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फ्री में एडमिशन वालों की ले रहे हैं अलग क्लास, स्कूलों में भेदभाव

याचिकाकर्ता-बच्चों को किताबें, ड्रेस व परिवहन सुविधा मुफ्त उपलब्ध कराए

Danik Bhaskar | Jan 16, 2018, 04:26 AM IST

जयपुर. हाईकोर्ट ने आरटीई कानून के तहत प्रदेश के स्कूलों में आधारभूत सुविधाएं नहीं होने के मामले में प्रार्थी को कहा है कि वह कुछ स्कूलों के संसाधन व शिक्षकों की मौजूदा हालात की रिपोर्ट अदालत में पेश करें। मुख्य न्यायधीश प्रदीप नांद्रजोग और न्यायाधीश जीआर मूलचंदानी की खंडपीठ ने यह निर्देश सोमवार को प्रोफेसर राजीव गुप्ता की जनहित याचिका पर दिया।


सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कहा कि वे स्कूलों के मौजूदा हालात की रिपोर्ट पेश कर देंगे। जिस पर अदालत ने प्रार्थी को कहा कि वे ही कुछ स्कूलों की मौजूदा स्थिति के संबंध में रिपोर्ट पेश करें। प्रार्थी ने इससे सहमत होते हुए कहा कि वह जल्द ही 10 स्कूलों का दौरा कर अदालत में अपनी रिपोर्ट पेश कर देंगे। अदालत ने मामले की सुनवाई 8 सप्ताह बाद तय की है।

अधिवक्ता प्रतीक कासलीवाल ने बताया कि आरटीई कानून अप्रैल 2010 से प्रभावी हुआ था और नए स्कूलों पर इसे प्रभावी करने के साथ ही पुराने स्कूलों को इसके लिए तीन साल का समय दिया। नए स्कूलों के लिए यह समय पिछले साल अप्रैल महीने में ही पूरा हो गया। लेकिन फिर भी वे इसे लागू नहीं कर रहे। एक्ट की धारा 12 के तहत निजी स्कूलों को बच्चों की 25 फीसदी सीटें निशुल्क भरनी होती हैं, लेकिन स्कूल ऐसा नहीं कर रहे और इन बच्चों को अलग से पढ़ा रहे हैं। साथ ही 2011 में बने नियम भी अस्पष्ट हैं और फ्री शिक्षा के नाम पर केवल शिक्षा निशुल्क है, जबकि स्कूल संचालक अन्य चीजों की राशि वसूल रहे हैं।

प्रदेश में राजस्थान प्राइमरी एक्ट, 1964 के तहत निशुल्क शिक्षा का प्रावधान किया है, लेकिन उसे लागू नहीं किया। याचिका में सभी स्कूलों की फ्री सीटों की जानकारी एक साथ देने और इसकी लॉटरी एक साथ निकालने के अलावा बच्चों को किताबें, ड्रेस व परिवहन की सुविधा निशुल्क मुहैया कराने का आग्रह किया गया।