक्का निर्माण कर लिया गया है। भास्कर यहां पहुंचा तो बाबा के कहीं भ्रमण पर जाने की बात पता चली। स्थान पर बैठे पांच-छह चेले गांजा पीसकर चिलम तैयार करते मिले। इनमें दो युवक अलवर शहर के थे। उनका कहना था कि वे बाबा की सेवा में रहते हैं। बाबा जिनकी उम्र मात्र 24 साल है, वे बाल संन्यासी हैं। छह साल से यहां थे। अब 3-4 महीने पहले ही यहां पक्के मंदिर, समाधि बनवाए हैं।

सटोरियों की कतार

भास्कर को जानकारी मिली कि यहां रहने वाला बाबा सट्टे के नंबर देता है। कई लोग चंद महीनों में लखपति हो गए हैं। बाबा अमरचंद नाम के व्यक्ति की डस्टर कार में घूमते हैं। एप्पल का आईफोन रखते हैं और कई सेवक 24 घंटे साथ रहते हैं। यहां पहुंच पड़ताल की तो आईफोन और कार की बात सही निकली।

बाबा बोला मेरे पास 12 बीघा जमीन, 12 अरब की तो होगी बाबा बोला मेरे पास 12 बीघा जमीन, 12 अरब की तो होगी

सरिस्का बफर जोन में वन विभाग अलवर बायोडायवरिस्टी पार्क से सटी जमीन पर धौला बाबा नाम के व्यक्ति ने आश्रम बना रखा है। भास्कर बाबा के आश्रम के भीतर पहुंचा और उससे बात की तो उसका कहना था कि मेरे पास 12 बीघा जमीन है, कोई 12 अरब की होगी..करोड़ की होगी। अब मैं उस पर कुछ करना चाहता हूं...कोई कॉलेज खोल लूं? होटल, रेस्टोरेंट बनाया जाए या ऐसा करता हूं एक दानपेटी रखवा देता हूं। पहले तो लोग नहीं आते थे.. अब पार्क बना है। लोग आने लगेंगे तो हजार-दो हजार रोज मिल जाएंगे।   

 

नाम नागा बाबा, गृहस्थ जीवन  और कुत्ते बेचकर कमाई नाम नागा बाबा, गृहस्थ जीवन और कुत्ते बेचकर कमाई

सरिस्का बफर जोन में ही रावण देहरा में नागा बाबा सूरज भारती ने वन भूमि पर पहले पक्का आश्रम बनाया। भास्कर यहां पहुंचा तो पता चला कि कुछ माह पहले उसने तीन बीघा जमीन पर पक्की चारदीवारी बना ली है। आश्रम में धूणे, मंदिर हैं, लेकिन पूजा करने वाले कम और चेले ज्यादा रहते हैं। बाबा ने बातचीत में खुद कहा कि चारदीवारी बनवा ली है अब यहां कुछ बगीची वगैरह बनानी है। बाबा विदेशी नस्ल के अपने कुत्तों के बच्चे बेचने का काम भी करता है। करीब आधा दर्जन पिल्ले बेच चुका है। हर पिल्ले की कीमत 3 हजार रुपए तक है।


200 बीघा क्षेत्र में तीन लोग रहते हैं 

पहाड़ी दर्रे में बरसाती नाला बहता है। यहां करीब 200 बीघा जंगल में बाबा, उसकी मुंहबोली बेटी व एक बालक ही रहते हैं। यह जंगल एसटी11 सहित चार बाघों, पैंथर और हायना की नियमित मूवमेंट वाले एरिया है। बाबा की चारदीवारी से 100 कदम दूर भास्कर को बाघ के ताजा शिकार के मृतावशेष मिले। समीप ही करीब 50 घरों की राइका ढाणी है, जिसे सरिस्का बाघ परियोजना के 27 गांवों के साथ विस्थापित किया जाना है। बाबा को हटाने की हिम्मत कोई नहीं कर रहा।  

 

लगा हुआ बोर्ड। लगा हुआ बोर्ड।