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चार भाइयों में से एक को वहाबी बता दिया, मां को न कंधा देने दिया, न ही मिट्टी

ये कैसी इंसानियत! पुलिसने भी थाने में बिठाए रखा

Bhaskar News | Last Modified - Dec 20, 2017, 04:25 AM IST

चार भाइयों में से एक को वहाबी बता दिया, मां को न कंधा देने दिया, न ही मिट्टी

उदयपुर. मजहब के भीतर खड़ी की गई दीवारों के कारण एक बेटा अपनी मां के जनाजे को तो कंधा दे पाया और ही उसकी कब्र को मिट्टी। दरअसल अब्दुल कादिर का कसूर ये है कि उसने सुन्नी के बावजूद वहाबी परिवार में निकाह कर लिया इसलिए उसे सुन्नी समुदाय ने कब्रिस्तान में जाने की इजाजत नहीं दी। समुदाय के इस फैसले में उसके दो भाई भी साथ बताए जा रहे हैं, जबकि उसका एक भाई शहर से बाहर है।

- दरअसल, सोमवार रात को चमनपुरा में 100 वर्षीय रहमत बाई का इंतकाल हो गया था। वह यहां पर अपने बेटे रफीक और हुसैन के साथ यहां रहती थी। उसका तीसरा बेटा उदयपुर से बाहर रहता है जबकि चौथा बेटा अब्दुल कादिर मल्ला तलाई में रहता है। पहले भी कब्रिस्तान में अन्य फिरके के शव को दफनाने को लेकर हुए विवाद को देखते हुए अब्दुल कादिर ने अपनी मां को इंतकाल के बाद दफनाने के लिए हाथीपोल पुलिस थाने में लिखित में सूचना दी। जब यह बात समाज के लोगों को पता चली तो वो अब्दुल के कब्रिस्तान में आने को लेकर विरोध में गए। इसके बाद मामला बढ़ता देख पुलिस ने भी अब्दुल कादिर को उसकी मां के जनाजे में जाने से रोकने के लिए हाथीपोल थाने में बैठा लिया। तनाव की आशंका पर जनाजा भी पुलिस के साये में निकला। अब्दुल कादिर मां को सुपुर्द-ए-खाक नहीं कर पाया। रफीक और हुसैन ने ही सारे रिवाज अदा किए।

- हुसैन का कहना है कि मामला नहीं बिगड़े इस कारण पुलिस ने कागज पर लिखवाया था। समाज वालों के कहने से अब्दुल कब्रिस्तान में नहीं सका।

जबकि यह है हाई कोर्ट का आदेश..कब्रिस्तान और नमाज से रोकें
- मामले को लेकर हाई कोर्ट ने 30 अगस्त 2017 को दिए आदेश में लिखा है कि देवबंदी, सुन्नी मुसलमान समाज के लोगों को उदयपुर के कब्रिस्तान में अपने मृतकों के शव को गाड़ने और मस्जिदों में इबादत करने से नहीं रोका जाए।

- कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कलेक्टर और एसपी को आदेश दिया था कि वे देवबंदी सुन्नी समाज के मुसलमानों को शहर के कब्रिस्तानों में शव गाड़ने और मस्जिदों में नमाज पढ़ने जाने से नहीं रोकने की व्यवस्था बनाए।

यह समाज का अंदरूनी मामला: एएसपी
दरअसल यह समाज का अंदरूनी मामला है। उनके स्तर पर समझाइश कर मामले को निपटा दिया। पुलिस की इसमें कोई भूमिका नहीं है।
- हर्षरत्नू, एएसपी, शहर

वहाबी से निकाह करने पर अब्दुल भी वहाबी हो गया: सचिव
अगर हम वहाबी अब्दुल कादिर को कब्रिस्तान में आने देते तो वहां मौजूद सुन्नियों को फिर से निकाह करना पड़ता। क्योंकि अब्दुल कादिर ने वहाबियों में शादी की है।
- रेयाजहुसैन, सचिव, चेतक मस्जिद कब्रिस्तान

पुलिस ने कहा-मैं जनाजे में जाऊंगा तो माहौल बिगड़ जाएगा: अब्दुल
मां हमेशा से मेरे साथ रही है। हम भी सुन्नी हैं लेकिन वह हमें सुन्नी नहीं मानते हैं। पुलिस प्रशासन को लिखित में कब्रिस्तान में जाने के लिए पत्र लिखा था लेकिन उन्होंने कहा कि माहौल खराब हो जाएगा इसलिए आप नहीं जा सकते। मैं मां को अंतिम मिट्टी तक नहीं दे सका।
- अब्दुलकादिर, मृतक वृद्धा का बेटा

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Web Title: Char bhaaiyon mein se ek ko vhaabi btaa diyaa, maan ko n kndhaa dene diyaa, n mitti
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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