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'अलाउद्दीन की पत्नी का ही चरित्र ऐसा गढ़ देता कि वह सुसाइड कर लेता'

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के तहत 'बैठक' में 'हंसो, हंसो, फिर हंसो' सेशन।

Danik Bhaskar | Jan 26, 2018, 09:19 AM IST
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल: 'बैठक' में 'हंसो, हंसो, फिर हंसो' सेशन में व्यंग्यकार अनुज खरे और हास्य कवि संपत सरल। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल: 'बैठक' में 'हंसो, हंसो, फिर हंसो' सेशन में व्यंग्यकार अनुज खरे और हास्य कवि संपत सरल।

जयपुर. फिल्म 'पद्मावत' पर छिड़े विवाद के बीच हास्य कवि संपत सरल ने कहा कि यदि मैं पद्मावत लिखता तो अलाउद्दीन खिलजी की पत्नी का चरित्र ही ऐसा गढ़ देता कि अलाउद्दीन आत्महत्या कर लेता। सरल ने यह जवाब भास्कर डॉट कॉम के एडिटर और व्यंग्यकार अनुज खरे के इस सवाल पर दिया कि यदि पद्मावत संपत लिखते तो क्या होता? सरल का जवाब सुनकर पंडाल में खूब तालियां बजीं। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के तहत 'बैठक' में 'हंसो, हंसो, फिर हंसो' सेशन को मॉडरेट कर रहे खरे ने हल्के-फुल्के व्यंग्य और हास्य रचनाओं के साथ बातचीत की शुरुआत की।

- उन्होंने पद्मावत विवाद पर सवाल किया- आजकल पद्मिनी की बड़ी चर्चा चल रही है। एक मैसेज फैला है कि यदि पद्मावत में सनी देओल होता तो ढाई किलो का हाथ खिलजी को पेड़ पर टांग देता और उसकी सेना जौहर कर लेती। यदि पद्मावत संपत ने लिखी होती तो क्या होता?

- संपत सरल ने इस ताजा विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया से पहले राजनेताओं, भ्रष्टाचार, सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने, रिश्तों पर खूब ठहाके लगवाए।

गांव के लोगों के किफायती अंदाज को बयां किया

- संपत ने कहा कि वे किसी को मिस कॉल तक अपने फोन से नहीं मारते। रिश्तों पर बोले- सबके आपसी संबंध गठबंधन सरकारों जैसे हैं। स्वार्थ ही दो लोगों को जोड़ता है। उम्र का फासला भी रिश्तों में बाधक नहीं बनता। दिन में जो बेटे का क्लासफेलो होता है, शाम को वही बाप का ग्लासफेलो होता है।

- उन्होंने भारत-पाक रिश्तों पर उन्होंने 'बातचीत चल रही है' शीर्षक से खूब कटाक्ष किए।

खरे ने भी हंसाया

- व्यंग्यकार खरे ने भी खूब गुदगुदाया। वे बोले कि सरकार जनता की भलाई के लिए भारी कदम उठा रही है। कदम इतने भारी हैं उठा ही नहीं पा रही।

श्रोताओं को संबोधित करते हुए अनुज खरे। श्रोताओं को संबोधित करते हुए अनुज खरे।