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एंजियोग्राफी फ्री: सरकार उठाएगी 15 करोड़ का भार, लेकिन पेंडेंसी पहुंचेगी 2 माह तक

अभी माह में 3300 जांचें, 10 दिन का इंतजार, संसाधन बढ़ें तो ज्यादा लाभ

Danik Bhaskar | Dec 16, 2017, 05:53 AM IST

जयपुर. राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में एंजियोग्राफी मुफ्त करने से जहां आमजन को बड़ी राहत मिलेगी, वहीं सरकार पर भी अधिकतम 15 करोड़ रुपए का सालाना भार आएगा। चिकित्सा पर खर्च के भारी-भरकम बजट को देखते हुए यह राशि बेहद मामूली ही है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सरकार के 4 साल होने पर बुधवार को ही एंजियोग्राफी नि:शुल्क करने की घोषणा की है। इसके बाद जब भास्कर ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में रोजाना कितनी एंजियोग्राफी के आंकड़े खंगाले तो सामने आया कि इस घोषणा से हर महीने करीब 3300 दिल के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। हर मरीज को सीधे तौर पर 3500 रुपए की बचत होगी। राजस्थान देश का पहला ऐसा राज्य बन जाएगा, जहां नि:शुल्क दवा व जांच के बाद एंजियोग्राफी तक नि: शुल्क ही आमजन को मिलेगी। अब बड़ा सवाल यह है कि वर्तमान में एंजियोग्राफी के लिए मरीजों को 10 दिन इंतजार करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार नि:शुल्क होने से यह पेंडेंसी 2 माह से अधिक हो जाएगी। ऐसे में सरकार को संसाधन बढ़ाने होंगे, तभी मरीजों को पूरा लाभ मिल पाएगा। पेश है इस पर भास्कर की विशेष रिपोर्ट...

सबसे ज्यादा 40 एंजियोग्राफी रोजाना जयपुर में

जयपुर के एसएमएस अस्पताल के अलावा जोधपुर, कोटा, बीकानेर, अजमेर और उदयपुर के मेडिकल कॉलेजों से सम्बद्ध अस्पतालों में एंजियोग्राफी होती हैं। सबसे अधिक एंजियोग्राफी एसएमएस अस्पताल में होती हैं। यहां रोजाना करीब 40 एंजियोग्राफी रोज हो रही हैं। इसके अलावा अन्य पांचों अस्पतालों में करीब 70 एंजियोग्राफी रोज हो रही हैं। यानी प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में रोज 110 और हर महीने 3300 मरीजों की एंजियोग्राफी हो रही हैं।

हर महीने मरीजों को एक करोड़ 15 लाख रुपए तक की राहत
एक एंजियोग्राफी पर करीब 3500 रुपए का खर्च होता है। प्रदेश में करीब 110 एंजियोग्राफी रोज होती हैं तो 3500 रुपए प्रति मरीज के हिसाब से यह खर्च 3 लाख 85 हजार रुपए होता है। एक महीने का खर्च एक करोड़ 15 लाख रुपए और प्रतिवर्ष 13 करोड़ 86 लाख रुपए का खर्च आता है।

विशेषज्ञ बोले- बैलून, गाइडिंग कैथर की सरकारी खरीद हो

कार्डियो एक्सपर्ट डॉ. एसएम शर्मा और डॉ. दीपक माहेश्वरी के अनुसार स्टेंट की कीमत सरकार तय कर चुकी है और एंजियोग्राफी फ्री की गई है। अब कार्डियों के इलाज पर होने वाले मरीजों के खर्च को और कम करने के लिए सरकार अपने स्तर पर बैलून, गाइडिंग कैथर, गाइड-वायर और इनफ्लेशन डिवाइस जैसे उपकरण खरीद करे। इससे कंपनियों से काफी कम कीमत पर खरीद की जा सकेगी। कार्डियों मरीजों को यह बड़ी राहत होगी।

बैड की संख्या में वृद्धि जरूरी, अभी मरीज फर्श पर लिटाने पड़ते हैं
एसएमएस अस्पताल सहित सभी जगह कार्डियो विभाग में बैड की कमी है। एसएमएस में अभी 57 बैड हैं। मरीजों को फर्श पर लिटाना पड़ता है। मरीजों की संख्या के हिसाब से यहां 50 और बैड की जरूरत है। इसी तरह कोटा-बीकानेर में 15-15, जोधपुर-उदयपुर में 20-20, बीकानेर में 10 बैड की और जरूरत है।

सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क एंजियोग्राफी बहुत ही अच्छा कदम साबित होगा। इससे प्रदेश के हजारों लोगों को फायदा मिलेगा। एसएमएस अस्पताल में सबसे अधिक एंजियोग्राफी केस आते हैं। सरकार पर अधिक भार भी नहीं पड़ेगा, इसके लिए सरकार खुद के स्तर पर ही उपकरणों की खरीद करे और सिस्टम से काम हो।
-डॉ. शशि मोहन शर्मा, सीनियर प्रोफेसर, कार्डियोलॉजी, एसएमएस अस्पताल।