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बेटी को पहलवान बनाने लिया कर्ज, अब भिड़ेगी अमेरिकी रेसलर से

रिश्तेदार कहते थे ये बेटी तो बर्बाद करेगी, इसलिए पिता गांव छोड़ सिटी में बसे

Danik Bhaskar | Jan 21, 2018, 11:40 PM IST

श्रीगंगानगर(राजस्थान). सन्नी जाट, उम्र 18 साल। ये वो उम्र है जब लड़कियां कॉलेज में पढ़ाई कर अपने सुनहरे भविष्य की नींव रखती हैं, लेकिन सन्नी रोजाना पंजाब के ग्रेट खली एकेडमी में पुरुष पहलवानों से भिड़ती हैं। यह आज से नहीं, पिछले डेढ़ साल से चल रहा है और अब इतनी पारंगत हो चुकी हैं कि वह 24 फरवरी से उदयपुर में होने वाली इंटरनेशनल फाइट में अमेरिकी रेसलरों के सामने रिंग में उतरेंगी। राजस्थान की पहली महिला रेसलर सन्नी ने WWE में भी ट्रायल दिया है, जिसका रिजल्ट भी इसी माह आना है। सन्नी की यहां तक पहुंचने की राह आसान नहीं थी। पिता को कर्ज लेना पड़ा। रिश्तेदारों ने ताने मारे तो गांव तक छोड़ना पड़ा। अब से पहले सन्नी हरियाणा की इंटरनेशनल रेसलर कविता दलाल से मुकाबले में जीत चुकी हैं। कविता दलाल देश की पहली महिला रेसलर हैं। खुद सन्नी से जानिए गांव से रिंग तक पहुंचने की कहानी...


- मूलत: रायसिंहनगर के 68 आरबी की सन्नी बताती हैं- ''जब मैं छोटी थी, तब से मुझे लड़कों जैसे कपड़े पहनना, उछल-कूद पसंद थी। टीवी देखती थी, लेकिन कार्टून और गानों-फिल्मों से दूर रहती थी। टीवी पर वह पुरुषों की रेसलिंग देखा करती थी। उसने तय किया कि वह भी इसी फील्ड में जाएगी। गांव में ही उसने अभ्यास शुरू किया तो रिश्तेदारों ने ताने मारने शुरू कर दिए। सब कहते कि यह लड़की तो माता-पिता और परिवार का नाम बर्बाद करेगी। मैं लड़कों जैसे पेंट-शर्ट पहना करती थी। रिश्तेदारों को इस पर भी आपत्ति होती थी। तानों से तंग हो परिवार ने गांव ही छोड़ दिया। सब शहर आ गए, ताकि मेरे अभ्यास में कोई खलल पैदा न हो। प्राइवेट स्कूल में 12वीं तक पढ़ने के बाद सरकारी कॉलेज में दाखिला लिया, लेकिन अभ्यास के लिए उसने नियमित के बजाय प्राइवेट में एडमिशन लिया।''

- सन्नी बताती है, मेरा रेसलिंग में ही जाना तय था, लेकिन पिता के पास इतनी पूंजी नहीं थी। पिता श्रीगंगानगर में एक प्राइवेट केबल ऑपरेटर के यहां काम कर 8-10 हजार कमाते हैं, जबकि घर खर्च 20 हजार से ज्यादा होता था। घर में तीन भाई-बहन पढ़ने वाले थे।

- इस पर पिता ने मेरा सपना पूरा करने के लिए बैंक से लोन लिया। फिर मैंने पंजाब में द ग्रेट खली की एकेडमी ज्वॉइन कर ली। वहां अब मैं डेढ़ साल से ट्रेनिंग ले रही हूं। कई मुकाबले जीत चुकी हूं। बड़ी बात यह है कि जो रिश्तेदार मेरे परिवार को ताने मारते थे। अब वही परिवार को बधाई देते हैं।

बेटी, बेटों से कम नहीं

- पिता जयमल गोदारा बताते हैं, मेरी बेटी बेटों से कम नहीं। है। गांव में तो मेरी बेटी का रूतबा इतना था कि सब उससे डरते थे।

- सन्नी को भी जब मैंने एकेडमी ज्वॉइन कराई तो शुरू में किसी को बताया तक नहीं। पहली फाइट जीतने पर अखबार में नाम छपा तो सबको पता लगा। अब सभी रिश्तेदार पिता का हौसला बढ़ाते हैं।

राेज पीती है 3 किलो दूध, 5 किलो खाती है फल
- सन्नी शुद्ध शाकाहारी है। रोज तीन किलो दूध पीती है। तीन किलो सेब और दो किलो केले रोज खाती है। सुबह-शाम 5-5 रोटियाें के साथ ही प्रोटीन अलग से लेती है। सुबह ड्राईफ्रूट भी लेती है।

- सन्नी अब उदयपुर में हाेने वाली अंतरराष्ट्रीय फाइट की तैयारी में जुटी है।