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हर मौसम में रंग बदलता है इस मंदिर का शिवलिंग, एशिया का सबसे बड़ा है

स्वंभू है महादेव मंदिर का शिवलिंग, महाशिवरात्रि को देश भर से आते है लाखों श्रद्धालु, एशिया महाद्वीप का सबसे बड़ा शिवलिंग

Danik Bhaskar | Feb 13, 2018, 03:23 AM IST

धौलपुर. सैंपऊ कस्बे का ऐतिहासिक महादेव मंदिर न केवल जन-जन की आस्था का केंद्र हैं, बल्कि देश भर में भव्यता और नक्काशी का अद्भुत नमूना भी हैं। बल्कि मौर्य कालीन स्थापत्य कला का जीवंत उदाहरण है। इनको राम रामेश्वर भी कहा जाता है पार्वती नदी की ओर धौलपुर जिले के सैंपऊ कस्बे से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर महाराजा भगवंत सिंह ओर उनके संरक्षक कन्हैयालाल राजधर की धार्मिक आस्था का परिचय है।

- मंदिर में स्थापित शिवलिंग करीब सात सो वर्ष पुराना है यह शिवलिंग संवत 1305 में तीर्थाटन करते हुए यहां आए श्याम रतन पुरी ने एक पेड़ के नीचे अपना धुना लगा लिया और कुछ दिन बाद उन्हें आभास हुआ की इन झाड़ियों में शिवलिंग दबा है। झाड़ियों को हटाकर इस जगह की खुदाई की तो शिवलिंग दिखाई दिया।

- खुदाई करते समय शिवलिंग खंडित हो गया और खंडित मूर्ति को निषेध मानकर श्याम रतन पुरी ने मिटटी से दबाना शुरू किया तो मूर्ति मिटटी में नहीं दबी, जितना दबाते गए वो उतनी ही बाहर निकलती गई और आठ फीट तक मिटटी का ढेर लगाने के बाद भी शिवलिंग दिखता ही रहा। इसके बाद उन्होंने गोलाकार चबूतरा नुमा बनाकर शिवलिंग की पूजा-अर्चना शुरू कर दी।

- मंदिर की अद्भुत नक्काशी ओर भव्यता का निर्माण भूतल से करीब आठ फीट उंचाई पर शुरू किया गया है भव्य ओर किलेनुमा तीन प्रवेश द्वार है और बीस सीढिय़ां चढ़ कर मंदिर में प्रवेश होता है।

- पचास गुणा साठ फीट लम्बे-चौड़े चोक में तीन विशाल बारहद्वारी बनी है इन दीवारों में धौलपुर के लाल पत्थर का उपयोग किया गया है। चौक के बीच में अष्टकोण की आकृति में बने शिवालय में पौराणिक शिवलिंग स्थापित है और शिवालय के आठ द्वार हैं।

- शिखर बंध मंदिर चौक से 42 फीट और भूतल से 50 फीट ऊंचा है। शिवलिंग भी चौक से आठ फीट नीचे भूतल तक है। गुफानुमा द्वार से भूतल तक शिवलिंग के निकट जाने का रास्ता भी है और भूतल से मंदिर चार मंजिला है जो दूर से ही अपनी भव्यता का आभास कराता है।

- सैंपऊ महादेव मंदिर को राम रामेश्वर भी कहा जाता है। बताते हैं कि मुनि विश्वामित्र के साथ भ्रमण पर आए भगवान श्री राम ने पूजा-अर्चना के लिए इस शिवलिंग की स्थापना की थी। कालांतर में यह नीचे दब गया और ऊपर झाड़ व वनस्पतियां उग गई। श्याम रतन पुरी ने जब यहां खुदाई की तब यह शिवलिंग बाहर निकला।

भव्यता में रामेश्वर के बाद दूसरे नंबर पर
- इतिहासकारों की मानें तो सैंपऊ महादेव मंदिर का शिवलिंग भारतवर्ष ही नहीं अपितु एशिया महाद्वीप में पहला स्थान रखता है। वही मंदिर की भव्यता और विशालता तमिलनाडु रामेस्वरम के बाद दूसरे स्थान पर है।

- मंदिर महंत रामभरोसी पुरी ने बताया कि तत्कालीन रियासत के महाराज कीरत सिंह ने शिवलिंग की खुदाई कर दूसरी जगह स्थापित करने की कोशिश की गई थी, लेकिन शिवलिंग का अंत नहीं पाया गया। लिहाजा उसी स्थान पर वैदिक विधि द्वारा स्थापना कराई गई। मंदिर का शिवलिंग मौसम के अनुसार रंग भी बदलता रहता है।