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पद्मावत: राजस्थान की संस्कृति में न हिंसा है, न तोड़फोड़, यहां की नसों में तो प्रेम दौड़ता है

पद्मावत : राजस्थान की कहानी यहीं नहीं देखी जा सकी...देश में जिसने फिल्म देखी वो बोला- यह राजपूताना की गौरवगाथा है

Bhaskar News | Last Modified - Jan 26, 2018, 04:32 AM IST

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    पद्मावत. यह कहानी राजस्थान की है। और यह सिर्फ एक कहानी नहीं है। राजस्थान की आन-बान-शान का प्रतीक है। पद्मावती का जौहर राजस्थान मेंं पूजा जाता है। वीरगाथाएं सुनाई जाती हैं। साहित्य रचे गए हैं। ये इस कहानी का एक चेहरा है। दूसरा चेहरा परेशान करता है। यही कहानी अब एक अलग तरह का इतिहास रच रही है। विध्वंसक। जलाने-डराने वाला। वीरांगना की कहानी को जब पर्दे पर उतारा गया, राजपूताना वीरता के किरदार बुने गए तो विरोध शुरू हो गया। गुरुवार को पद्मावत पूरे देश में रिलीज हुई। जिन्होंने फिल्म देखी, वे बताते हैं- यह फिल्म राजपूताना गौरव की ही कहानी है। इसमें किसी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाली कोई बात है ही नहीं।


    ...फिर भी विरोध जारी है

    राजस्थान, गुजरात, मप्र और गोवा में यह फिल्म सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं दिखाई गई। तोड़फोड़-आगजनी की आशंका के डर से सिनेमाघरों, सिनेस्क्रीन संचालकों ने फिल्म रिलीज का जोखिम लिया ही नहीं। राजस्थान में 179 सिनेमाघरों (जयपुर के 24) की स्क्रीन पर गुरुवार को न्यू रिलीज के दिन पुरानी फिल्में ही चलीं। यानी, राजस्थान के इतिहास यह कहानी यहीं शुरू होने से पहले खत्म हो गई। देशभर में छिड़े बवाल से तो राजस्थान का अपमान ही हुआ है, क्योंकि राजस्थान की पहचान इतिहास के खूबसूरत रंगों से तो है ही, यहां के रेतीले धोरों की नसों में संगीत, कला और संस्कृति भी उतनी ही ताकत से दौड़ती है।

    देश में 7 हजार स्क्रीन पर रिलीज होनी थी फिल्म, चार हजार पर ही चल पाई

    नई दिल्ली | फिल्म पद्मावत गुरुवार को कड़े पहरे के बीच आधे-अधूरे तरीके से रिलीज हुई। तोड़फोड़ और हिंसा से डरे सिनेमाघर मालिकों ने राजस्थान सहित चार राज्यों में तो फिल्म चलाई ही नहीं। हरियाणा, बिहार और उत्तरप्रदेश में भी कहीं-कहीं ही फिल्म चलाई गई। इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार पद्मावत करीब 7 हजार स्क्रीन्स पर रिलीज होनी थी, लेकिन पहले दिन 4 हजार पर ही चली। गुरुवार को सुबह के शो में दिल्ली में 60-70% तो मुंबई में 40-45% ऑक्यूपेंसी रही। इसी बीच, करणी सेना ने भारत बंद के तहत कई जगह प्रदर्शन कर मार्च निकाले। राजस्थान के अलावा उत्तरप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, छत्तीसगढ़, बिहार, मप्र, गुजरात सहित आठ राज्यों में प्रदर्शन हुए।

    प्रदेश में कई जगह प्रदर्शन, लेकिन उदयपुर में उपद्रव

    राज्य में फिल्म रिलीज नहीं हुई। फिर भी जगह-जगह जाम और प्रदर्शन हुए। जयपुर में करणी सेना ने बाइक रैली निकाली। चित्तौड़गढ़ में स्कूल बंद करवाए गए। कोटा-बूंदी और उदयपुर-चित्तौड़गढ़ हाईवे पर चक्का जाम रहा। उदयपुर में दो घंटे तक उपद्रव हुआ। एक दर्जन दुकानों में तोड़फोड़ की गई। लूटपाट व मारपीट भी हुई। डूंगरपुर और बांसवाड़ा में भी प्रदर्शन हुए।

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Web Title: Special Story From Rajasthan Over Padmaavati Row
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