--Advertisement--

जेएलएफ: ये वो हैं जो हर रोज खुद से जिद किया करते हैं

किस्से कहानियों की दुनिया से जिंदगी के 3 रंग उभरकर आए हैं

Danik Bhaskar | Jan 29, 2018, 06:24 AM IST
दिल्ली का नरेश दिल्ली का नरेश

जयपुर. लिटरेचर फेस्टिवल में सबरंग हैं। शब्दों के इस संसार में फैशन और ग्लैमर के चटख रंगों की जबरदस्त जुगलबंदी भी है। हमेशा की तरह यह फेस्टिवल जयपुर को आकर्षित करता है, खासकर युवाओं को। साहित्य के इसी मेले में जिंदगी के कई सबक खुलेआम मिलते हैं। ऐसे ही सबक से रूबरू होते हैं हम...। इस बार मेले में तीन ऐसे किस्से भी मिले, जो अनकहे से हैं। इन्हें मंचों और किताबों में जगह नहीं मिली है, मगर इनके किरदार सबको जीने का एक अलग तरीका सिखाते हैं। ये किरदार हैं- मृणाल राय, नरेश और अजहर। बुजुर्ग, जो खुद चल-फिर नहीं पाते। या जो बैसाखी के सहारे हैं या फिर वो जिसे नजर कुछ नहीं आता मगर उसका नजरिया बेहतरीन है।

दिल्ली का नरेश

फौज में जाने का ख्वाब था। सात साल पहले एक्सीडेंट में एक पैर काटना पड़ा। सपना टूट गया। चार-भाई बहनों में सबसे बड़ा नरेश एक वक्त आत्महत्या की सोचने लगा था। मुश्किल वक्त में किताबें साथ बनती चली गईं। कई मोटिवेशनल स्टोरीज ने उसका भी मन बदल दिया। फेस्ट में वह कई सेशन अटैंड कर चुका है। किताबें खरीद रहा है। इन्हीं से कुछ सीखेगा। ग्रेजुएट है। नरेश बोला- जिंदगी में मुश्किलें किसके नहीं है। नौकरी की तलाश है, वो मिल जाएगी तो फिर कोई फिक्र नहीं।

रिटायर्ड प्रोफेसर मृणाल रॉय रिटायर्ड प्रोफेसर मृणाल रॉय

वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी और सीएटल यूनिवर्सिटी में अरसे तक प्रोफेसर रहे। मूल रूप से रांची के हैं। उनकी पत्नी अमेरिकन मूल की एलिजाबेथ स्टुअर्ट हरदम साये की तरह उनके साथ रहती हैं। रॉय बताते हैं-40 साल पहले न्यूरो सर्जरी के जटिल ऑपरेशन ने आधे चेहरे के साथ ही उनकी एक आंख को खत्म कर दिया। गंभीर बीमारी ने व्हील चेयर पर ला पटका। किताबों को पढ़ना और बड़े साहित्यकारों के वाद-विवाद सुनना अच्छा लगता है। मैं ऐसा कोई मौका छोड़ता नहीं।

18 साल का अजहर-  ये रंग भले चटकीले ना हों, अंधेरों से लड़ने की अजब ताकत है 18 साल का अजहर- ये रंग भले चटकीले ना हों, अंधेरों से लड़ने की अजब ताकत है

संवाद टेंट पर भीड़ के बीच काला चश्मा लगाए बैठा अजहर 18 साल का है। वह जन्म के कुछ समय बाद से दृष्टिहीन है। मूल रूप से सीकर के पाटन गांव का है। नेत्रहीन कल्याण संघ की सहायता से पढ़ाई कर दसवीं में 80 फीसदी अंक हासिल किए। बेहद हाजिर जवाबी है। साहित्य में उसकी रुचि बचपन से है। वह पिछले दिनों ही चित्रकूट में आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता में पुरस्कृत हुआ। ब्रेल लिपि की किताबों को वह पढ़ लेता है। सामान्य किताबों को पढ़ नहीं सकता, लेकिन साहित्य की चर्चाओं को वो अपने कानों से सुनकर आनंद की अलग ही दुनिया में चला जाता है।