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ये है 30 साल पहले की पद्मावती, वही भंसाली और वही खिलजी लेकिन...

दूरदर्शन पर श्याम बेनेगल निर्देशित सीरियल ‘भारत एक खोज’ की 26वीं कड़ी में संजय भंसाली ने की थी पद्मावती के एपिसोड की एडिट

Bhaskar News | Last Modified - Jan 23, 2018, 01:46 PM IST

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    जयपुर. फिल्म पद्मावत को लेकर आज भले ही पूरे देश में उबाल हो लेकिन पद्मावती की यह गाथा 30 साल पहले देश में घर-घर में छोटे पर्दे पर देखी जा चुकी है। दिलचस्प ये है कि संजय भंसाली भी इस गाथा के अहम हिस्सेदार रह चुके हैं। संजय भंसाली उस वक्त इसकी एडिटिंग टीम का हिस्सा थे। वर्ष1988 में दूरदर्शन पर जवाहर लाल नेहरू की पुस्तक भारत एक खोज (डिस्कवरी ऑफ इंडिया) पर श्याम बेनेगल के निर्देशन में प्रसारित हुए सीरियल में मलिक मुहम्मद जायसी के काव्य और लोक कथाओं को आधार मानते हुए यह दिखाया गया। भारत एक खोज की 26वीं कड़ी में दिल्ली सल्तनत भाग : 3 ‘पद्मावत व तुगलक खानदान’ में इस गाथा को दिखाया गया था। दिलचस्प ये है कि इसमें अलाउद्दीन खिलजी के पद्मावती को शीशे में देखने और राजा रतन सिंह के अलाउद्दीन की शर्तें मान लेने के दृश्य भी शामिल थे। इस समय यह एपिसोड खूब वायरल और चर्चित हो रहा है।

    #धारावाहिक के मुख्य डायलॉग

    राजा रतन सिंह के बारे में तांत्रिक राघव चेतन अलाउद्दीन खिलजी से कहता है-

    वह नाम का रत्न है, वैसे ठीकरे से भी बदतर है। हमेशा खुशियों से घिरा रहता है, बहादुर ऐसा कि उसकी तलवार कभी म्यान से बाहर ही नहीं निकलती। बेहिसाब दौलत का मालिक है, लेकिन अय्याश ऐसा कि अंत:पुर से कभी बाहर ही नहीं निकलना चाहता। वो राजा के नाम पर कलंक है।


    इस पर अलाउद्दीन कहता है-
    दरबार से निकाले गए हो इसलिए मालिक को जलील कर रहे हो। जमीर फरोश लगते हो। शुरुआत में पद्मावती का मजाक उड़ाते हुए खिलजी कहता है कि - काहे की पद्मावती। हमारी 1600 बेगमों में से किसी की लड़की को भी देख लोगे तो नमक की तरह पिघल जाओगे।


    खिलजी जब रतन सिंह को पत्र लिखकर पद्मावती को उसके हवाले करने की बात कहता है तब रतन सिंह जवाब देता है-
    पद्मावती चित्तौड़ की राज लक्ष्मी है, उनका अपमान करने वाले को हम जिंदा नहीं छोड़ेंगे। अगर अलाउद्दीन ने चित्तौड़ की तरफ देखा भी तो हम उसकी हस्ती मिटा देंगे। हमारा चित्तौड़ कागज का नहीं बना है, बल्कि उसका एक-एक पत्थर हमारी तरह दृढ़ संकल्प से बना है। अगर हमारी लाश पर पांव रखकर भी वह चित्तौड़ में घुसने में कामयाब हो गया तो भी महारानी के पांव का नाखून तक नहीं देख पाएगा।

    चित्तौड़ की बहादुरी की प्रशंसा, लेकिन लड़ने के तरीके की आलोचना
    इस एपिसोड के शुरुआत में ओमपुरी की आवाज में यह बताया गया है कि सन 1303 में अलाउद्दीन खिलजी ने रानी पद्मावती पर मोहित होकर चित्तौड़ पर चढ़ाई की। बहादुरी में तो चित्तौड़ में पहले जैसा हौसला था लेकिन उनके फौजी तरीके बेकार हो चुके थे। इसीलिए अलाउद्दीन की मुस्तैद सेना ने उन्हें कुचल डाला और चित्तौड़ को लूट लिया। पदमावती की यह गाथा सामंतवादी दौर की परंपराओं की एक दिलचस्प मिसाल है जिसमें नैतिक उपदेश ऐेतिहासिक सच्चाई से ज्यादा महत्व रखते हैं।

    ओमपुरी बने खिलजी
    मलिक मुहम्मद जायसी के रुपक काव्य पर आधारित इस सीरियल में ओम पुरी अलाउद्दीन खिलजी बने थे जबकि रतन सिंह का किरदार राजेंद्र गुप्ता ने निभाया था। कुवैत में जन्मी मॉडल व आर्टिस्ट सीमा केलकर इसमें पद्मावती बनी थी। भारत एक खोज के अलावा केलकर टीवी धारावाहिक टीपू सुल्तान और नसीम और हिंदी फिल्म लव यू हमेशा में भी काम कर चुकी हैं।

    जौहर का जिक्र नहीं

    पद्मावती की इस गाथा में चित्तौड़ दुर्ग में जौहर का जिक्र नहीं था। साथ ही घूमर डांस में पद्मावती अन्य महिलाओं के साथ तो खड़ी हैं लेकिन उन्होंने डांस में हिस्सा नहीं लिया।

    तब राजस्थानी गायकों ने दिए सुर

    सीरियल के पद्मावती से संबंधित एपिसोड में गीत गाने वाले हम राजस्थानी कलाकार थे। मेरे अलावा ईला अरुण और शमसुद्दीन ने भी गीत गाए थे।
    -ईश्वर दत्त माथुर, लोक गायक

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Web Title: Sanjay Bhansali Was Also An Important Part Of Padmavati Saga Even 30 Years Ago
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